उन बुड्ढों को ‘हिस्स’ पसंद नहीं आई तो मैं क्या करूं

मल्लिका शेरावत मानती हैं कि उनकी अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म 'हिस्स' जिस वर्ग के लिए बनी थी, उसे पसंद आई.
भले ही मल्लिका शेरावत की पहली अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म 'हिस्स' बॉक्स ऑफ़िस पर न चली हो लेकिन वो मानती हैं कि फ़िल्म जिस वर्ग के लिए बनी थी, उसे पसंद आई.
मल्लिका का कहना है, “ फ़िल्म ने पैसा नहीं खोया. मुझे ऐसा लगता है कि अपने देश में युवाओं और साठ से साल ऊपर के जो समीक्षक हैं, उनकी सोच में फ़र्क है. ‘हिस्स’ उनके लिए नहीं बनी थी, ‘हिस्स’ युवाओं के लिए बनी थी और उन्हें पसंद आई. अब उन बुड्ढों को फ़िल्म पसंद नहीं आई तो मैं क्या करूं.”
रियेल्टी शो जज करने वाले फ़िल्म कलाकारों में मल्लिका शेरावत का भी नाम जुड़ गया है और ये बात उन्होंने मुम्बई में उस शो के लॉन्च के दौरान कही.
मल्लिका मानती हैं कि आजकल बच्चों पर दबाव बहुत बढ़ गया है. वो कहती हैं, “बच्चों पर आजकल बहुत दबाव है. लेकिन मुझे लगता है कि एक तरह से ये अच्छा भी है क्योंकि वो में जल्दी सीख जाते हैं कि ज़िंदगी में हमेशा सब कुछ आसानी से नहीं मिलता है.”
अपने बचपन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “उस समय हरियाणा में कहां प्रतियोगिता थी. तब तो घर से ही नहीं निकलने देते थे. इसलिए तो भाग गई घर से हीरोइन बनने के लिए.”
मल्लिका मानती हैं कि थोड़ी बहुत प्रतियोगिता होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “प्रतियोगिता होनी चाहिए तभी सब लोग सतर्क रहते हैं. नहीं तो हम ऐक्टर्स की आदत होती है कि हम आलसी हो जाते हैं. तो एक-दो ऐसे झटके तो लगने ही चाहिए. कभी फ़िल्म नहीं चले वो भी अच्छा है क्योंकि तब फिर से जोश आता है.”
मल्लिका ये भी मानती हैं कि बॉलीवुड में सब अपना ही वंश आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं.


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