आम आदमी की जिंदगी है भारतीय सिनेमा..

By अपर्णा रस्तोगी( रेडियो जॉकी)

हमने आपको अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे की नजर से बताया था कि सौ साल के सिनेमा को वह किस नजर से सोचती हैं। सोनाली ने कहा था कि सौ साल का सिनेमा एक पूरा युग है जिसे की वर्णित कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैं। यह सोच तो एक फिल्मी दुनिया के सिपाही की है लेकिन अब हम आपको बताते हैं एक आम आदमी की राय कि उसकी नजर में भारतीय सिनेमा क्या है?

लखनऊ शहर की रेडियो जॉकी अपर्णा रस्तोगी की नजर में भारतीय सिनेमा लोगों के दिलों में धड़कता है। अपर्णा लिखती हैं कि दादा साहब फाल्के ने जब 1913 में मूक फिल हरिश्चन्द्र बनायी होगी तो शायद कभी नहीं सोचा होगा की आने वाली सदी में उनकी इस कोशिश के पर लग जायेंगे, सुपर जेट विमान से लेकर देश और दुनिया के हर कोने से जुड़ जाएगा हिंदी सिनेमा।

हिंदी सिनेमा इंडस्ट्री ने ना केवल लोगों को देव आनंद साहब ,राज कपूर , अमिताभ बचन, राजेश खन्ना जैसे नामचीन चेहरे दिये हैं बल्कि लोगों की आंखों में सपने संजोने का मौका भी दिया है। अगर सिनेमा लोगों को सपने दिखाता है तो वहीं वह सपनों को पूरा करने का तरीका भी बताता हैं। जो बातें किताबों और अपनों के कहने से समझ में नहीं आती हैं वह सिल्वर स्क्रीन पर दिखने के बाद दिमाग में ऐसे घुस जाती है जिसे निकाल पाना असंभव हैं।

आईये आपको तस्वीरों के जरिये बताते हैं कि कैसे बना हिंदी सिनेमा लोगों के दिलों की धड़कन

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