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#ClearHai: ना अक्षय से दिक्कत है ना ही रूस्तम से...लेकिन जो गलत है वो गलत है!

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तीन दिनों से जो बहस चल रही है उससे एक बात तो तय है कि अक्षय कुमार को रूस्तम के लिए नेशनल अवार्ड नहीं मिलना चाहिए। यहां तक कि उन्हें ये अवार्ड देकर प्रियदर्शन ने उनकी सारी कमाई हुई इज़्जत मिट्टी में मिला दी।

तीन दिन से अक्षय कुमार चुटकुलों का केंद्र बने हुए हैं, वहीं उनके फैन्स उनकी इज्जत बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। लेकिन इन सबके बीच प्रियदर्शन को अलीगढ़ डायरेक्टर हंसल मेहता ने कुछ समझाने की कोशिश की है जो सबको समझना बहुत ज़रूरी है।

दरअसल, प्रियदर्शन सबके सवालों से उकता चुके हैं और उन्होंने कहा कि इस साल बहुत सी फिल्मों का केंद्र समलैंगिक संबंध थे। जबकि सामाजिक मुद्दों पर एक से एक फिल्म बनी हैं। ऐसे में उन गंभीर मुद्दों को छोड़कर किसी और फिल्म को कैसे अवार्ड दे देते।

[#Shock: अक्षय कुमार की इज़्जत बचाते बचाते...कौड़ी के भाव धुल गए!]

अब यहां दो बातें हैं। एक तो प्रियदर्शन की सामाजिक मुद्दों की समझ और दूसरी बेहतरीन सिनेमा की समझ। रूस्तम को नेशनल अवार्ड देना उनके सिनेमा की समझ को बताता है और समलैंगिक मुद्दों को सामाजिक समस्या ना समझना उनके ज्ञान के अभाव को समझाता है।

[अक्षय कुमार के खास दोस्त ने किया एलान...FOUL है नेशनल अवार्ड!]

बस इसी बात से क्षुब्ध होकर अलीगढ़ के डायरेक्टर हंसल मेहता ने साफ किया कि उन्हें किसी भी फिल्म से कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन समलैंगिकों के अधिकार को इस तरह नकार देना, उससे काफी दिक्कत है।

जानिए इस साल नेशनल अवार्ड में किन किन फिल्मों को कर दिया गया इग्नोर -

उड़ता पंजाब

उड़ता पंजाब

अब ज़ाहिर सी बात है कि बीजेपी ने इतना विरोध किया। पंजाब ने इतना विरोध किया तो फिल्म को पुरस्कारों से दूर ही रखा जाना था।

अलीगढ़

अलीगढ़

अलीगढ़ को राष्ट्रीय पुरस्कारों से बिल्कुल दूर रखा गया है क्योंकि प्रियदर्शन की मानें तो फिल्म में कोई सामाजिक मुद्दा नहीं था।

फैन

फैन

अगर कंगना रनौत को दत्तो के लिए अवार्ड मिल सकता है तो शाहरूख खान को क्यों नहीं?

सरबजीत

सरबजीत

रणदीप हुडा को सरबजीत के लिए बिल्कुल ही इग्नोर कर दिया गया!

पार्च्ड

पार्च्ड

फिल्म को इंटरनेशनल अवार्ड्स मिले पर हमारे यहां फिल्म को ना दर्शक मिले ना ही पुरस्कार।

फोबिया

फोबिया

फिल्म में भले ही कमियां थी लेकिन राधिका आप्टे के अभिनय में कहीं से भी नहीं।

निल बटे सन्नाटा

निल बटे सन्नाटा

एक सादी सी, शानदार फिल्म जो पूरी तरह से इग्नोर कर दी गई।

दंगल

दंगल

अब क्या ही कहा जाए जब प्रियदर्शन को फिल्म में सामाजिक मुद्दा नहीं दिखा था।

नीरजा

नीरजा

नीरजा बेस्ट हिंदी फिल्म का अवार्ड भले ही मिला लेकिन एक्ट्रेस की कैटेगरी में केवल एक कड़ी टक्कर थी ऐश्वर्या राय, ये बात हज़म नहीं हुई। वहीं शबाना आज़मी को भी इग्नोर कर दिया गया।

नटसम्राट

नटसम्राट

फिल्म भले ही मराठी में थी लेकिन शायद ही कोई होगा जिसने नाना पाटेकर की ये शानदार फिल्म नहीं देखी होगी!

English summary
Hansal Mehta disappointed over Priyadarshan's diregard of Aligarh's homosexuality.

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