फाल्के अवार्ड विजेता 'प्राण' का अंतिम संस्कार आज

12 जुलाई 2013 को हिदी सिनेमा का एक नायाब तारा सदा के लिए डूब गया।जी हां हम बात कर रहे हैं प्राण साहब की। जो केवल नाम के ही प्राण नहीं थे बल्कि हिंदी सिनेमा के भी प्राण थें। शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे प्राण साहब ने दुनिया को सदा के लिए अलविदा कह दिया और अपनी हिट फिल्म उपकार के गाने कसमें..वादे प्यार वफा...कहते हुए अपनी आंखे सदा के लिए मूंद ली। प्राण का अंतिम संस्कार आज दोपहर 12 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा।

प्राण साहब की उपस्थित हमेशा से फिल्मों की सफलता की गारंटी थी। आंखो में गुस्सा और लबों से निकलते उनके भयानक डॉयलाग अच्छे अच्छे नायकों के छक्के छुड़ा देते थे। तो वहीं जब उन्होंने चरित्र अभिनेता का रूप धरा तो भी वह लोगों के दिलों में ही बसे रहे।

जिद्दी, बड़ी बहन, उपकार, राम और श्याम जंजीर, डॉन, अमर अकबर एंथनी और शराबी ऐसी फिल्में हैं जिनका कोई जवाब नहीं हैं। मात्र दो महीने पहले उन्हें दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। यह अवार्ड उन्हें सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने घर जाकर दिया था। जिस समय उन्हें यह सम्मान दिया गया था,उस समय उनकी आंखें खुशी से छलक उठी थीं। उन्होंने इस सम्मान के लिए भारत सरकार औऱ देश के लोगों का तहे दिल से धन्यवाद दिया था।

प्राण साहब पिछले कई दिनों से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे। 93 साल के प्राण साहब भले ही पर्दे पर बुरे आदमी का रोल निभाते थे लेकिन असल जिंदगी में वह एक बेहद ही नायाब व्यक्ति थे जिनका हर कोई सम्मान करता है। इसलिए उनके चले जाने से हर कोई सकते में हैं।

प्राण साहब के निधन से बॉलीवुड सकते में हैं, आईये आपको बताते हैं किसने क्या कहा?

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