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    'एक-दूजे' वाले के बालचंदर हैं हर दिल अजीज

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    नई दिल्ली। फिल्म एक-दूजे से दक्षिंण से लेकर उत्तर भारत तक इतिहास रचने वाले मशहूर फिल्मकार के बालाचंदर को साल 2010 के दादा साहब फाल्के अवार्ड के चुना गया है जिसके बाद उनको बधाई देने वालों का तांता लग गया है, कमल हासन, करण निधि जैसे कई दिग्गजों ने इसके लिए के बालाचंदर को बधाई दी है। खुद इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए बालाचंदर ने कहा कि मुझे जब इस बात की जानकारी मिली तो मुझे समझ में ही नहीं आया कि मैं क्या करूं, खैर लोगों ने मुझे समझा, मेरे काम को सराहा और इस अवार्ड के लिए लायक बनाया इसके लिए मैं अपेन आप को गौरवान्वित महसूस करता हूं।

    गौरतलब है कि प्रसिद्ध फिल्मकार के. बालाचंदर को वर्ष 2010 का दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है।राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील उन्हें इसी वर्ष बाद में पुरस्कार प्रदान करेंगी। भारत सरकार द्वारा यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के संवर्धन और विकास में उल्लेखनीय योगदान करने के लिए दिया जाता है। पुरस्कार के रूप में एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये नकद और एक शॉल प्रदान किया जाता है। प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति की सिफारिशों पर यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

    के. बालाचंदर फिल्म निर्देशन, निर्माण और पटकथा लेखन से 45 वर्षो से भी अधिक समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने तमिल, तेलुगू, हिन्दी और कन्नड़ भाषाओं की 100 से भी अधिक फिल्मों का लेखन, निर्देशन और निर्माण किया है। बालाचंदर फिल्म निर्माण की अपनी अनोखी शैली के कारण जाने जाते हैं। वह जिन फिल्मों का लेखन और निर्माण करते हैं, उसमें असामान्य या जटिल अंतर-व्यक्तिगत सम्बंधों और सामाजिक विषयों का विश्लेषण होता है। बालचंदर में नवीन प्रतिभाओं को पहचानने की अद्भुत क्षमता है। आज के बहुत से सितारों को प्रसिद्धि दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसमें रजनीकांत, कमल हासन, प्रकाशराज और विवेक जैसे सितारे भी शामिल हैं।

    1981 में जब उनकी हिन्दी फिल्म एक दूजे के लिए रिलीज हुई थी, तब उनसे हिन्दी दर्शक वर्ग परिचित नहीं था। सुपरहिट तेलुगु फिल्म मारो चरित्र की हिन्दी रीमेक यह फिल्म अपने समय की ब्लॉक बस्टर हिट फिल्म थी जिसने तब दस करोड़ रुपये का व्यवसाय किया था। एक दूजे के लिए फिल्म की खासियत यह थी कि प्रति युवाओं की आसक्ति एक संवेदनशील आग्रह की तरह थी, जिसे बिना देखे रह पाना मुमकिन न था।

    तमिलनाडु के तंजावुर में जुलाई 1930 में जन्मे बालाचंदर को मेजर चंद्रकांत, सरवर सुंदरम, नानल और नीरकुमिझी जैसे अद्भुत नाटकों की वजह से एक नाटककार के रूप में प्रसिद्धि मिली। वह 1965 में फिल्म उद्योग में आए और नागेश अभिनीत अपनी पहली ही फिल्म नीरकुमिझी से ख्याति अर्जित कर ली। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में अपूर्वा रागागल, अवर्गल, 47 नटकल, सिंधु भैरवी, एक दूजे के लिए (हिन्दी), तेलुगू में रुद्रवीणा तथा कन्नड़ में अरालिदाहवू शामिल हैं। 1987 में उन्हें पद्मश्री प्रदान किया गया था और 1973 में तमिलनाडु सरकार द्वारा उन्हें कलाईममानी की उपाधि से सम्मानित किया गया था।

    English summary
    As soon as the news of veteran filmmaker K Balachander being conferred the Dada Sahib Phalke award broke out on Friday, his telephone is ringing non-stop and VIPs from various walks of lives are making a beeline at his house ion Chennai.
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