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वो अमिताभ बच्चन हैं, उनकी वजह से मुझे आज भी फिल्में मिल जाती हैं

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ऋषि कपूर - अमिताभ बच्चन स्टारर 102 नॉट आउट, 4 मई को रिलीज़ हो रही है। फिल्म को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। फिल्म के प्रमोशन के दौरान, ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन ने एक दूसरे से जुड़ी काफी बातें शेयर की।

अब हाल ही में ऋषि कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमिताभ बच्चन के कारण तो मुझे आज भी फिल्में मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले तो इस तरह की फिल्में बनती ही नहीं थी। हर एक्टर वही खोया पाया वाली फिल्में करता था। दो चार करके खत्म।

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ऋषि कपूर ने ये भी बताया कि उन्हें करियर में कभी सीरियसली नहीं लिया गया और इसमें उनकी पूरी गलती थी। वो केवल रोमांटिक रोल ही करते रह गए। उनके अंदर कोई रिस्क लेने की कभी हिम्मत ही नहीं आ पाई।

वहीं उन्होंने आज के सिनेमा पर बात करते हुए कहा कि आज के सितारे सब कुछ ट्राई कर सकते हैं। उन्हें छूट है फिल्म रिजेक्ट करने की। हमारे पास नहीं होती थी। जो आ गई लगता था कर लो।

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वहीं अमिताभ बच्चन जैसे स्टार्स हैं जो आज भी एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं और लीड रोल की फिल्में कर रहे हैं। और इसलिए ऐसी फिल्में बन रही हैं जिनमें हमारे जैसे एक्टर्स के पास कुछ करने को हो।

ऋषि कपूर का कहना है कि अमिताभ बच्चन ने ये रास्ता बनाया है, इसलिए मुझे अभी भी अच्छा काम मिल पा रहा है। आइए आपको दिखाते हैं, सेकंड इनिंग्स में अमिताभ बच्चन के कुछ शानदार फ्लेवर -

कैसे बने बॉलीवुड के शहंशाह

कैसे बने बॉलीवुड के शहंशाह

दीवार का विजय जिसके पास गाड़ी, बंगला और शोहरत थी, चुपके चुपके का परिमल जो पूरी फिल्म यह समझाने में लगा देता है कि मैं मैं हूं पर मैं वो नहीं जो मैं हूं, अभिमान का उभरता गायक हो या कभी कभी का शायर, हम का ज़िम्मेदार भाई या सत्ते पे सत्ता का अल्हड़,कॉमेडी, रोमांस और एंग्री यंग मैन की छवि को 70 - 80 के दशक में अमिताभ ने खूब जिया और देखते ही देखते वो बॉलीवुड के शहंशाह बन गए।

पिंक का धाकड़ वकील

पिंक का धाकड़ वकील

पिंक में अमिताभ बच्चन ने एक धाकड़ वकील का किरदार निभाया है। उसके काम का उसकी उम्र या फिर उसकी निजी ज़िम्मेदारियों से कोई लेना देना नहीं है। ये फिल्म साल 2016 की बेस्ट फिल्म बनकर उभरी।

पीकू

पीकू

अमिताभ बच्चन एक साथ इरिटेट और प्यारे लगने वाले इंसान कैसे हो सकते हैं, इसके लिए ये फिल्म देखनी ही चाहिए।

ऑरो का बचपन

ऑरो का बचपन

एक बच्चे के किरदार को संजीदगी से जी लेना, शायद अमिताभ बच्चन ही ऐसा कर सकते हैं। पा का ऑरो सबके दिल को छू गया। फिल्म में अमिताभ का बचपना ही फिल्म की खासियत थी।

डराता - हंसाता कैलाशनाथ उर्फ भूतनाथ

डराता - हंसाता कैलाशनाथ उर्फ भूतनाथ

बच्चों को डराने की नाकाम कोशिश करते करते उनका बेस्ट फ्रेंड बन जाना इस फिल्म की यूएसपी थी। शरारत और संजीदगी दोनों ही पहलुओं को खुद में समेटे भूतनाथ लोगों का चहेता बन गया था

