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    लंदन में एशियाई फ़िल्मोत्सव का आग़ाज़

    By Staff
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    Tongues Onfire

    निष्ठा चुघ, लंदन से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

    बारहवाँ दक्षिण एशियाई फ़िल्मोत्सव शुक्रवार से लंदन में शुरु हो रहा है. 'टंग्स ऑन फ़ायर' नामक इस वार्षिक फ़िल्मोत्सव में इस वर्ष भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के अलावा पहली बार अफ़ग़ानिस्तान की एक फ़िल्म भी दिखाई जाएगी.

    ब्रिटेन में भारतीय प्रायद्वीप की फ़िल्मों और कलाकरों के प्रचार और प्रसार के लिए टंग्स ऑन फ़ायर 1999 से लंदन में इस फ़िल्मोत्सव का आयोजन कर रहा है. एक हफ़्ते तक चलने वाला फ़िल्मोत्सव इस साल बच्चन परिवार के लिए ख़ास महत्व रखता है.

    शुक्रवार शाम इसका उदघाटन कर रहे हैं अभिषेक बच्चन जिनके करियर की कई बेहतरीन फ़िल्में जैसे कि युवा, दोस्ताना, गुरू, पा आदि दिखाई जा रही हैं.वहीं उनकी मां जया बच्चन को पिछले चार दशकों में भारतीय सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए लाईफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाज़ा जाएगा.

    30 फ़िल्में दिखाई जाएंगी

    महोत्सव में कुल 30 फ़िल्में दिखाईं जा रहीं है जिसमें जया बच्चन की कोरा कागज़, गुड्डी, अभिमान, उपहार, हज़ार चौरासी की मां और ओम पुरी के साथ उनकी नई फ़िल्म लवसॉग्स को ख़ास तौर पर शामिल किया गया है. वहीं इस फ़ैस्टिवल में फ़िल्म निर्देशक श्याम बेनेगल एक कॉमेडी फ़िल्म लेकर आ रहे हैं. उनकी बहुचर्चित फ़िल्म वैल डन अब्बा समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक व्यंग्यात्मक नज़र है.

    महोत्सव में ऐसी पांच नई फ़िल्में शामिल हैं जिन्हे पहली बार प्रदर्शित किया जाएगा. इनमें से एक है मानवीय भावनाओं की कहानी कहती लाईफ़ गोज़ ऑन. इस फ़िल्म मे जानी मानी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर अपनी बेटी सोहा अली ख़ान के साथ नज़र आएंगी. मज़ेदार बात ये है कि इस फ़िल्म में भी दोनों अभिनेत्रियों ने मां बेटी का ही किरदार निभाया है.

    इस फ़िल्मोत्सव में जहां एक ओर मानवीय भावनाओं को टटोलती फ़िल्में देखने को मिलेंगी, वहीं आतंकवाद जैसे विषय पर बनाई गई फ़िल्म 'एन एक्ट ऑफ़ टैरर' और वृत्तचित्र 'मेड इन पाकिस्तान' को भी ख़ास जगह दी गई है.

    अनेक विषयों पर फ़िल्में

    एन एक्ट ऑफ़ टैरर की कहानी स्कॉटलैंड में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार के ईर्द गिर्द घूमती है जिसके बेटे को आतंकवादी होने के संदेह में गिरफ़्तार कर लिया जाता है. वहीं मेड इन पाकिस्तान नामक वृत्तचित्र कई पात्रों को एक ही धागे में पिरोता है. आंतकवाद के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान की विश्व भर में धूमिल होती छवि का वहाँ के शिक्षित और महत्वाकांक्षी युवाओं पर क्या असर पड़ रहा है, ये वृत्तचित्र उसी पर एक रौशनी डालता है. लेकिन इस महोत्सव में शायद सबसे विशेष प्रविष्टि है अफगानी फ़िल्म 'प्लेयिंग द तार'.

    अफ़ग़ानिस्तान की 26 वर्षीय महिला निर्दशक रोया सादत द्वारा निर्देशित ये फ़िल्म एक 17 साल की नाबालिग़ लड़की की कहानी पर आधारित है. फ़िल्म की मुख्य पात्र, जो अल्पसंख्यक तुर्कमान समुदाय में जन्मी एक कालीन बुनकर है, जिसी शादी उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ एक ऐसे व्यक्ति के साथ कर दी जाती है जो उससे उम्र में कहीं ज़्यादा बड़ा है और पहले से ही उसकी चार बीवियां हैं. शादी के बाद वो किन दर्दनाक परिस्थितियों से गुज़रती है, यही इस फ़िल्म का मर्म है. फ़िल्मों के प्रदर्शन के अलावा, महोत्सव के दौरान कई कार्यशालाएं और उभरते फ़िल्मकारों के लिए एक प्रतियोगिता भी आयोजित की गई है.

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