देव डी: दर्शको पर इमोशनल अत्याचार!

निर्देशक- अनुराग कश्यप
कलाकार- अभय देओल, कलकी कोएछलीन, माही गिल, प्रकाश मदान, दिब्येंदू भटटाचार्या
अभय देओल की फिल्म देव डी के एल सहगल, दिलीप कुमार, शाहरूख खान की देवदास से पुरी तरह भिन्न है। इन तीनों फिल्मों ने शरतचन्द्र के उपन्यास देवदास के साथ न्याय किया था, पर अभय की फिल्म पुरी तरह से आज का सच है।
अनुराग कश्यप द्धारा निर्देशित फिल्म देव डी का देवदास ड्रग्स और वोदका का आदी है। पारो उसे अपनी नग्न तस्वीरें मेल के जरिए भेजती है और चाहती है कि देव उसके साथ संबंन्ध बनाए। वही चंदा फोन सेक्स का काम करती है। अनुराग की फिल्म के देव, पारो और चंदा तीनों साहसी और बागी किस्म के लोग है।
कहानी: एक धनी व्यवसायी का बेटा देव (अभय देओल) 12 वर्ष की उम्र में लंदन पढने के लिए भेज दिया जाता है। देव जब वापस लौटता है तो पाता है कि उसकी बचपन की दोस्त और प्रेमिका पारो (माही गिल) का विवाह कही और हो रहा है। इस विवाह से देव पूरी तरह टूट जाता है।
वो शराब और ड्रग्स में डूबकर घर छोड़ देता है लेकिन पिता से बराबर पैसे मिलते रहते है। लेनी (कलकी) अपने तरीके से जिंदगी जीने में यकीन रखती है। एक एमएमएस स्कैंडल में आ जाने के बाद उसके घर वाले उसे घर से बाहर निकाल देते है। वो अकेलेपन का शिकार हो जाती है। इस अकेलेपन से जुझते हुए लेनी एक दलाल चुन्नी की शरण में चली जाती है और चंदा बन जाती है।
दिन के उजाले में लेनी एक छात्रा के रूप में जीती है जबकि रात के अंधेरे में चंदा बन जाती है। देव और चंदा की मुलाकात इस दौरान होती है। फिल्म की शुरूआत काफी बंधी हुई है जो कि बाद में काफी ढीली पड़ जाती है।
देव और पारों के बीच फिल्माए गए दृश्य बेहतरीन बन पड़े है। जबकि चंदा और देव के बीच के दृश्य थोड़े उबाउ है। फिल्म का अंत काफी लम्बा और उबाऊ है।
अमित त्रिवेदी का संगीत कानों को अच्छा लगेगा। फिल्म का गाना इमोशनल अत्याचार पहले की हिट हो चुका है। राजीव रवि का छायांकन सराहनीय है।
अभिनय के मामले में अभय काफी सहज लगे है, माही ने शानदार भूमिका की है जबकि कलकी केवल कुछ दृश्यों में ही जान डाल पाई है। कुल मिलाकर कहा जाए तो देव डी का हश्र अनुराग की पिछली फिल्म नो स्मोंकिंग से बेहतर होने की संभावना है।
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