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    'डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे' फिल्म रिव्यू: दो बेखौफ बहनों की कहानी में स्टार हैं भूमि और कोंकणा

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    Rating:
    3.0/5

    निर्देशक- अलंकृता श्रीवास्तव

    कलाकार- भूमि पेडनेकर, कोंकणा सेन शर्मा, विक्रांत मैसे, अमोल पराशर, आमिर बशीर, करण कुंद्रा, कुब्रा सैत

    प्लैटफॉर्म- नेटफ्लिक्स

    समाज द्वारा नियंत्रित और बंधी हुईं औरतों की कहानी से आगे बढ़कर यह फिल्म ख्वाहिशों की, च्वॉइस की बात करती है। काजल (भूमि पेडनेकर) आजादी और नौकरी की तलाश में अपनी चचेरी बहन डॉली (कोंकणा) के पास नोएडा आती है। यहां उसे एक कॉल सेंटर में नौकरी मिलती है, जहां उसे क्लाइंट से रोमांटिक, सेक्सुअल बातें करना है। एक रात डॉली अपनी छोटी बहन से पूछती है कि क्या वो इस नौकरी से खुश है? जवाब में काजल कहती है- "जॉब है, करते हैं। मजबूर थे रोमांस बेचने के लिए? नहीं, च्वॉइस किये हैं। कोई और च्वॉइस होता तो नहीं करते"।

    फिल्म की कहानी

    फिल्म की कहानी

    दरभंगा (बिहार) की दो चचेरी बहनें डॉली और काजल ग्रेटर नोएडा में रह रही हैं। डॉली (कोंकणा सेन शर्मा) अपनी शादीशुदा जिंदगी में व्यस्त है। कामकाजी पति और दो बच्चों को संभालने के अलावा, वह खुद भी नौकरी करती है, लेकिन समाज के हिसाब से वह 'सिर्फ शौक' के लिए है। वहीं, छोटी बहन काजल (भूमि पेडनेकर) नौकरी की तलाश में है। उसके इरादों में कितना दम यह आपको पहले दृश्य से ही चेता दिया जाता है। जीजाजी की गलत हरकतों की वजह से काजल अपनी बहन का घर छोड़कर, होस्टल में रहती है। साथ ही उसे एक 'रोमांस चैट' कंपनी के कॉल सेंटर में नौकरी मिल जाती है। लेकिन दोनों बहनों की जिंदगी इतनी सीधी सपाट कहां?

    फिल्म की कहानी

    फिल्म की कहानी

    शादीशुदा जिंदगी में नाखुश डॉली अपने पति (आमिर बशीर) के साथ सेक्सुअल टेंशन से गुजर रही है। "तुममें ही कमी है" जैसी बातें उसे पति ने इतनी बार सुना दी है कि वह उसे ही सच्चाई मानकर चली जा रही है। इधर कॉल सेंटर में काजल अब किट्टी बन चुकी है और रोमांस बेच रही है। काम के साथ साथ उसने अपने क्लाइंट प्रदीप (विक्रांत मैस्से) में प्यार तलाश लिया है। लेकिन इन सबके बीच उन्हें सही- गलत का अहसास होता चला जाता है। समाज की बनी बनाई जंजीरों को तोड़कर अपनी ख्वाहिश और खुशियों को प्राथमिकता देती दोनों बहनें अच्छी लगती हैं। एक नजरिए से यह कहानी ना पुरूषवादी है या स्त्रीवादी, यह कहानी है खुद को स्वीकार करने की हिम्मत दिखाने की।

