For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    फिल्म समीक्षा : मिठास भरी है चिल्लर पार्टी

    By Priya Srivastava
    |

    फिल्म : चिल्लर पार्टी

    कलाकार : इरफान खान, सनथ मेनन, रोहन ग्रोवर, नमन जैन, अरनव खन्ना, विशेष तिवारी, चिन्मय चंद्रणसुख, वेदांत देसाई, दिविज हांडा, श्रेया शर्मा.

    निर्देशक : नितेश तिवारी, विकास बहल

    रेटिंग : 4स्टार

    समीक्षा : एक अच्छी मनोरंजक फिल्म के साथ किस तरह अच्छे उद्देश्य को दर्शकों तक फिल्म के माध्यम से पहुंचाया जा सकता है | यह हमें चिल्लर पार्टी की मेकिंग से सीखना चाहिए | पिछले हफ्ते रिलीज हुई फिल्म देल्ही बेली के बारे में समीक्षकों की राय रही कि फिल्म मनोरंजक है और नये ट्रेंड गढ़ रही है|

    उस आधार पर तो हमें चिल्लर पार्टी को न सिर्फ एक सराहनीय प्रयास मानना चाहिए, बल्कि ऐसे दौर में जहां बच्चों की फिल्में बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेता, वहां ऐसी फिल्में बनाने का दमखम रखनेवालों की सराहना करनी चाहिए |

    चिल्लर पार्टी हर रूप से एक महत्वपूर्ण फिल्म है | भले ही फिल्म का खास प्रोमोशन न किया गया हो लेकिन बिना ताम झाम के भी दर्शकों तक एक अच्छी कहानी पहुंचाने की हिम्मत निर्देशक नितेश तिवारी और विकास बहल ने उठायी है |

    उन्होंने चिल्लर पार्टी के रूप में दर्शकों के सामने मनोरंजन, खूबूसूरत गीतों व एक सही दृष्टिकोण से अपनी बात रखने की कोशिश की है | यह सिर्फ बच्चों की फिल्म नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण फिल्म है |अब तक लगभग जितनी भी फिल्में आयी हैं, उनमें बाल शोषण को लेकर बात की गयी है |

    लेकिन उनका सही उपाय नहीं दर्शाया गया कि आखिर वे बच्चे क्या करें, जिनके पास पैसे नहीं है और वह काम करें तो उन्हें बाल शोषण समझा जाता है | बच्चों द्वारा ही एक महत्वपूर्ण पहल दिखाई गयी है |लोकतंत्र के बारे में बड़ी बड़ी बातें करनेवाली फिल्मों की अपेक्षा सामान्य व सरल तरीके से दर्शकों तक लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाया गया है | फिल्म में बच्चों का रापचिक बचपन भी है, जिसमें वह मस्ती करते हैं | लेकिन जरूरत पड़ने पर वह एक हो जाते हैं | बचपन में दुसंगति का क्या असर हो सकता है |इसका भी चित्रण किया गया है |

    लेकिन साथ ही यह भी दर्शाया गया है कि जरूरी नहीं कि जो सड़क पर रहता हो वह समझदार नहीं हो सकता |कमल कीचड़ में ही खिलता है, फिल्म में फटका के रूप में एकइनोवेटिव, टैलेंटेड बच्चे के रूप में यही दर्शाने की कोशिश की गयी है | साथ ही फिल्म की सबसे खास बात अन्य फिल्मों की तरह इस फिल्म में अभिभावकों के दुर्वव्यवहार दिखाने की बजाय अपने बच्चों का सही समय पर साथ देते भी दिखाया गया है |

    मीडिया की आज की भूमिका भी बेहतरीन तरीके से दर्शायी गयी है | गौर करें तो फिल्म में एक कुत्ता जो आदमी से बात करता है, को ब्रेकिंग न्यूज दिखा कर यह दर्शा्या गया है कि दरअसल, वॉचडॉग की भूमिका रखनेवाला मीडिया आज के दौर में क्या है ? साइलेंसर के रूप में उस व्यक्ति की तरफ ईशारा किया गया है,जो दुनिया का सारा अन्याय देख रहा होता है | लेकिन हद हो जाने के बाद अपनी जुबान खोलता है और फिर कहानी में नया टि्वस्ट आता है |

    कहानी : फिल्म की कहानी चंदन नगर कॉलोनी की है | कॉलोनी में बच्चों की गैंग है, लेकिन कोई एक दूसरे को उनके वास्तविक नाम से नहीं बुलाते | सभी के अपने नाम हैं | जो उन्हें उनके स्वभाव के मुताबिक दिये गये हैं | पढ़ाई में तेज होने की वजह से तकोई इनसाइक्लोपीडिया बन जाता है तो मस्ती करनेवाला जंघिया, जो चुप रहता है वह साइलेंसर है | अच्छी बालिंग करनेवाला अकरम है, बड़े भाई का कपड़ा पहननेवाला सेकेंड हैड है |

    इसी तरह अफलातून है चूंकि वह काम में पारंगत है, पनौती जो कहता है, हमेशा उल्टा हो जाता है | अचानक एक फटका नामक लड़का अपने कुत्ते ( बीड़ू) को लेकर आता है | वह वहां के लोगों की कार साफ करने की नौकरी करता है| पहले चिल्लर उसे पसंद नहीं करती |फिर उसे टीम में शामिल कर लेती है | फटका भले ही अनपढ़ है, लेकिन उसके पास कई इनोवेटिव आइडिया है | वह अच्छा बॉलर भी है |

    फिल्म में एक पुरुष जो कि लड़कियों की आवाज में बात करता है| उसे आरजे बनने की सलाह दे देता है लेकिन अचानक एक दिन कुछ ऐसा होता है | जब सारे बच्चे दोस्ती के लिए कुछ भी करने को तैयार होते हैं| मंत्री को सबक सिखाने के लिए वे किताबों में लिखी गयी अच्छी अच्छी बातों का ही हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं | पंक्तियों से ही वह इसका जवाब देते हैं| यही वजह है कि फिल्म की ईमानदार कोशिश दर्शकों के सामने आती है |

    फिल्म में हर बच्चे ने अपना किरदार बखूबी निभाया है | खासतौर से जंघिया के किरदार ने बच्चों का भरपूर मनोरंजन किया है | कह सकते हैं कि बच्चों के विभिन्न रंगों का इंद्रधनुष है यह फिल्म | जहां एक ही फिल्म में लगभग सारे नजर आ जाते हैं | हिंदी सिनेमा में ऐसी फिल्मों की सख्त जरूरत है | चिल्लर पार्टी अंगूर का वह पेड़ है, जिसके कुछ खट्ठे हैं ,कुछ मीठे. लेकिन फिर भी लाजवाब हैं |

    English summary
    Chillar Party is a must-watch for you. It squeezes in a quiet message even as it portrays the world purely from the gawky-eyed point of view of children.
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X