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हर 'लम्हा' बोरियत भरा

By: अंकुर शर्मा
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lamhaa
फिल्म :लम्हा
निर्माता :बंटी वालिया
निर्देशक :राहुल ढोलकिया
कलाकार :संजय दत्त,बिपाशा बासु,कुणाल कपूर,अनुपम खेर,मुरली शर्मा
स्टार : 1.5/5

समीक्षा : राहुल ढोलकिया की लम्हा कश्मीर में फैले आतंकवाद पर आधारित फिल्म है। ढोलकिया ने कश्मीर से जुडी समस्या को करीब से दिखने कि कोशिश की है। ।फिल्म की कहानी आधारित है 1989 में हुए मिशन 89 पर जब कश्मीरी मुस्लिम समुदाय ने जमीन के लिए कश्मीरी पंडितों से लड़ाई मोल ले ली थी और इस बात पर काफी हंगामा भी हुआ था। फिल्म के शुरुआत तो प्रभावशाली हैं लेकिन कमजोर पटकथा के आगे सारी चीजों फीकी हो जाती है सो फिल्म के साथ भी यही हुआ है। डॉयलॉग में भी दम नहीं है।

संजय, अनुपम और बिपाशा ने अपने अभिनय से फिल्म को खींचने की कोशिश जरूर की है लेकिन कब तक आप बेमजा चीजों को ढ़ो सकते हैं, सो लम्हा का कोई भी लम्हा लोगों को बांध नही सका। राहुल की फिल्म लम्हा में आपको पुरानी हिंदी फिल्मों की छाप दिखेगी जैसे मिशन कश्मीर की। कहानी और फिल्म में कुछ भी नयापन नहीं है। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि फिल्म लम्हा लोगों की उम्मीद पर खरी नही उतरती है।

देखें : लम्हा की तस्वीरें

कहानी : संजय दत्त इस फिल्म में विक्रम नाम के मिलिटरी ऑफिसर के किरदार में हैं जो आतंकवादी संगठन के इरादों को नाकाम करने के एक मिशन में एक अन्दर्कावर एजेंट (गुल जहाँगीर)बनकर कश्मीर जाता है ।हाजी शाह(अनुपम खेर)1989 के उसी खौफनाक मंज़र को फिर से दोहराना चाहता है और वह घटी में होने वाले चुनावों के मद्देनज़र एक बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। हाजी के इरादों को नाकाम करने के लिए ही विक्रम (संजय) घटी में आते हैं और उसपर कड़ी नज़र रखते हैं ।

हाजी की भांजी के रूप में नज़र आईं हैं बिपाशा बासु जिन्होंने अजीजा का किरदार निभाया है ।अजीजा को हाजी ने अपने घर में पनाह दी है क्योंकि वह 1989 में हुए बम ब्लास्ट में अपने परिवार को खो चुकी है । इसी संगठन में कुणाल कपूर भी होते हैं जिन्होंने आतिफ का किरदार निभाया है मगर हाजी और उसकी विचारधारा से तंग आकर वह यह गैंग छोड़ देता है और अपने बल बूते पर चुनाव लड़ने का मन बना लेता है।

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