    निर्देशन

    निर्देशन

    "अमित जी हमसे सेक्स करना चाहते हैं", काजल अपनी बहन से साफ साफ कहती है उसके पति ने उसे गलत इरादों से छुआ है। लेकिन डॉली बात को हंसकर टाल देती है कि वह उनके 'हिफाजती बर्ताव' को गलत समझ रही है। भारत में खुशमय शादीशुदा जिंदगी के ढ़ोंग को निर्देशिका अलंकृता श्रीवास्तव ने एक बार फिर सामने लाया है। फिल्म 'लिप्सटिक अंडर माई बुर्का' जैसी बोल्ड फिल्म के बाद यहां भी उन्होंने स्त्रीत्व को अलग सिरे दिखाने की कोशिश की है। हालांकि एक ही कहानी में कई पहलू ढूंस देने की वजह से ध्यान भटकता है। लेकिन इतने बेहतरीन कलाकार का होना उनके लिए फायदेमंद रहा है।

    अच्छी बातें

    अच्छी बातें

    महिला सशक्तिकरण के शोर करने की बजाए यदि इस फिल्म को व्यक्तिगत स्वीकार्यता से जोड़ा जाए, तो ज्यादा सटीक होगा। फिल्म में फूहड़ता नहीं है। महिलावादी दिखाने के चक्कर में पुरूषों को जबरदस्ती छोटा नहीं दिखाया गया है। अलंकृता श्रीवास्तव, जो इस फिल्म की लेखिका भी हैं, ने एक बार फिर पूर्वाग्रह की जंजीरों से बंधे हुए समाज का मजबूती से सामना करती महिलाओं को दिखाया है।

    अभिनय

    अभिनय

    फिल्म के कलाकार इसका मजबूत पक्ष हैं। कोंकणा सेन शर्मा और भूमि पेडनेकर अपने किरदारों में बेहद दमदार दिखी हैं। उनकी मस्ती, शरारत, रोना, हंसना, चाहना, ख्वाहिश, डर, हिम्मत.. हर भाव दिल तक पहुंचता है। दोनों अभिनेत्रियां मजबूत दिखती हैं। उनका बेखौफपन भला लगता है। निर्देशक ने डॉली के किरदार में कोंकणा को पूरा मौका दिया है। एक पत्नी, मां, प्रेमिका, बेटी, बहन, कर्मचारी.. डॉली हर रिश्ते से जुड़ी हैं। वहीं, दोनों बहनों की जिंदगी का हिस्सा रहे.. अमोल पराशर, विक्रांत मैस्से, आमिर बशीर अपने किरदारों में परफेक्ट दिखे हैं। जबकि करण कुंद्रा, कुब्रा सैत का किरदार ढूंसा गया सा लगता है।

    तकनीकि पक्ष

    तकनीकि पक्ष

    आरती बजाज को बेहतरीन एडिटिंग के लिए सराहा जाना चाहिए। महज 2 घंटों में उन्होंने डॉली और किट्टी की जिंदगी के कई पहलूओं को समेटा है। फिल्म बोर नहीं करती है। हालांकि क्लाईमैक्स काफी जल्दी जल्दी में निपटाया सा लगता है।

    फिल्म की पटकथा खुद निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव ने ही लिखी है। लेकिन यहां ठहराव की थोड़ी कमी दिखती है। कहानी भावनात्मक तौर पर दर्शकों को किरदारों से और भी जोड़ सकती थी। कई तरह के प्रसंग जल्दी जल्दी में छोड़ दिये गए लगते हैं, जैसे कि- डॉली का अपनी मां के साथ संबंध, डॉली के बेटे पप्पू का अपने जेंडर को लेकर असहजता, गुंडों द्वारा योनि स्मारक को तोड़ा जाना। कसी हुई पटकथा से यह और भी प्रभावी साबित हो सकती थी। फिल्म के गाने आते- जाते हैं, लेकिन याद नहीं रहते।

    देखें या ना देखें

    देखें या ना देखें

    नारीत्व के अलग अलग रंग और भूमि पेडनेकर- कोंकणा सेन शर्मा की जबरदस्त अभिनय के लिए फिल्म देखी जा सकती है। "डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे" को फिल्मीबीट की ओर से 3 स्टार।

    English summary
    Bhumi Pednekar, Konkana Sen Sharma starring film Dolly Kitty Aur Woh Chamakte Sitare is a quirky tale of two sisters breaking societal norms. Film directed by Alankrita Shrivastava.
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