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चला मुसद्दी ऑफिस-ऑफिस ना दिखा सकी कमाल

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Office Office
निर्माताः उमेश मेहरा, राजेश मेहरा, राजीव मेहरा
निर्देशकः राजीव मेहरा
गीतः गुलजार
संगीतः साजिद-वाजिद
कलाकारः पंकज कपूर, देवेन भोजानी, मनोज पाहवा, संजय मिश्रा, हेमंत मिश्रा, असावरी जोशी
सेंसर सर्टिफिकेटः यू
रेटिंग : 2/5

खिचड़ी के बाद एक और लोकप्रिय धारावाहिक 'ऑफिस-ऑफिस" के कलाकारों को लेकर फिल्म बनाई गई है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि 'ऑफिस-ऑफिस" एक बेहतरीन प्रोग्राम था, जिसमें एक आम आदमी भ्रष्ट कर्मचारियों से जूझता था। हंसाने के साथ-साथ यह धारावाहिक सोचने पर भी मजबूर करता था, लेकिन फिल्म 'चला मुसद्दी ऑफिस ऑफिस" में वो बात नहीं आ पाई। क्योंकि धारावाहिक को फिल्म बनाते समय और मेहनत की जरूरत होती है।

फिल्म में कोई नया पन नहीं है। जो हम पहले ही देख चुके हैं वही दोहराया गया है। मुसद्दीलाल जब तीन महीने तक पेंशन लेने नहीं पहुंच पाता है तो उसे सरकारी फाइलों में मृत घोषित कर दिया जाता है और पेंशन रोक दी जाती है। पेंशन ऑफिस में वहां के कर्मचारी कहते हैं कि जिंदा होने का सबूत दो।मुसद्दी की लड़ाई आखरी तक चलती रहती है।

इस कहानी से यही सबक मिलता है कि किसी को भी हार नहीं मानना चाहिए। इस फिल्म में सभी माहीर कलाकार हैं। अश्विनी धीर की कहानी में कुछ तो हो ऐसा जो हंसने पर मजबूर कर दे, साथ ही आम आदमी की तकलीफ को दर्शक महसूस कर सकें। कुछ एक जगह हंसी आती है लेकिन लगातार एक ही लय में बंधे रहने के कारण कहानी उबाउ भी हो जाती है। फिल्म में गाने को इसकी लंबाई बढ़ाने के लिए रखा गया है। कुल मिलाकर चला मुसद्दी ऑफिस-ऑफिस धारावाहिक जैसा मनोरंजक नहीं है।

English summary
Chala musaddi Office Office is a popular tv show now on silver screen.
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