Goodbye Movie Review: इमोशंस के सही तार को छेड़ती है बिग बी और रश्मिका मंदाना स्टारर ये फैमिली फिल्म

निर्देशक- विकास बहल
कलाकार- अमिताभ बच्चन, रश्मिका मंदाना, नीना गुप्ता, पावेल गुलाटी, सुनील ग्रोवर, आशीष विद्यार्थी, एली अवराम
"जीवन अलविदा के बारे में नहीं है, बल्कि अलविदा कहने के लिए बहुत सारी अच्छी यादें बनाने के बारे में है".. विकास बहल की फिल्म इसी सोच के साथ बढ़ती है।
तारा भल्ला (रश्मिका मंदाना) दोस्तों के साथ अपने केस जीतने का जश्न मना रही होती है, जब उसके मोबाइल की घंटी बजती है। अपने पिता (अमिताभ बच्चन) का लगातार आता कॉल देखकर वो कॉल नजरअंदाज कर देती है और दोस्तों के साथ जश्न जारी रखती है। अगली सुबह, जो खबर तारा तक सबसे पहले पहुंचती है, वो ये कि उसकी मां गायत्री (नीना गुप्ता) की असामयिक मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद क्या होता है, वही कहानी की पृष्ठभूमि बनती है।
'गुडबाय' एक परिवार की कहानी है जो किसी अपने को खोने के दुख का सामना कर रहा है। अपने दुख को कम करने के लिए एक दूसरे का सहारा बन रहा है। पहले ही बता दें कि इस फिल्म को देखने से पहले टिश्यू जरूर रखें। भावनात्मक स्तर पर यह आसान फिल्म नहीं है। जीवन की आपाधापी में जाने अंजाने हम कितनी ही बार अपने माता- पिता या परिवार को नजरअंदाज कर देते हैं। भविष्य का सोचकर वर्तमान को जीना भूल जाते हैं। लेकिन क्या भविष्य किसी ने देखा है!
फिल्म की कहानी
भल्ला परिवार के चारों बच्चे दुनिया के अलग अलग देशों में बस चुके हैं। सब अपनी जिंदगी में व्यस्त होते हैं, जब अचानक ही एक दिन मां का निधन हो जाता है। मां, एक ऐसी डोर जो अलग अलग रहते हुए भी पूरे परिवार को जोड़कर रखती है। उसकी मां को एक आखिरी बार विदा करने के लिए पूरा परिवार एक छत के नीचे आता है। और फिर कई पुरानी कहानियां सामने आती हैं। पिता और बच्चों के बीच वैचारिक मतभेद होते हैं। बेटी को अंतिम संस्कार से जुड़ी लंबी प्रक्रिया अंध विश्वास लगती है, लेकिन पिता कहते हैं, "हजारों सालों से ये रीति रिवाज चले आ रहे हैं, अगर तुम्हें उनमें विश्वास नहीं है तो, इसमें दुनिया की गलती नहीं है।" धीरे धीरे दोनों की सोच बदलती है। दो पीढ़ियों के बीच की पुल पर दोनों आधे आधे चलते हैं।
निर्देशन
विकास बहल ने भावनात्मक स्तर पर फिल्म में कहीं कमी नहीं छोड़ी है। वो पहले दृश्य के साथ ही दर्शकों को आंसू बहाने के लिए मजबूर करते हैं। परिवार के बीच की संघर्ष आपको कहानी से जोड़ती है। एक दूसरे से फॉर्मल बातचीत की शुरुआत के बाद, परिवार के सदस्यों में धीरे धीरे आत्मीयता का आना प्रभावशाली लगता है। लेकिन पटकथा एक बिंदु से आगे रूकी हुई लगती है। कॉमेडी और मृत्यु पर व्यंग्य वाले दृश्य एक समय के बाद काम नहीं करते हैं। बल्कि कई मौकों पर असंवेदनशील और ढूंसी हुई लगती है। बीते सालों में 'रामप्रसाद की तेहरवीं' और 'पगलैट' जैसी फिल्मों ने मृत्यु के बाद पारिवारिक संबंधों को अलग अलग तरीके से पर्दे पर पेश किया है। विकास बहल की गुडबाय भी इस सूची में शामिल होती है।
अभिनय
अभिनय की बात करें तो फिल्म में नीना गुप्ता बेहद प्रभावी लगी हैं। फ्लैशबैक के दृश्यों में उनका आना फिल्म में जान डाल देता है। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी कैमिस्ट्री हो या बच्चों के साथ, वो अपने अभिनय से दिल जीत ले जाती हैं। अमिताभ बच्चन का होना फिल्म के लिए एक सबसे पॉजिटिव पक्ष है। वह अपने अभिनय से फिल्म को एक स्तर ऊपर उठाते हैं, साथ ही सह कलाकारों को ऊपर उठने की पूरी जगह देते हैं। दुख और अकेलेपन को जिस तरह से उनके किरदार द्वारा दिखाया गया है, वह मार्मिक है। रश्मिका मंदाना अपने किरदार में अच्छी लगी हैं। खासकर बिग बी के साथ उनके कुछ दृश्य दिल छूते हैं। लेकिन हिंदी उच्चारण पर उन्हें अभी बहुत काम करना है। बता दें, इस फिल्म के साथ रश्मिका ने बॉलीवुड में डेब्यू किया है। पावेल गुलाटी, आशीष विद्यार्थी और एली अवराम अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं। पंडित के किरदार में सुनील ग्रोवर कहानी में बदलाव लेकर आते हैं।
संगीत
सुधाकर रेड्डी यक्कंती की सिनेमेटोग्राफी बहल की कहानी में गहराई जोड़ती है। वहीं, संगीत की बात करें तो इस फिल्म के गाने कहानी के साथ साथ चलते हैं और दिल में जगह बनाते हैं.. खासकर 'चन्न परदेसी', 'कन्नी रे कन्नी' और 'जयकाल महाकाल', दिल में गहराई तक जाती है। हरीश-गायत्री की प्रेम कहानी को एक गीत के साथ दिखाया गया है, जो आपके चेहरे पर मुस्कान छोड़ देता है! फिल्म का संगीत दिया है अमित त्रिवेदी ने और बोल लिखे हैं स्वानंद किरकिरे ने।
कुल मिलाकर, 'गुडबाय' एक दिल छूने वाली पारिवारिक कहानी है, जो रिश्तों की और खास दो पीढ़ियों की नजदीकियों और आपसी समझ पर विश्वास करती है। फिल्म आपको एक समय पर भावुक करती है, तो दूसरे मौके पर चेहरे पर मुस्कान छोड़ती है। फिल्मीबीट की ओर से 'गुडबाय' को 3 स्टार।


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