REVIEW..सुपरस्टार भी ना बचा सके इसे..साल की एक और गलतियों भरी फिल्म !
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क्या है खास : नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी।
क्या है बकवास : खराब लेखन, म्यूज़िक।
कब लें ब्रेक : इंटरवल में।
शानदार पल : नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के पैक पंच।
बेहतरीन एक्टर भी खराब स्क्रिप्ट का शिकार हो जाता है। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की बाबूमोशाय बंदूकबाज़ हर खराब चीज़ का शिकार है। लेखन से लेकर म्यूज़िक तक फिल्म इतनी ढीली है कि नवाज़ जैसा एक्टर भी इसे नहीं संभाल पाता है।
हालांकि फिल्म का बर्फानी गाना सुनने और देखने लायक है लेकिन इसके अलावा फिल्म कहीं भी कनेक्ट नहीं करती। डार्क सिनेमा के नाम पर फिल्म एक अजीब और विफल कोशिश है।


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