आरक्षण : शिक्षा बनाम व्यवसाय

निर्माता : प्रकाश झा, फिरोज नाडियाडवाला
निर्देशक : प्रकाश झा
संगीत : शंकर-अहसान-लॉय
कलाकार : अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, मनोज बाजपेयी, प्रतीक बब्बर
रिलीज डेट : 12 अगस्त 2011
पिछले कुछ सालों में हमारे देश में शिक्षा को लेकर जिस तरह के परिदृश्य उजागर हुए हैं उन्हें ही आधार बनाकर प्रकाश झा ने ' आरक्षण ' नाम का बिगुल बजाया है। आज हर स्कूल और कॉलेज में आरक्षण के कारण ही समाज में कुछ वर्ग के लिए शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो जाती है और कुछ युवा संघर्षों के बाद भी अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
आज थोक के भाव में खुल रहे कोचिंग और निजी शैक्षिक संस्थानों को प्रकाश झा ने इस फिल्म के जरिए आड़े हाथों लिया है जिन्होंने शिक्षा के स्वरूप को ही बदल कर रख दिया है इनके लिए शिक्षा सिर्फ एक व्यवसाय बन कर रह गयी है। इतना ही नहीं आज कल दिन रात फल-फूल रहे इस शिक्षा को कारोबार में देश के नेताओं की भी घुसपैठ हो गई है कोई ना कोई नेता किसी ना किसी कॉलेज से जुड़ा है। ऐसे नेताओं पर भी प्रकाश झा ने सीधा वार किया है।
आरक्षण की इस कहानी में प्रभाकर आनंद (अमिताभ बच्चन), पूरबी (दीपिका पादुकोण), दीपक कुमार (सैफ अली खान), सुशांत (प्रतीक बब्बर), मिथिलेश सिंह (मनोज बाजपेयी) मुख्य किरदार के रूप में नजर आएंगे। इसमें प्रभाकर आनंद एक कॉलेज में प्रिंसीपल है। जिनके लिए ईमानदारी और सिद्धांत से बढ़ कर कुछ नहीं है और उनका कॉलेज प्रदेश का नंबर वन कॉलेज है। प्रभाकर के छात्रों में से दीपक अपने सर के लिए कुछ भी कर सकता है। दीपक को प्रभाकर की बेटी पूरबी पसंद है और पूरबी का दोस्त है सुशांत।
फिल्म की कहानी में यह दिखाया गया है कि किस तरह से शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण नाम का दीमक इनकी दोस्ती, प्यार, सपने और सिद्धांतों को खोखला कर देता है। फिल्म के निर्देशक प्रकाश झा हमेशा से ही अपनी फिल्मों के द्वारा कुछ ऐसे ज्वलंत मुद्दे उठाते रहें हैं जो आम इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है। या यूं भी कह सकते हैं कि प्रकाश झा कि फिल्में आज के समाज का ही आईना है। इनकी अब तक आई फिल्मों पर अगर हम नज़र डाले तो वर्तमान परिवेश में बनी गंगाजल, अपहरण और राजनीति ने दर्शकों के दिल पर गहरी छाप छोड़ी है। देखते है आरक्षण शिक्षा के हो रहे व्यवसायीकरण में कितना प्रहार कर पाती है।


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