सचिन भगवान बनने लायक हैं.. इसलिए पूजे जाते हैं..

By अंकुर शर्मा

Really Sachin Tendulkar is a God of Indian Cricket: Time
गुरूवार को जैसे ही खबर आयी कि भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट क्रिकेट की दुनिया से अलविदा कहने का ऐलान किया है.. चारों ओर केवल सन्नाटा पसर गया। अखबारों औऱ टीवी चैनलों पर सिर्फ और सिर्फ सचिन तेंदुलकर ही छा गये। सभी लोग सचिन के बारे में ही बातें करने लगे, हर किसी को इस बात का अंदेशा तो था कि सचिन जल्द ही रिटायरमेंट लेने वाले हैं लेकिन शायद दिल के किसी कोने में कोई आवाज अभी भी दबी थी कि नहीं सचिन अभी भी 10 नंबर की जर्सी पहने क्रिकेट के मैदान पर गेंदबाजों के छक्के छुड़ाते नजर आयेंगे।

लेकिन कहते हैं ना जो चीज शुरू हुई है उसका अंत भी होता है.. इसलिए महज 15 साल 9 महीने और 7 दिन की उम्र में अपना पहला इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट की पारी का अंत बतौर खिलाड़ी अगले महीने की 14 तारीख को 200वां टेस्ट खेलते ही हो जायेगा। उसके बाद सचिन किस रूप में लोगों के सामने आयेंगे इस बारे में अभी कोई खुलासा नहीं हैं। लेकिन इतना तो तय है कि सचिन की नई पारी क्रिकेट के ही रंग से रंगी होगी क्योंकि क्रिकेट ही सचिन की मुहब्बत है और जिंदगी भी। अपनी सांसों में क्रिकेट को महसूस करने वाले सचिन कैसे उसके बिना जी सकते हैं?

आज मुझे याद आ रही है 15 साल पहले आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गयी उनकी शानदार शारजाह पारी की, जिसको खेलने के बाद सचिन तेंदुलकर को कमेंटटेटर रविशास्त्री ने प्राईज टेबल के पास ही रोक लिया था क्योंकि हर ईनाम केवल सचिन के ही नाम था। सचिन के ट्राफी जीतने पर उनके चाहने वाले जोर-जोर से तालियां बजा रहे थे तो टीवी चैनलों पर पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्द गा रहे थे कि सारे जहां से अच्छा.. सचिन तेंदुलकर हमारा।

सच सचिन एक युग है जिसका हर पन्ना लोगों के लिए उदाहरण है, वह आदर्श हैं अपने काम के प्रति ईमानदारी के, लगन, मेहनत, शिद्धत, समर्पण और संयम का जीता जागते उदाहरण सचिन तेंदुलकर को अगर लोग भगवान मानते हैं तो गलत क्या है? कोई भी इंसान अपने कर्मो से ही बड़ा और इज्जत पाता है इसलिए अगर लोग सचिन को भगवान की तरह पूजते हैं तो गलत नहीं है क्योंकि सचिन के कर्म उन्हें इस बात का हकदार बनाते हैं।

24 साल बेदाग क्रिकेट जीवन औऱ खिताबों औऱ इनामों के साथ ईमानदारी से कमायी गयी इज्जत को हासिल कर पाना हर किसी के बस में नहीं होता है, इसलिए भारत मां के इस सच्चे सपूत को वनइंडिया परिवार भी कोटिकोटि प्रणाम करता है।

क्योंकि सचिन जैसा ना कोई था, ना है और ना ही कोई होगा तभी तो टाइम पत्रिका ने भी माना सचिन अद्धभुत हैं, अमिट हैं। वन डे से संन्यास लेने के बाद टाइम ने लिखा था कि जो शुरू हुआ है उसका अंत भी होगा, इसलिए सचिन का क्रिकेट से संन्यास लेना चौंकाने वाली बात जरूर है लेकिन हैरानी वाली बात नहीं है।

टाइम के मुताबिक सचिन महान थे, हैं और रहेंगे, सचिन तो वो नायाब हीरा है जिसके आगे वक्त भी नतमस्तक हो गया है। वक्त तो किसी के लिए नहीं रूकता है लेकिन सचिन तेंदुलकर ने वक्त को भी अपने हाथों में थाम कर रखा था। हमें चैम्पियन मिलेंगे, हमें महान खिलाड़ी मिलेंगे लेकिन हमें फिर कभी कोई दूसरा सचिन तेंदुलकर नहीं मिलेगा. वाकई में सचिन जैसा कोई नहीं है और ना ही कोई होगा।

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