500 रूपये में लड़कियों के हुस्न को निखारते थे जाफर..
भले ही उनकी फिल्में बॉक्सऑफिस पर चले ना चलें लेकिन लोग उन्हें पसंद करते हैं तभी तो उन्हें धड़ाधड़ हिंदी फिल्में मिल रही हैं। हाल ही में एक न्यूज वेबसाइट से बात करते हुए अली जाफर ने अपनी जिंदगी के कुछ खास पहलुओं को लोगों से शेयर किया।
मैं एक से एक बला की खूबसूरत पाकिस्तानी सुंदरियों के हुस्न को कागज पर उतारता था
अली जाफर ने कहा कि आज से करीब 12-13 साल पहले जब मेरी उम्र 17-18 साल थी तो मैं लाहौर में स्केच बनाने का काम करता था। जिसके लिए मुझे 500 रूपये मिलते थे। लेकिन मजे की बात यह थी कि इस काम के लिए मेरे पास पाकिस्तानी कुड़ियां थोक में आती हैं।
अली ने कहा कि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस उम्र में मेरा क्या हाल होता होगा जब मैं एक से एक बला की खूबसूरत पाकिस्तानी सुंदरियों के हुस्न को कागज पर उतारता था.. अली ने कहा कि सच में क्या दिन थे वो..रीयली इट्स वास अमेंजिग।
उन स्केच के लिए मिले 500 रूपये मेरे लिए काफी अमूल्य हैं। अली ने कहा कि बाली उम्र की उस अल्हड़पन को जब मैं आज याद करता हूं सच बताऊ काफी हंसी आती है। अली ने यह भी कहा कि लेकिन कुछ सालों बाद मुझे समझ में आ गया कि मेरा करियर सिंगिग में ही बेहतर है और मैं उसमें लग गया और गायिकी और एक्टिंग में व्यस्त मेरे हाथ से स्केच औऱ पेपर कब छूट गये पता ही नहीं चला।
गौरतलब है कि अली जाफर को 'तेरे बिन लादेन', 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' 'चश्मे बद्दूर' और 'टोटल सियापा' जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।


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