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'अर्जुन पटियाला' फिल्म रिव्यू: ड्रामा, इमोशन, एक्शन, कॉमेडी का ओवरडोज़, हंसना भूल जाओगे

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Rating:
2.0/5

रिस्क लेना अच्छी बात है, लेकिन उसमें सफलता की गारंटी नहीं होती। निर्देशक रोहित जुगराज ने अपनी फिल्म 'अर्जुन पटियाला' में कॉमेडी को एक अलग तरीके से पेश करने की कोशिश की है। इसे स्पूफ कॉमेडी कहते हैं। बॉलीवुड फिल्मों के लिहाज से यह काफी रिस्की कोशिश थी। कृति सैनन और दिलजीत दोसांझ के रोमांस, वरूण शर्मा की बेबाक कॉमेडी के बावजूद फिल्म ठहाके मारकर हंसने या कुछ अनुभव करने का मौका नहीं देती। एक्शन, रोमांस, इमोशन, ड्रामा, कॉमेडी के दो घंटों के इस सफर में आपको थोड़ी बोरियत हो सकती है।

Arjun Patiala Movie Review

फिल्म की कहानी में भी कहानी है। एक राइटर अपनी कहानी लेकर प्रोड्यूसर (पंकज त्रिपाठी) के पास आता है और उन्हें अपनी स्क्रिप्ट सुनाना शुरु करता है। उसकी कहानी में हीरो है, हीरोईन है, रोमांस, एक्शन, ड्रामा, इमोशन और सनी लियोन का आईटम नंबर भी है।

काल्पनिक कहानी के मुख्य किरदार हैं अर्जुन पटियाला (दिलजीत दोसांझ), जिसके माता पिता का सपना होता है कि उनका बेटा पुलिस वाला बने। वहीं, अर्जुन आईपीएस गिल (रॉनित रॉय) को अपना हीरो मानता है और उन्हीं की तरह स्पोर्ट्स में गोल्ड मेडल जीतकर पुलिस में भर्ती हो जाता है। फिरोजपुर का चौकी इंचार्ज बना अर्जुन अपने काम के प्रति ईमानदार और सजग है। आईपीएस गिल ने उसे थाने की जिम्मेदारी देते हुए कहा कि वह क्राइम फ्री जिला चाहते हैं। ऐसे में अर्जुन की मुलाकात होती है क्राइम रिपोर्टर रितु रंधावा (कृति सैनन) से। जहां अर्जुन क्रिमिनर्ल का खात्मा करता जाता है, रितु से हर क्राइम सीन पर उसकी मुलाकात होती है। लिहाजा, दो- तीन रोमांटिक डायलॉग्स के बाद एक रोमांटिक गाना आता है और दोनों साथ हो जाते हैं। फिरोजपुर जिले की विधायक हैं प्राप्ती मक्कड़ (सीमा पाहवा), जिन्हें लोग 'प्रॉपर्टी मक्काड़' कहते हैं क्योंकि वह भी बेईमान है। खैर, क्राइम फ्री जिला करने की कोशिश में अर्जुन पटियाला को प्राप्ती कक्कड़ और लोकल गुंडा सकूल (मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब) जैसे कई अपराधियों से भिड़ना पड़ता है। लेकिन गुंडों के सफाया करते करते कहानी में कई ट्विस्ट एंड टर्न्स आते हैं, जो हास्यास्पद परिस्थिति बनाते हैं।

Arjun Patiala

अर्जुन पटियाला के किरदार में दिलजीत दोसांझ ने न्याय किया है। शराब, परिवार, रोमांस और काम में डूबा यह पुलिस अफसर आपको पसंद आएगा। क्राइम रिर्पोटर बनीं कृति सैनन के पास निर्देशक ने ज्यादा स्कोप ही नहीं दिया। बरेली की बर्फी और लुका छुपी जैसी फिल्मों में हमने देख लिया है कि कृति कॉमेडी कर लेती हैं, लिहाजा यहां कुछ नया नहीं दिखेगा। वरूण शर्मा, मोहम्मद जीशान अय्यूब, सीमा पाहवा, रोनित रॉय अपने किरदारों में जंचे हैं। पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकार फिल्म में होने के बावजूद गिने चुने सीन देना, न्यायसंगत नहीं लगता।

Arjun Patiala

रोहित जुगराज का निर्देशन काफी ढ़ीला रहा है। 1 घंटे 50 मिनट की यह फिल्म हंसाने की नाकाम कोशिश करती है। स्पूफ कॉमेडी के बीच फिल्म की कहानी दर्शकों के साथ कनेक्ट होने में चूक गई। कुछ हिस्सों में हंसी आती है, लेकिन उसका श्रेय लेखन से ज्यादा अभिनय को दिया जाना चाहिए। निर्देशक की एक बार तारीफेकाबिल है कि जबरदस्ती हंसाने के प्रयास में उन्होंने कहीं भी फूहड़ कॉमेडी का सहारा नहीं लिया है। संगीत की बात करें तो सचिन- जिगर के गाने प्रभावित नहीं कर पाए। 'मैं दिवाना तेरा' छोड़कर शायद ही कोई गाना आपको याद रहे।

कुल मिलाकर कृति सैनन और दिलजीत दोसांझ की 'अर्जुन पटियाला' हल्की फुल्की कॉमेडी फिल्म है, जो पूरे परिवार के साथ बैठकर देखी जा सकती है। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 2 स्टार।

English summary
Kriti Sanon and Diljit Dosanjh's spoof comedy 'Arjun Patiala' tries too hard but fails to tikcle your funny bone.
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