युवाओं को टीवी पर लव, सेक्स, हिंसा देखना पसंद
टेलीविजन पर 'इमोशन अत्याचार', 'दादागिरी', 'एक्स योर एक्स', 'स्पिल्ट्स विला', 'डेयर टू डेट' और 'लव नेट' जैसे कार्यक्रमों की बाढ़ आयी हुई है। इन्हें पसंद करने वाले लोगों में ज्यादातर युवा हैं। जी हां आज के युवा टेलीविजन पर लव, सेक्स और क्राइम देखना ही पसंद करते हैं। इन सभी कार्यक्रमों में रिश्तों का मजाक बनाना, साथी के साथ धोखा करना और पीठ पीछे गुल खिलाना आम बात है।
आज का युवा टेलीविजन पर 'लड़का-लड़की मिले और उनके बीच प्यार हुआ' जैसी कहानी नहीं देखना चाहते। आज की पीढ़ी को टीवी पर 'प्यार, सेक्स और धोखा' से जुड़े कार्यक्रम पसंद हैं। आज की कॉलेज जाने वाली पीढ़ी इन्हीं कार्यक्रमों के लिए टेलीविजन सेट का रुख करती है। समाज शास्त्र की 19 वर्षीय शिमांति सेनगुप्ता का मानना है उनकी उम्र के लोग ऐसे कार्यक्रमों से एक तरह की खुशी प्राप्त करते हैं।
सेनगुप्ता ने कहा, "कभी-कभी हम सभी सोचते हैं कि इन तरह के तमाम शो सच नहीं हैं बल्कि उन्हें रणनीति के साथ तैयार किया गया है। इसके बावजूद हमारी उम्र के लोग ऐसे कार्यक्रम पसंद करते हैं क्योंकि इनका विकास हमारे बीच से होता है।" कुछ युवा ऐसे कार्यक्रमों के साथ इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि उनकी जिंदगी में कार्यक्रमों में दिखाई जाने वाली घटनाओं जैसे वाक्यात हो चुके होते हैं। ऐसे में इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें अपनी कई समस्याओं का समाधान मिल जाता है।
20 वर्षीय करण मल्होत्रा कहते हैं, "यह अच्छा मनोरंजन है। साथ ही यह हमें हमारे रिश्तों की जांच का मौका देता है। हम सभी रिश्तों में ठहराव चाहते हैं और कभी-कभी इस कार्यक्रम के माध्यम से इस दिशा में सोचने और चलने का मौका मिलता है।" एक तरफ जहां युवाओं के परिजन इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इन कार्यक्रमों को बनाने वाले सीधे तौर पर युवाओं को ही निशाना बनाते हैं, वहीं दूसरी ओर इन कार्यक्रमों को बनाने वाले मानते हैं कि वे सीधे-सादे विषयों पर कार्यक्रम नहीं बना सकते।
यूटीवी बिंदास के विपणन प्रमुख निखिल गांधी ने कहा, "हमने युवाओं को लेकर कुछ हल्के विषयों वाले कार्यक्रम बनाने का प्रयास किया लेकिन हम नाकाम रहे। उदाहरण के तौर पर इमोशनल अत्याचार को लीजिए, जैसे ही हमने इस कार्यक्रम के कुछ आपत्तिजनक हिस्सों को काटना शुरू किया, तब हमारी रेटिंग गिरने लगी।"


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