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    #SeedhiBaat: 100 करोड़ तो सलमान अक्षय की फीस है...कहां से बनाएंगे बाहुबली!

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    बॉलीवुड को आजकल एक ही चिंता खाए जा रही है। क्या हम कभी भी बाहुबली 2 की बॉक्स ऑफिस सक्सेस जैसी कहानी दोहरा पाएंगे? क्या बॉलीवुड कभी अपनी बाहुबली 2 बना पाएगा। और सीधा सा जवाब है नहीं।

    कारण तो कई हैं लेकिन शुरूआत करते हैं हमारे आज के पांच सुपरस्टारर्स से। सलमान खान, आमिर खान, शाहरूख खान, अक्षय कुमार और अजय देवगन। इनकी फीस सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं।

    why-bollywood-cannot-deliver-1500-crore-film-like-baahubali

    इन पर सबसे सटीक बात कही थी अनुराग कश्यप। जब कुछ स्टार्स हॉलीवुड के स्टार्स के साथ फोर्ब्स की लिस्ट में शामिल हुए थे, अनुराग कश्यप ने सीधा सवाल उठाया था। कि हॉलीवुड की फिल्में अरबों कमाती हैं तब ये स्टार्स इस लिस्ट में हैं।

    हमारे यहां तो 100 करोड़ कमाने पर जश्न मन जाता है। और फिर भी हमारे स्टार्स उस लिस्ट में हैं। ज़ाहिर सी बात है कि बॉलीवुड स्टार्स अपनी औकात से ज़्यादा फीस लेते हैं।

    प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट ने तो साफ कहा कि ये जो बड़े बड़े स्टूडियो आ गए हैं उन्होंने स्टार की कीमत इतनी लगा दी है कि एक्टर खो गया है। अब अगर स्टार के मेकअप मैन से लेकर ड्राईवर की पगार भी फिल्म से दी जाएगी तो ज़ाहिर सी बात है फिल्म का बजट बेकार बढ़ेगा।

    लेकिन अब बाहुबली की सफलता के बाद बॉलीवुड में अलार्म बज चुका है। आखिर अपनी इज़्जत बचाने के लिए बॉलीवुड को कुछ चीज़ें तो बदलनी ही पड़ेंगी। जानिए फिलहाल क्यों नहीं बन सकती बाहुबली जैसी ब्लॉकबस्टर -

     महंगी फीस

    महंगी फीस

    सलमान खान से लेकर शाहरूख खान तक और सुशांत सिंह राजपूत से लेकर करीना कपूर तक सबकी फीस अगर आप सुन लेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे। अक्षय कुमार हर दिन का एक करोड़ चार्ज करते हैं तो ऋतिक अपने 40 करोड़ की फीस के बाद, एक भी दिन ज़्यादा शूट करते पर हर रोज़ की फीस लेते हैं!

    क्लैश पर क्लैश

    क्लैश पर क्लैश

    हमारे यहां आजकल वापस से हीरो और हीरो के लड़ने का चलन शुरू हो गया है। बाजीराव मस्तानी और दिलवाले जैसी फिल्मों के लिए तो ये क्लैश बहुत ही घाटे का सौदा रहा है। लेकिन फिर भी हमारे यहां क्लैश बंद नहीं हो रहे हैं।

    हर किसी को चाहिए तारीख

    हर किसी को चाहिए तारीख

    हर स्टार को आजकल छुट्टी या त्योहार चाहिए। अब देश त्योहार ज़्यादा मनाना तो शुरू नहीं कर देगा। नतीजा हो रहा है कि फिल्में कम रिलीज़ हो रही हैं या फिर आगे बढ़ा दी जाती हैं। रईस तो सुलतान के साथ जुलाई 2016 में रिलीज़ होते होते जनवरी 2017 में खिसक गई। लिहाज़ा फिल्म में दर्शकों की दिलचस्पी घट गई।

     कंटेंट कहां है?

    कंटेंट कहां है?

    आजकल फिल्मों में कंटेंट कम और मसाला ज़्यादा बिक रहा है। जिन फिल्मों में कंटेंट है भी तो भी किसी ना किसी कारण से दर्शक उसे नकार ही देते हैं। पिछले साल अलीगढ़, धनक, वेटिंग जैसी शानदार फिल्मों को दर्शक ही नहीं मिले।

    भंसाली को हम पीट देते हैं

    भंसाली को हम पीट देते हैं

    वास्तव में अगर बाहुबली से तुलना की जाए तो हमारे पास एक ही इंसान है जो हर फ्रेम को खूबसूरती से परदे पर उतारता है। वो है संजय लीला भंसाली लेकिन उन्हें हम आए दिन फिल्में बनाने पर या तो मारते पीटते हैं, या उनका सेट जला देते हैं या उनकी फिल्म बैन करवाने पर तुल जाते हैं।

    कितना ज़्यादा मसाला

    कितना ज़्यादा मसाला

    बाहुबली मसाला, ड्रामा, रोमांस, एक्शन का भरपूर डोज़ थी। लेकिन हमारे यहां हर चीज़ की अति करने की आदत हो जाती है। अगर दबंग बन रही है तो सलमान की शर्ट अपने आप फट जाती है और अगर सिंघम बन रही है तो अजय देवगन की बाईक अपने आप उड़ जाती है।

     स्टारडम पर टिकी हैं फिल्में

    स्टारडम पर टिकी हैं फिल्में

    हमारे यहां फिल्में स्टार के नाम पर बिक जाती है। इसलिए मोहनजोदड़ो जैसी शानदार फिल्म के लिए आशुतोष गोवारिकर ने कोई रिसर्च करना ज़रूरी नहीं समझा। नतीजा ये हुआ कि फिल्म में दिलचस्पी होने के बावजूद ये फिल्म दर्शकों को ज़्यादा खींच नहीं पाई। जबकि फिल्म के पास ऋतिक रोशन जैसा एक्टर था, मोहनजोदड़ो जैसी तगड़ी स्क्रिप्ट थी और एआर रहमान का म्यूज़िक था।

    कितना करोगे प्रमोशन

    कितना करोगे प्रमोशन

    अगर आप ध्यान से देखें तो बाहुबली को प्रमोट करने ना ही कोई स्टार किसी सीरियल में गया और ना ही फिल्म को लेकर बहुत ज़्यादा प्रमोशन किया गया। फिल्म की केवल सोशल मार्केटिंग बड़े ही ध्यान से की गई। ऐसे में फिल्म की तरफ लोगों का ध्यान गया और इसके बारे में दिलचस्पी बढ़ी।

    प्लान करके बनाया गया सीक्वल

    प्लान करके बनाया गया सीक्वल

    फिल्म का सीक्वल प्लान करके बनाया गया। यानि कि डायरेक्टर को पता था कि उसे फिल्म दो पार्ट में बनानी है। ये नहीं कि दबंग सुपरहिट हो गई तो चलो दबंग 2 बना लेते हैं। ऐसे में फिल्म का आईडिया इतने अच्छे से डेवेलप हो ही नहीं सकता। और ना ही फिल्म सीक्वल लग सकती है।

     एक फिल्म में पांच साल

    एक फिल्म में पांच साल

    बाहुबली बनाने में पांच साल का समय लगा। इतने में अक्षय कुमार 20 फिल्में कर जाते हैं। तो फिल्में भी अच्छी होने के बावजूद औसत ही रह जाती हैं। वहीं आमिर खान 2 साल लेकर फिल्म बनाते हैं तो वो मेहनत उनकी कमाई में दिखाई देती है।

    English summary
    Why Bollywood cannot deliver a 1500 crore film like baahubali.

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