अमिताभ को जन्मदिन की बधाई, जेपी को शत् शत् नमन

जयप्रकाश नारायण जैसी विभूतियों को इसलिये सलाम करना भी जरूरी है, कि ताकि हमानी आने वाली जैनरेशन यह समझे कि हां देश में क्रांति लाने वाले लोग कौन-कौन थे। जयप्रकाश का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार में हुआ था। वे समाज सेवक थे। इन्होंने 1970 में इंदिरा गांधी के खिलाफ विपक्ष का नेतृत्व करते हुए युवा शक्ति को एक नई दिशा दिखाई थी। इन्हें लोक नायक के नाम से भी जाना जाता है। 1998 में उन्हें भारत रत्न से भी नवाज़ा गया था।
छात्र जीवन की बात करें तो कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में महंगी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिये उन्होंने छोटी-छोटी कंपनियों, रेस्त्रां, खेतों, आदि में काम किया। वे मार्क्स के समाजवाद से प्रभावित थे। 1921 में जब वे अमेरिका से लौटे, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेज़ी पर था। उनका संपर्क गाधी जी के साथ काम कर रहे जवाहर लाल नेहरु से हुआ।
स्वतंत्रता संग्राम में जेपी
वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। 1932 मे गांधी, नेहरु और अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओ के जेल जाने के बाद, उन्होने भारत मे अलग-अलग हिस्सों मे संग्राम का नेतृत्व किया। अन्ततः उन्हें भी मद्रास में सितंबर 1932 मे गिरफ्तार कर लिया गया और नासिक के जेल में भेज दिया गया। जेल मे इनके द्वारा की गई चर्चाओं ने कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी (सीएसपी) को जन्म दिया। सीएसपी समाजवाद में विश्वास रखती थी।
1939 मे उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोक आंदोलन का नेतृत्व किया। यही वो व्यक्ति थे जिन्होंने महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच सुलह कराने के प्रयास किये। उन्हे बंदी बना कर मुंबई की आर्थर रोड जेल और दिल्ली की कैंप जेल मे रखा गया। 1942 भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे आर्थर जेल से फरार हो गए।
अर्थर रोड जेल में बंद हुए जेपी
उन्होंने नेपाल जा कर आज़ाद दस्ते का गठन किया। उन्हें एक बार फिर पंजाब में चलती ट्रेन में सितंबर 1943 मे गिरफ्तार कर लिया गया। 16 महिने बाद जनवरी 1945 में उन्हें आगरा जेल मे स्थांतरित कर दिया गया। इसके उपरांत गांधी जी ने यह साफ कर दिया था कि डा. लोहिया और जेपी की रिहाई के बिना अंग्रेज सरकार से कोई समझौता नामुमकिन है। दोनो को अप्रेल 1946 को आजाद कर दिया गया।
1948 मे उन्होंने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया और बाद में गांधीवादी दल के साथ मिल कर समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की। 19 अप्रेल, 1954 में गया, बिहार मे उन्होंने विनोबा भावे के सर्वोदय आंदोलन के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की। 1957 में उन्होंने लोकनिति के पक्ष मे राजनिति छोड़ने का निर्णय लिया।
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आजादी के बाद जब इंदिरा गांधी की नीतियां सिर चढ़कर बोल रही थीं, तब जयप्रकाश ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने गुजरात राज्य का चुनाव जीता। 1975 में इंदिरा गांधी ने आपात्काल की घोषणा की तो देश भर में जयप्रकाश के नेतृत्व में आंदोलन हुआ। इस आंदोलन में ज्यादातर युवा ही थे। जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई। इसी विरोध के चलते अगले ही चुनाव यानी 1977 में इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं। जेपी का निधन पटना में 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी के चलते हुआ।


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