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    पिता के साथ अपनी अवाज खो दी जेपी दत्ता ने

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    फिल्मकार जेपी दत्ता अपने पिता ओपी दत्ता के निधन से बहुत दुखी हैं। बॉर्डर के निर्देशक जेपी ने कहा कि उनके पिता ने 2006 में आई उमराव जान तक उनकी हर फिल्म की पटकथा और संवाद लिखे थे। उन्होंने कहा कि पिता के जाने के साथ ही उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, मानो उन्होंने अपनी आवाज खो दी हो।

    जेपी ने कहा, मैंने अपनी आवाज खो दी। वह मेरी आत्मा थे। अब मैं जब फिल्म बनाऊंगा तो मेरे दिमाग में आने वाले शब्दों को कौन लिखेगा। लेखक और फिल्मकार ओपी दत्ता का गुरुवार रात निधन हो गया, वह 90 साल के थे।

    ओपी दत्ता ने भारत के विभाजन से पहले एक निर्देशक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की थी। बाद में 1985 में उनके बेटे जेपी दत्ता निर्देशक बने। तब ओपी ने फिल्मों की पटकथा और संवाद लिखने का निर्णय लिया।

    ओपी के निधन की घोषणा के बाद दत्ता आवास पर सबसे पहले पहुंचने वाली बॉलीवुड हस्ती अभिषेक बच्चन थे। जेपी की फिल्म रिफ्यूजी से अभिनय की शुरुआत करने वाले अभिषेक उन्हें अपने पिता की तरह मानते हैं। इस फिल्म के संवाद ओपी ने लिखे थे। अभिनेता सुनील शेट्टी भी दत्ता आवास पर शोक प्रकट करने के लिए पहुंचे थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक ओपी को बीते कुछ समय से शरीर में तेज दर्द की शिकायत थी।

    English summary
    Director JP Dutta says on death of his father OP Dutta that he lost his voice and his soul. Nos Who will write the words that come in his mind when.
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