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REVIEW..सुपरस्टार भी ना बचा सके इसे..साल की एक और गलतियों भरी फिल्म !

By: Madhuri
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Rating:
2.0/5

फिल्म की कास्ट : नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, बिदिता बाग, श्रद्धा दास, दिव्या दत्ता।

निर्देशक : कुषन नंदी।

प्रोड्यूसर :  किरण श्याम श्रॉफ, अष्मित कुंदर, कुषन नंदी।

लेखक : गालिब असद भोपाली।

क्या है खास : नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी।

क्या है बकवास : खराब लेखन, म्यूज़िक। 

कब लें ब्रेक : इंटरवल में।

शानदार पल : नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के पैक पंच।

प्लॉट

प्लॉट

ये फिल्म शुरू होती है बाबू बिहारी (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की जिंदगी के जीवन झलक से। वो एक कॉन्ट्रेक्ट किलर है जो पैसा लेकर लोगों का काम तमाम करता है। लेकिन इसी बीच एक और कॉन्ट्रैक्ट किलर सामने आता है। इन्हें कॉन्ट्रैक्ट मिलता है तीन लोगों के मर्डर का, और जो पहले दो कर देगा वो इस धंधे को वहीं छोड़ देगा। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब फुलवा (बिदिता बेग) से प्यार हो जाता है और बाबू उसे शर्तों पर घर ले जाता है।

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आएंगे कई मोड़

आएंगे कई मोड़

इसी बीच मंत्री सुमित्रा देवी (दिव्या दत्ता) और त्रिलोक (मुरली शर्मा) की भी एंट्री होती है , कहानी में कई सारे मोड़ आते हैं। फिल्म में क्या क्या मोड़ आएंगे क्या होगी आगे की कहानी उसके लिए आपको थियेटर जाना चाहिए।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

कुषन नंदी की लेटेस्ट आउटिंग फिल्म को थोड़ा शॉर्ट बना सकती थी। ये फिल्म है तो दो घंटे की तब भी आपको ऐसा ही लगेगा कि इसे ज़बरदस्ती खींचा गया है। एक दो दिलचस्प सीन के अलावा फिल्म में देखने लायक कुछ नहीं है।

स्क्रिप्ट में कमी

स्क्रिप्ट में कमी

इसमें सिवाय सेक्स, अपशब्द, मारधाड़ के अलावा कुछ नहीं है जो आपको फिल्म देखने का एक कारण दें। फिल्म की स्क्रिप्ट में काफी कमी हैं, खासतौर पर सेकेंड हाफ में।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

हालांकि परफॉर्मेंस के लिहाज़ से नवाज़ पर शक नहीं किया जा सकता। लेकिन उनके कैरेक्टर में उनकी पिछली फिल्मों की झलक थी। नवाज़ ने यूं तो अपने टैलेंट का शानदार प्रदर्शन किया है। वहीं बिदिता बाग ने भले ही खूब इंटिमेट सीन दिए लेकिन वो स्टीमी अंदाज़ पेश करने में वो नाकाम रहीं। जतिन की एक्टिंग काफी अच्छी थी। दिव्या दत्ता ने भी अपने कैरेक्टर के साथ पूरा न्याय किया। अनिल जॉर्ज की परफॉर्मेंस एवरेज थी, वहीं भगवान तिवारी शानदार रहे।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

विशाल वित्तल की सिनेमोटोग्राफी तो अच्छी रही लेकिन अष्मिथ कुंदर और कुषन नंदी की एडिटिंग में कहीं कहीं कमियां रह गईं।

म्यूज़िक

म्यूज़िक

वहीं म्यूज़िक के लिहाज़ से भी फिल्म मात खा गई। बर्फानी गाने के अलावा ऐसा कुछ नहीं है जो आप या रखना चाहेंगे।

वर्डिक्ट

वर्डिक्ट

हालांकि नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ऐसा बंदूकबाज़ वाला किरदार निभाने के लिए पूरी तरह से फिट हैं अगर उन्हें सही स्क्रिप्ट मिले तो।

English summary
Babumoshai Bandookbaaz Movie Review Story Plot Rating.
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