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गुरू दत्त B'day Special: बॉलीवुड का सबसे उदास सुपरस्टार, तीन बार की सुसाइड की कोशिश

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ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनिया, ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनिया, ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है। आज तक ये गाना हर किसी की ज़ुबान पर गाहे बगाहे आ ही जाता है। या फिर दिल जलता है तो जलने दे, आंसू ना बहा, फरियाद ना कर। इतने दर्द भरे गीतों के पीछे एक आदमी का दर्द था जिसे बॉलीवुड ने अपनी आंखों से देखा था और महसूस किया था।

वो था गुरू दत्त का दर्द। शायद भारतीय सिनेमा में अब तक के बेहतरीन निर्दशकों की गिनती की जाए तो उनका नाम टॉप 10 में होगा। आज गुरू दत्त का जन्मदिन है। गुरू दत्त के दर्द भरे नगमे आज भी सुनो तो एक टीस सी उठ जाती है। तो सोचिए कि उस आदमी के जीवन में कितना दर्द रहा होगा।

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शायद यही कारण था कि गुरूदत्त ने दो बार सुसाइड की असफल कोशिशें की लेकिन फिर एक बार तीसरी बार में वो कामयाब हो गए। हालांकि उनका जीवन, शराब के नशे में वैसे भी डूब चुका था। नींद की गोलियां, उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का बेशुमार हिस्सा थीं। 
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एक रात वो अपने कमरे में बेजान पाए गए। शायद शराब और नींद की गोलियाों का ओवरडोज़ था या फिर उन्होंने जानकर ज़्यादा दवाएं निगलीं ये किसी को नहीं पता। लेकिन उनका दर्द आज भी उनकी फिल्मों में और उन फिल्मों के गीतों में झलकता है। 

आपको बताते हैं गुरू दत्त से जुड़ी कुछ बातें -

सबसे बेहतरीन निर्देशक

सबसे बेहतरीन निर्देशक

बॉलीवुड में गुरुदत्त वर्ष 1944 से 1964 तक सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने कई बेहतरीन फिल्में दीं। कुछ फिल्मों में खुद अभिनय भी किया, जबकि कुछ का केवल निर्देशन किया।एक सर्वेक्षण के मुताबिक, उन्हें सिनेमा के 100 सालों में सबसे बेहतरीन निर्देशक माना गया। पत्रिका टाइम के अनुसार, गुरुदत्त के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्यासा' दुनिया की 100 बेहतरीन फिल्मों में से एक है।

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर

बेहद ही खूबसूरत शख्सियत के मालिक गुरूदत्त की लाइफ का एक कड़वा सच यह भी है कि वो अभीनेत्री वहीदा रहमान से बेइंतहा मोहब्बत भी करते थे। ऐसा कहा जाता है कि वहीदा और गुरूदत्त एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे लेकिन गुरूदत्त शादी-शुदा थे। गुरूदत्त की पत्नी और मशहूर गायिका गीता दत्त को उनके और अभिनेत्री वहीदा रहमान के रिश्ते पर एतराज था। इसलिए उनका दांपत्य जीवन काफी खराब रहा।

मौत से नहीं उठा परदा

मौत से नहीं उठा परदा

दोनों में काफी झगड़े होते थे जो कि गुरूदत्त की परेशानी का बहुत बड़ा कारण था। और यही नहीं प्यासा, साहब बीवी और गुलाम, चौदहवीं का चांद जैसी सिने जगत की बेहतरीन फिल्मों के हीरो गुरूदत्त उस समय दिवालिया हो गये जिस समय उनकी फिल्म 'कागज के फूल' फ्लॉप हो गयी। इस प्रहार से गुरूदत्त काफी टूट गये थे और गीता दत्त की वजह से वहीदा को भी वो प्रेमिका के रूप में अपना नहीं पाये जिसके चलते उन्होंने असमय मौत को गले लगा लिया था। हालांकि आज पचास साल बाद भी इस गुरूदत्त की मौत पर से पर्दा उठा नहीं है।

