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एक्शन के साथ हॉरर का भी तड़का- अब तक छप्पन 2 फिल्म रिव्यू

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2004 में रिलीज हुई अब तक छप्पन ने एक्शन के दीवानों को एक बेहतरीन मनोरंजन दिया। फिल्म में नाना पाटेकर का अभिनय इतना जानदार था कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी कमाई की। फिल्म की सफलता से प्रेरित होकर एजाज गुलाब ने अब तक छप्पन 2 बनाने का फैसला किया जो कि इस वक्त सिनेमाघरों में लग चुकी है। फिल्म को देखकर इतना कहा जा सकता है कि नाना पाटेकर का गुस्सा काफी ठंडा हो चुका है और एक्शन से ज्यादा ये एक हॉरर फिल्म है।

फिल्म की कहानी ने इस बार एक्शन से ज्यादा इमोशनल रुप धारण कर लिया है और किरदारों के नाम पर शायद सिर्फ साधु अगाशे ही नज़र आएंगे, इनके अलावा बाकी के किरदारों को जैसे सिर्फ रख दिया हो लेकिन उन्हें करने को कुछ ना दिया हो। आशुतोष राणा को तो जैसे कॉमेडी करने के लिए ही फिल्म में रखा था। पूरी फिल्म में वो सिर्फ दर्शकों को हंसाने के ही काम आए।

साधू अगाशे अपनी पत्नी की मौत के बाद फोर्स छोड़कर गोवा के एक गांव में अपने बेटे अमन के साथ रहने लगते हैं। एक दिन पुलिस फोर्स को मुंबई से अंडरवर्ल्ड का सफाया करने के लिए फिर से साधू की याद आती है। साधु आने के बाद शहर का कायपलट कर देता है लेकिन इस दौरान वो अपने बेटे को भी खो बैठता है और अंत में उसे पता चलता है कि वो जिस फोर्स के लिये ये सब कर रहा था असल में उसी ने साधु का इस्तेमाल अपने मतलब के लिये किया।

कहानी

अब तक छप्पन की कहानी बहुत ही साधारण है। एक पुलिस ऑफीसर की जिंदगी निजी और पोफेशनल दो हिस्सों में बंटी होती है। एक के साथ सही करने जाए तो दूसरे के साथ गलत कर बैठता है। कहानी में थोड़ा और कसाव लाया जा सकता था लेकिन जिसकी कमी के चलते अब तक छप्पन 2 काफी धीमी और बोर सी महसूस हुई।

अभिनय

अभिनय के मामले में नाना पाटेकर ही नज़र आए। हालांकि इस बार उनके अभिनय में वो दम नहीं था। उनका गुस्सा उतना कड़क नहीं था उनके डायलॉग्स किसी को हैरान करने वाले नहीं थे। आशुतोष राणा जो कि एक बेहतरीन कलाकार हैं उन्हें भी फिल्म में कुछ स्पेस नहीं दिया गया। जब किरदार ही नहीं था तो अभिनय करने का मौका भी नहीं मिला।

किरदार

नाना पाटेकर के किरदार को छोड़कर कोई और किरदार फिल्म में नज़र ही नहीं आया। आशुतोष राणा जो कि एक बेहतरीन अभिनेता हैं उनका किरदार किसी कॉमेडी कैरेक्टर से कम नहीं था। गुल पनाग का किरदार क्या था और वो फिल्म में क्या कर रहा था ये भी समझ नहीं आया। विलेन के रुप में राज जुत्शी, विक्रम गोखले का किरदार दमदार ही नहीं था। साथ ही गोविंद नामदेव जैसे अभिनेता का किरदार भी कुछ खास कमाल नहीं कर सका।

निर्देशन

निर्देशन के मामले में एजाज गुलाब काफी पीछे छूट गये। हालांकि सिर्फ नाना पाटेकर ही फिल्म बनाने के चक्कर में शायद वो चूक गये। फिल्म के बाकी किरदारों पर उनकी नज़र ही नहीं गयी। फिल्म का निर्देशन ऐसा था कि कहीं कहीं पर तो फिल्म हॉरर लग रही थी। कैमरा, लाइटिंग भी हॉरर फिल्मों जैसी ही थी।

देखें या नहीं

फिल्म एक बार देखने लायक है हालांकि इंटरवल के बाद थोड़ी बोर सी हो जाती है लेकिन फर्स्ट हाफ फिर भी बेहतर है। नाना पाटेकर की फिल्मों को पसंद करने वाले कुछ हद तक निराश हो सकते हैं।

English summary
Ab Tak Chappan 2 released this Friday. Nana Patekar starer Ab Tak Chappan 2 is little disappointed for critics as well as for fans.

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