#28Years: कुछ नहीं बदला ना ही सलमान और ना ही सुलतान
सलमान खान फैन्स काफी खुश हैं क्योंकि अब आधिकारिक रूप से उन्हें बॉलीवुड में 28 साल हो चुके हैं। ये जश्न मन रहा है उनकी पहली फिल्म बीवी हो तो ऐसी है के 28 साल पूरे होने की खुशी में।
गौरतलब है कि सलमान खान ने रेखा और फारूख शेख की इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया था जहां रेखा उनकी भाभी बनी थीं। हालांकि उन्हें प्रॉपर लॉन्च दिया सूरज बड़जात्या की फिल्म मैंने प्यार किया ने। बीवी हो तो ऐसी 1988 में रिलीज़ हुई थी।

इसके बाद 1989 में मैंने प्यार किया आई और सलमान खान को नया नाम मिल गया - प्रेम। इसके बाद वो अलग अलग किरदारों में दिखते रहे और फिर अचानक उनका नया जन्म हुआ दबंग खान के नाम से। उनका चुलबुल पांडे लोगों के मन में घर बना गया।
[#NotJoking: "50 ही का हूं...जब बच्चे हो सकते हैं...तो बच्चे गोद क्यों लूं!" - सलमान]
और अब आखिरकार वो सुलतान बन चुके हैं। बॉलीवुड के भी और बॉक्स ऑफिस के भी। लेकिन पहली फिल्म से सुलतान बनने के इस सफर में लोग प्रेम को कभी नहीं भूले।
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सलमान खान हमेशा वही प्रेम रह गए जिसे लोगों ने 1989 में देखा था। जानिए कैसे सूरज बड़जात्या ने प्रेम को बनाया लोगों का फेवरिट
फिल्म की जान
हर फिल्म की जान प्रेम था। भले ही वो फैमिली फिल्म थी और उसका हर किरदार अहम था। लोगों हर किरदार से प्यार भी हुआ पर प्रेम से थोड़ा ज़्यादा प्यार हो गया।
पहली नज़र का प्यार
इसका कारण था कि हर फिल्म में पहली ही दफा स्क्रीन पर सूरज बड़जात्या सबको प्रेम से मिलवा देते थे। प्रेम रतन धन पायो, मैंने प्यार किया, हम साथ साथ हैं और हम आपके हैं कौन ने जादू किया था।
प्रेम की एंट्री
सलमान खान को देखने के लिए फैन्स हमेशा उतावले रहते हैं इसलिए हर फिल्म में प्रेम की एंट्री ज़बर्दस्त होती है।
1989 - 2015
चाहे वो मैंने प्यार किया की कार रेस हो, हम आपके हैं कौन का मैच, हम साथ साथ हैं का डायलॉग...प्रेम आज भी वही करता है या फिर प्रेम रतन धन पायो का - मैं वापस आ गया!
परिवार से प्यार
प्रेम और परिवार हमेशा एक दूसरे से ऐसा जुड़ जाते हैं कि उन्हें अलग ही नहीं किया जा सकता है।
शर्म और हया
जितने शर्मीले प्रेम खुद हैं, उससे ज़्यादा शरमीली उनकी हीरोइनें हो जाती हैं और इस तरह का रोमांस देखना किसे नहीं पसंद।
पहला पहला प्यार है
पहला पहला प्यार है....म्हारे हिवड़ा में...मेरे रंग में रंगने वाली है....जलते दिए सब उस प्यारे से रोमांस का ही नमूना है।
बस प्यार और परिवार
चाहे वो धिकताना हो, या फिर एबीसीडी एक बात जो हर फिल्म में थी वो था प्रेम का अपने परिवार के लिए प्यार।
स्टाईल में मुलाकात
प्रेम हमेशा अपनी हीरोइन से उतने ही स्टाइल में मिलता है कि किसी को भी उससे प्यार हो जाएगा।
हेलो...हाय...और अए हाए
यही कारण है कि राजश्री की फिल्मों में हीरो और हीरोइन की मुलाकातों में कहीं किसी डायलॉग बाज़ी की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
छेड़ छाड़
प्रेम जितना सीधा है उतना ही चुलबुला है और इसलिए उसकी खट्टी मीठी नोकझोंक दर्शकों को काफी पसंद आती है।
मैया यशोदा...दूल्हे की सालियों
चाहे मैया यशोदा हो, आ जा शाम होने आई...दूल्हे की सालियों या फिर जब तुम चाहो....सभी फिल्मों की प्यार भरी तकरार दर्शकों को याद है।
प्रेम है तो आईटम भी है
हर फिल्म में आईटम नंबर ज़रूरी होता है और राजश्री की फिल्में भी ये बात समझती हैं लेकिन ज़रा हटके स्टाइल में।
अंताक्षरी
मैंने प्यार किया की अंताक्षरी हो, दीदी तेरा देवर दीवाना या फिर सुनो जी दुल्हन....सब राजश्री स्टाइल आईटम नंबर ही तो हैं! अब जो लड़का घरवालों के साथ बैठकर अंताक्षरी खेले वो किसे पसंद नहीं आएगा।


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