खुशकिस्मत हूं कि सिनेमा के बेहतरीन दौर का हिस्सा हूं: फारूख शेख

फारूख खुद के एक सिने अभिनेता से अच्छा थियेटर कलाकार मानते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी अभिनेता आजीवन रंगमंच कलाकार रहकर भी एक सम्मानित जिंदगी बिता सकता है। एक रंगमंच कलाकार के रूप में मेरा मानना है कि यह प्रेम का श्रम है। आज काफी चीजें बदल चुकी हैं और पहले का दौर अब नहीं रहा। आज कोई अभिनेता एक पूर्वकालिक
रंगमंच कलाकार के रूप में काम कर सकता है और सम्मानित जिंदगी जी सकता है। मुझे लगता है कि आखिरकार सकारात्मक बदलाव आ रहा है।"
फारूख 30 सालों से सिनेमा जगत में काम कर रहे हैं। उन्होंने 'नूरी' 'साथ-साथ' 'उमराव जान' 'बाजार' 'कथा' और 'बीवी हो तो ऐसी' फिल्मों में काम किया है। उन्होंने कहा कि सिनेमा इस समय अपने सबसे अच्छे दौर में है।
मालूम हो कि इससे पहले फारूख शेख ने कहा था कि उन्हें सही रूप से हिंदी सिनेमा के लोगों ने नहीं लिया नहीं तो आज उनका करियर नासिरूद्दीन शाह से बढि़या होता। उन्हें जितनी इज्जत बॉलीवुड में मिली उससे कहीं ज्यादा के वह हकदार थे।


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