Baazaar Movie Review: सैफ अली खान की शानदार परफॉर्मेंस, पैसा वसूल है ये फिल्म
'पैसा उसका जो धंधा जानता हो, और मैं हूं धंधों नो गांडो छोकरो'.. जी हां कुछ ऐसे हैं बाज़ार के शकुन कोठारी (सैफ अली खान)। खुद के दम पर बने गुजराती बिलेनियर बिजनेसमैन, कोठारी चालाक है, चाटुकार और धंधे के मामले में बेशर्म भी है। इस फिल्म का सबसे पावरफुल सीन है जिसमें, एक सभागार में चल रहे धार्मिक आयोजन के दौरान शकुन एक फैमिली बिजनेस पर चालाकी से कब्जा कर लेता है और इस आयोजन में उसका ड्रामैटिक ऐलान करता है।
शकुन का व्यक्तित्व अच्छाई और बुराई दोनों से बराबर भरा हुआ है। जहां एक तरफ शकुन मुंबई के स्टॉक ट्रेडिंग में अपना डर्टी गेम जारी रखता है। वहीं दूसरी तरफ इलाहाबाद में एक यंग स्टॉक ब्रोकर रिज़वाल अहमद (रोहन मेहरा) है जो बत्रा को पूजता है और उसके जैसे बनना चाहता है। जिसका मानना है कि उसकी स्मॉल टाउन मैंटेलिटी उसे उसके आदर्श बत्रा की तरह बनने से नहीं रोक सकती है।
जल्द ही रिजवान मुंबई पहुंच जाता है। उसका धेय साफ है कि वो यहां स्ट्रगल करने नहीं सेटल होने आया है। इसके बाद रोहन को सहकर्मी और गर्लफ्रेंड प्रिया (राधिका आप्टे) जो कि एक शानदार स्टॉक ब्रोकर है, की मदद से शकुन के अंडर में काम करने का मौका मिल जाता है। रोहन शकुन का विश्वास जीतने में भी कामयाब हो जाता है।
शकुन और रोहन दोनों ही एक दूसरे से एकदम अलग हैं। फिल्म में एक जगह शकुन खुद बोलता है कि 'तू इमोशन पर चलता है, मैं मैथ पर' लेकिन दोनों का ये अंतर उन्हें हाथ मिलाने से नहीं रोक पाता। धीरे-धीरे शकुन को पता चलता है कि उसे आगे बढ़ने की इस भूख के लिए मंहगी कीमत चुकानी पड़ रही है।

एक सीन में सैफ अली खान का कैरेक्टर शकुन कहता है कि 'हार और जीत में एक ही फर्क होता हैस भूख' ये डायलॉग ही बाज़ार को पूरी तरह परिभाषित कर देता है। गौरव के चावला ने स्टॉक ट्रेडिंग जैसे मुश्किल लेकिन दिलचस्प टॉपिक पर फिल्म बनाने की शानदार कोशिश की है। सैफ अली खान की शानदार परफॉर्मेंस बाज़ार को ऑडिएंस के लिए पैसा वसूल फिल्म बनाती है। फिल्म में स्टॉक मार्केट से जुड़ी कई चीजें मिसिंग लगती हैं। हालांकि फिल्म फिर भी ऑडिएंस को स्क्रीन से चिपकाए रखने में कामयाब हो जाती है। इसके लिए क्रेडिट सैफ अली थान की शानदार परफॉर्मेंस को भी जाता है। हमारी तरफ से फिल्म को 3 स्टार।


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