रंगीन-बेबाक फकीर

रंगीन-बेबाक फकीर

एक गाना और अमिताभ अपनी हटके अदा कारण इस फिल्म में छाए रहे। हालांकि दर्शकों के बीच फिल्म नहीं चली लेकिन लंबे फकीरी कोट, मैंडेलिन और शहंशाह के लंबे जूतों में अमिताभ ने ध्यान ज़रूर खींचा।

पाक कला में माहिर अक्खड़ बुद्धदेव गुप्ता

पाक कला में माहिर अक्खड़ बुद्धदेव गुप्ता

इस फिल्म के बाद अमिताभ की छोटी पोनीटेल स्टाइल स्टेटमेंट बन गया। 62 साल के एक सनकी शेफ और 32 साल की तब्बू की लव स्टोरी ने खूब वाहवाही बटोरी। फिल्म में अमिताभ का अक्खड़ अंदाज़ भी आपको ज़रूर पसंद आया होगा।

विश्वासपात्र पर मजबूर एकलव्य

विश्वासपात्र पर मजबूर एकलव्य

एक जांबा़ज़ और विश्वासपात्र शाही सेवक के रूप में अमिताभ का अभिनय लाजवाब था। फिल्म को भारत की तरफ से आधिकारिक ऑस्कर एंट्री के रूप में भेजा गया। अमिताभ का कसा अभिनय और संवाद ने फिल्म में जान डाली थी।

कजरारे पर थिरकता दिलेर डीसीपी दशरथ

कजरारे पर थिरकता दिलेर डीसीपी दशरथ

एक पुलिसवाला और दो चोर। चोर पुलिस की इस कहानी में अगर कुछ खास था तो वो था अमिताभ का बेधड़क अंदाज़। कजरारे पर ऐश्वर्या राय के साथ ताल मिलाकर अमिताभ ने तहलका मचा दिया था।

धुन का पक्का सुभाष नागरे

धुन का पक्का सुभाष नागरे

रामगोपाल वर्मा की इस फिल्म में अमिताभ बिल्कुल जुदा अंदाज़ में दिखे। फिल्म ने काफी वाहवाही बटोरी और इसे महाराष्ट्र के राजनीतिक परिवेश से भी जोड़ कर देखा गया। अमिताभ के कॉस्ट्यूम, मेकअप, अभिनय की जमकर तारीफ हुई। फिल्म का एक सीक्वल भी बना।

उम्र से लड़ता ईश्वरचंद्र

उम्र से लड़ता ईश्वरचंद्र

इस फिल्म में एक परेशान और समझदार पिता का किरदार दर्शकों की आंखे नम कर गया। ईश्वर का उनका किरदार कई मायनों में अलग था। बेटे को समझने के लिए पहले उसका हमउम्र बनना फिर पिता बनकर उसकी गल्तियां सुधारना।

चालाक चतुर राजस्थानी

चालाक चतुर राजस्थानी

अमिताभ ने इस फिल्म में एक छोटे से गड़रिये का रोल अदा किया था। लेकिन ठेठ राजस्थानी बोलचाल और पहनावे में वे खूब जमे थे। मात्र 5 मिनट के रोल में भी अमिताभ खूब जमे थे।

जुनूनी और अड़ियल देबराज साहनी

जुनूनी और अड़ियल देबराज साहनी

इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नए आयाम दिये थे। अड़ियल, ज़िद्दी और मेहनती टीचर के रोल में अमिताभ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी खूब तालियां बटोरी। उनका जुनूनी अंदाज़ दर्शकों को खूब भाया।

बदले की आग में जलता विजय सिंह राजपूत

बदले की आग में जलता विजय सिंह राजपूत

निगेटिव छवि और अमिताभ बच्चन भले ही अजीब लगे पर आंखे का ये विलेन डराता है। ग्र शेड लिए हुए अमिताभ के किरदार ने फिल्म को एक विशेष दर्शक वर्ग में स्थापित किया। बदला, गुस्सा और प्रतिशोध के लिए अमिताभ के निगेटिव रोल ने तालियां भी बटोरीं।

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    English summary
    Rishi Kapoor believes Amitabh bachchan has opened ways for Senior actors. Rishi Kapoor believes cinema provides more opportunity for youngsters these days.

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