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आंखों देखी दिल को छू जाने वाली फिल्म- फिल्म रिव्यू!

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आज के बेसिरपैर की कहानियों वाली सफल और कमर्शियल फिल्मों के दौर में कुछ ही ऐसे निर्देशक बचे हैं जो कि अपनी फिल्मों में एक आम आदमी और उसके जीवन को बड़ी ही बारीकी और बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। फिल्म जितनी साधारण है उतना ही साधारण हैं फिल्म के किरदार। लेकिन फिल्म को अपनी बेहतरीन एक्टिंग से खास बना देने वाले अभिनेता संजय मिश्रा ने वाकई लोगों को हैरान कर दिया है। संजय मिश्रा ने फिल्म में अपने किरदार में पूरी जान डाल दी है। संजय मिश्रा के किरदार को देखने के बाद दर्शकों को उनके परिवार के उन बुजुर्गों की याद आ गयी जिन्हें समझने में वो अक्सर गलती कर बैठते हैं या फिर जिन्हें समझने की कोशिश ही नहीं करते ये सोचकर कि उनका दिमाग खराब हो गया है। लेकिन असल में उनके दिमाग में क्या चल रहा है और खुद को कितना अकेला महसूस कर रहे हैं ये कोई समझने की कोशिश तक नहीं करता।

संजय मिश्रा ने एक बूढ़े आदमी राजा बाबु का किरदार निभाया है जो कि एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। एक दिन अचानक ही बाबूजी ये फैसला करते हैं कि अब से वो दूसरों की बातों को सुनने की बजाय सिर्फ उसी पर यकीन करेंगे जो कि वो खुद अपनी आंखों से देखेंगे। बाबूजी के इस फैसले के बाद से उनकी पूरी जिंदगी ही बदल जाती है और उनके आस पास के लोगों की भी राय उन्हें लेकर बदलने लगती है। इस फैसले के चलते बाबूजी को काफी कुछ सहना पड़ता है। उनके परिवार के सदस्यों को लगता है कि वो पागल हो गये हैं, सठिया गये हैं। लेकिन बाबूजी सिर्फ अपनी आंखो देखी पर ही यकीन करते हैं। किसी के कुछ भी कहने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

आंखों देखी फिल्म रिव्यू-

संजय मिश्रा का बेहतरीन किरदार

संजय मिश्रा का बेहतरीन किरदार

बाबूजी के किरदार में संजय मिश्रा बहुत ही बेहतरीन दिखे हैं। हर बार की तरह इस बार भी अपने अभिनय से संजय मिश्रा ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। संजय मिश्रा की अदाकारी ने कई दृष्यों को इतना सजीव बना दिया है कि लोगों की आंखों से आंसू तक निकल पड़े। तो अगर मौका मिले तो एक बार जरुर देखें आंखों देखी। एक आम आदमी की खास कहानी।

हर एक किरदार माले के मोती की तरह पिरोया हुआ

हर एक किरदार माले के मोती की तरह पिरोया हुआ

आंखों देखी की कहानी बहुत ही बेहतरीन और अलग हटकर है। फिल्म के एक एक किरदार को उसी तरह से सजाया गया है जैसे कि किसी माला में मोतियों को सजाया जाता है। एक भी किरदार आपको बेकार या फालतू नहीं लगेगा।

संगीत कुछ खास नहीं

संगीत कुछ खास नहीं

जहां तक फिल्म के संगीत की बात है तो आंखों देखी फिल्म को बनाते समय पूरा ध्यान कहानी पर रखा गया। संगीत को एक जगह जरुर दी गयी लेकिन उसे कुछ खास महत्व नहीं दिया गया। तो गानों को लेकर दर्शकों की कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं है।

आंखों की तरह कैमरे का प्रयोग

आंखों की तरह कैमरे का प्रयोग

आंखों देखी फिल्म में कैमरे का बहुत ही बेहतरीन तरीके से प्रयोग किया गया है। यूं लगेगा कि जैसे आप सबकुछ अपनी आंखों के सामने ही होता देख रहे हैं। कैमरा के मामले में रजत कपूर ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है बेहतरीन काम दिखाने की।

आंखों देखी को स्टार पावर की जरुरत नहीं

आंखों देखी को स्टार पावर की जरुरत नहीं

रजत कपूर ने ये साबति कर दिया है कि अगर निर्देशक चाहे तो वो अच्छी कहानियों को बिना किसी स्टार पावर के भी एक बेहतरीन फिल्म मे परिवर्तित कर सकता है। रजत कपूर का कहना है कि हिट फिल्म देना बहुत आसान होता है लेकिन एक अच्छी फिल्म बनाना बहुत ही मुश्किल।

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    English summary
    Ankhon Dekhi is a story of an old man Raja Babu who one day decides to believe only in those things which his eyes sees. Sanjay Mishra is playing character of Babuji. Directed by Rajat Kapoor Ankhon Dekhi shows a story f a common man who wants to see life from his own eyes.

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