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दिल्‍ली 6: अपनी जमीन की पड़ताल

By Super
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Movie Review Delhi 6
निर्देशक: राकेश ओमप्रकाश मेहरा
कलाकार:
अभिषेक बच्‍चन, सोनम कपूर, ऋषि कपूर, ओम पूरी, वहीदा रहमान, दिव्‍या दत्‍ता, तन्‍वी आजमी, अमिताभ बच्‍चन
संगीत:
ए आर रहमान

राकेश ओमप्रकाश मेहरा द्धारा निर्देशित फिल्‍म दिल्‍ली 6 में एक व्‍यक्ति की जीवन यात्रा पेश की गई है जो विदेशी और देशी संस्‍कृति के बीच में खुद को तलाशने की जुगत में लगा रहता है। उसका बचपन और जवानी विदेशी जमीन की संस्‍कृति का हिस्‍सा है। जब उसकी मुलाकात उसकी अपनी संस्‍कृति से होती है तो किस तरह के बदलाव आते है और फिर वह इस बदलाव में खुद को कहां खड़ा करे यही फिल्‍म की कहानी है।

फिल्‍म दिल्‍ली 6 पुरानी दिल्‍ली के हिंदू मुस्लिम संस्‍कृति को रोशन के चरित्र के माध्‍यम से दिखाने की कोशिश करती है जो कि अपनी बीमार दादी ( वहीदा रहमान) को अमरीका से भारत लेकर आया है। उसकी दादी अपनी आखिरी सांसे उस मिटटी में लेना चाहती है जहां वह पैदा हुई थी।

अमरीकन संस्‍कृति में पला बढा रोशन भारत की संस्‍कृति को समझने की कोशिश करता है। वह जनना चाहता है कि क्‍या चीजें इंसान रिश्‍तों को जोड़ने में सहायक होती है। इसी प्रक्रिया में रोशन का लगाव बिटटू (सोनम कपूर ) से बनने लगता है जो कि इंडियन आइडल में भाग लेना चाहती है।

फिल्‍म का पहला भाग पूरी तरह से संस्‍कृति के अलगाव पर केन्द्रित है। जिसमें राम लीला का मंचन, ताज महल की यात्रा, सड़क पर बच्‍चा जन रही गाय काफी प्रभावी दृश्‍य है।

अमेरिका में जन्‍मे, पले-बढ़े रोशन का दिल्‍ली में अपने इर्दगिर्द हो रही घटनाएं उसका मन मोह लेता है। उन्हें दिल्ली की यातायात परेशानी, पानी के कमी, राम लीला, गलिंयां, मिठाई की दुकानें भा जाती है।

रोशन एक दिलचस्‍प किरदार है जिसके पिता हिन्‍दू और मां मुस्‍लमान है। इस मोहल्‍ले में दो समुदाय हैं। इससे पहले कि आप यह जाने की रोशन को क्‍या हुआ रौशन पूरी तरह इस माहौल में हिस्‍सा बन जाता है और नफरत की इस राजनीति में उलझ जाता है।

कहानी- दिल्ली -6 की कहानी की शुरूआत अमेरिका की पृष्‍ठभूमि से होती है। पुरानी दिल्ली का रहने वाला एक लड़का अपने मां -बाप की मर्जी के खिलाफ दूसरे धर्म की लड़की से शादी करता है। मां-बाप नाराज होते हैं तो वो अमेरिका चला जाता है।

खैर हालात बदलते हैं और अब लड़के की मां (वहीदा रहमान ) उनके साथ अमेरिका में है लेकिन उसकी तबियत ठीक नहीं है। डॉक्टर कहते हैं कि अपने आखिरी दिनों में जो वो चाहें उन्हें करने दें। वहीदा वापस हिंदुस्तान जाना चाहती हैं। पोता रोशन (अभिषेक बच्‍चन) उन्हें लेकर दिल्ली 6 की उनकी हवेली पहुंचता है।

उसके बाद कहानी कुछ इस अंदाज में आगे बढ़ती है कि कभी अभिषेक को दिल्ली अच्छी लगती है तो कभी वो वापस जाने का फैसला करता है। दिल्ली 6 की जिस हवेली में वो रहता है उसके साथ ही सोनम भी रहती हैं। उनके घरवाले चाहते हैं जल्द से जल्द उसकी शादी हो जाए।

सोनम के पिता और उसके चाचा की आपस में आपस में नहीं बनती है। दिल्ली 6 के उस माहौल में हिंदू-मुसलमान के बीच गजब का आपसी भाईचारा दिखाया गया है।

रोशन आखिर में अपनी जमीन की तलाश करने में सफल होता है।


अभिनय: अभिषेक ने अच्‍छा काम किया है लेकिन उनके संवाद अदायगी में कही भी विदेशीपन नही छलकता है। सोनम ने अपने नैसर्गिक सुंदरता से एक आम लड़की के सपने व उसकी जिंदगी को बखुबी पेश किया है। इनके अलावा वहीदा रहमान, ओम पुरी, ऋषि कपूर, दिव्‍या दत्‍ता ने भी बेहतरीन अभिनय किया है। वैसे अगर आप अमिताभ बच्चन के फैन हैं तो फिल्म में उनका भी गेस्ट रोल है।

फिल्‍म में ए आर रहमान का संगीत बहुत प्रभावी है। फिल्‍म का गाना मसक्‍कली, ये दिल्‍ली है मेरे यार, रहना तू, मौला, गेंदा फूल बहुत कर्णप्रिय है।

अंत में यही कहा जा सकता है फिल्‍म बहुत अच्‍छी बन पड़ी है।

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