शानदार डांसर भी

शानदार डांसर भी

गुरुदत्त के बारे में यह बात कम ही लोग जानते हैं कि वह अच्छे नर्तक भी थे। उन्होंने प्रभात फिल्म्स में एक कोरियोग्राफर की हैसियत से अपने फिल्मी जीवन का आगाज किया था। वह लेखक भी थे। उन्होंने कई कहानियां लिखी थीं, जो अंग्रेजी पत्रिका 'इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया' में छपीं।

अक्खड़, शरारती और ज़िद्दी

अक्खड़, शरारती और ज़िद्दी

गुरुदत्त के पिता का नाम शिवशंकर राव पादुकोण था। मां वसंती पादुकोण की नजर में गुरुदत्त बचपन से ही बहुत नटखट और जिद्दी थे। सवाल पूछते रहना उसका स्वभाव था। कभी-कभी उनके सवालों का जवाब देते-देते मां परेशान हो जाती थीं। उनकी मां ने एक साक्षात्कार में कहा था, "वह किसी की बात नहीं मानता था। हमेशा अपने मन की करता था। बहुत गुस्सैल भी था।"

गीता दत्त से शादी

गीता दत्त से शादी

उन्होंने गायिका गीता दत्त से सन् 1953 में विवाह किया। 'प्यासा' और 'कागज के फूल' जैसी क्लासिक फिल्मों के निर्माता गुरुदत्त के बेटे अरुण दत्त कहते हैं कि वह अक्सर चुप और गंभीर रहते थे। लेकिन उनका मन हमेशा एक बच्चे जैसा था। वह पतंग उड़ाते, मछली पकड़ते और फोटोग्राफी भी करते थे। गुरुदत्त को खेती करना भी काफी सुहाता था।

सफलता का परचम

सफलता का परचम

उनकी पहली फीचर फिल्म 'बाजी' (1951) देवानंद की नवकेतन फिल्म्स के बैनर तले बनी थी। इसके बाद दूसरी सफल फिल्म 'जाल' (1952) बनी, जिसमें वही सितारे (देवानंद और गीता बाली) शामिल थे। इसके बाद गुरुदत्त ने 'बाज' (1953) फिल्म के निर्माण के लिए अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। उनकी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ रूप उत्कट भावुकतापूर्ण फिल्मों में ही प्रदर्शित हुआ।

'प्यासा' (1957), 'कागज के फूल' (1959) और 'साहब, बीबी और गुलाम' (1962)

'प्यासा' (1957), 'कागज के फूल' (1959) और 'साहब, बीबी और गुलाम' (1962)

गहरे चिंतन से भरी उनकी तीन बेहतरीन फिल्में हैं- 'प्यासा' (1957), 'कागज के फूल' (1959) और 'साहब, बीबी और गुलाम' (1962)। हालांकि 'साहब, बीबी और गुलाम' का श्रेय उनके सह पटकथा लेखक अबरार अल्वी को दिया जाता है, लेकिन यह मूल रूप में यह गुरुदत्त की कृति थी।

हिंदी सिनेमा को वहीदा जैसी अभिनेत्री दी

हिंदी सिनेमा को वहीदा जैसी अभिनेत्री दी

गुरुदत्त ने 'सीआईडी' में वहीदा रहमान को लिया और हिंदी फिल्म जगत को एक प्रतिभावान अभिनेत्री दी। 'प्यासा' व 'कागज के फूल' जैसी फिल्मों ने वहीदा को कीर्तिस्तंभ की तरह स्थापित कर दिया।

आत्महत्या कर ली..

आत्महत्या कर ली..

कहा जाता है, शराब की लत से लंबे समय तक जूझने के बाद 1964 में उन्होंने आत्महत्या कर ली। गुरुदत्त 10 अक्टूबर, 1964 को मुंबई में अपने बिस्तर पर रहस्यमय स्थिति में मृत पाए गए।

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    English summary
    Guru Dutt Birthday special - the man who is countesd as one the finest film makers of this country but died a dissatisfied soul!

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