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    'लाइफ आफ्टर डेथ' की शूटिंग हिसार में

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    हिसार । धरती पर एक खून की सजा भी फांसी है और चार खून की सजा भी फांसी। मगर हत्या करने वाले को अपनी मौत के बाद इन चारों खूनों की सजा अलग-अलग भुगतनी पड़ती है। उसने जिस-जिस जीव को दु:ख पहुंचाया है, उसका परिणाम मौत के बाद उसे झेलना पड़ता है। इस बात का अध्ययन स्पिरचूअल एकेडमी एंड रिसर्च सेंटर (सार्क) के 12 सदस्यीय टीम ने हालही में किया। इस टीम में हिसार के एक सदस्य डॉ. राजन कक्कड़ भी शामिल थे। वे इसी अध्ययन के आधार पर फिल्म इंडस्ट्रीज में पहचान बना चुके फिल्म निर्देशक मयंक श्रीवास्तव के साथ फिल्म 'लाइफ आफ्टर डेथ' बना रहे हैं।

    वे कल दोपहर बाद इस फिल्म के निर्देशक श्रीवास्तव और अपनी पूरी के टीम के साथ हिसार आए और 4 मार्च तक उनकी टीम हिसार में विभिन्न स्थानों पर इस फिल्म की शूटिंग करेगी। आज उन्होंने डाबड़ा चौक स्थित एक प्रोपर्टी की दुकान व बरवाला रोड स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान में शूटिंग की। इस फिल्म में मुख्य किरदार अभिनेता अर्जुन अनेजा 'रणजीत' के रूप में निभा रहे हैं। इस फिल्म में हीरो अजय अनेजा पिता की भूमिका हिसार के लोकेश मोहन खट्टर निभा रहे हैं, जिनका इस फिल्म में विक्रम नाम हैं।

    विशेष बातचीत के दौरान डॉ. राजन कक्कड़ ने बताया कि अपराध की तरफ बढ़ रही प्रवृति को रोकने में इस प्रकार की फिल्में बहुत महत्वपूर्ण हैं। 'लाइफ आफ्टर डेथ' विषय पर अध्ययन करने में उनके साथ 11 बुद्धिजीवी थे। इनमें दिल्ली के 4, महाराष्ट्र के 5, उत्तरप्रदेश के 2 और हरियाणा में हिसार से केवल वे थे। सार्क संगठन के साथ जुड़ी इस अध्ययन की टीम ने करीब दो साल काम किया। इसमें उन्होंने आध्यात्मिक जीवन शैली से जुड़े लोगों, उनके अनुभवों और तथ्यों को अपने देश व

    देश के बाहर से एकत्र किया। ऐसे लोगों से भी बातचीत की, जिन्होंने इस विषय पर पहले ही अध्ययन किया है। डॉ. कक्कड़ ने बताया कि उनके अध्ययन का यही निष्कर्ष निकला कि इंसान की मृत्यु के बाद भी एक सुंदर जीवन होता है, जिसका इस दुनिया में बहुत महत्व है। उस जीवन को अगर व्यक्ति अपने मानव जीवन में समझ जाए तो वह अपराधों की दुनिया में कभी प्रवेश नहीं करेगा। और यह सजा किस प्रकार की होती है, यही इस फिल्म का मूल सार है।

    उन्होंने कहा कि यह फिल्म धार्मिक नहीं है। इस फिल्म में एनिमेशन और फिक्शन के साथ रोचक बनाया जा रहा है। इस फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य भी हैं, जिसे देखने वाले को क्षणिक डर भी लग सकता है। मगर ऐसे दृश्य के साथ रोमांच का मिश्रण

    उस दृश्य को और अच्छा बना देता है। फिल्म में अजीब से चेहरे और इंसान की सोच व अनुभवों से हटकर स्थिति दिखाई गई है। उन्होंने बताया कि फिल्म में मौत के बाद के जीवन में इंसान को पहले नरक के द्वार को जरूर पार करना दिखाया है। यहीं उसे पता चलता है कि अंजाने में उसने कितनों को दुख पहुंचाया है, जिसकी परिभाषा धरती पर अपराध नहीं है, मगर मौत के बाद के जीवन वह बड़ा अपराध होता है और वह उसे भुगतना पड़ता है। फिलहाल मंयक चौथरी जी टीवी पर दिखाए जाने वाले नाटक 'चाहत और नफरत' पर, एक फिल्म 'इतना तो चलता है भाई' का निर्देशन कर रहे हैं। इसके अलावा विनय सिन्हा और सुरेन श्रीवास्तव के साथ भी दो फिल्मों का निर्देशन कर रहे हैं। इन दो फिल्मों का नाम भी रखा गया है।

    English summary
    Film life after Death shoot in Hisar Haryana, Tommorrow.
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