हिन्‍दी फिल्‍मों पर अंग्रेजी तड़का

By रंजना वर्मा

The Dirty Picture
द डर्टी पिक्चर, रॉकस्टार, रास्कल, रेस, रेडी, वेक अप सिड, काइट्स, बॉडीगार्ड, ये सारे नाम हिन्‍दी फिल्मों के नाम हैं अगर इन फिल्मों में कोई समानता खोजे तो एक बात नज़र आती है कि ये सारे नाम अंग्रेजी में हैं। सही मायने में देखा जाये तो बॉलीवुड का यह फंडा हिन्‍दी फिल्‍मों पर अंग्रेजी तड़का है, जिसमें 80 प्रतिशत तक सफलता मिल ही जाती है।

एक समय था जब एक फिल्‍म 13 सप्‍ताह चल जाये तो उसे हिट कहा जाता था, 25 पर सिल्‍वर, 50 पर गोल्‍डेन जुबली होती थीं, लेकिन आज फिल्‍म के हिट कराने का एक ही फंडा है वो है पैसा। जिसने जितना पैसा कमाया वो उतनी हिट, फिर वो चाहे विदेश में कमाये या भारत में। यही कारण है कि अब ज्‍यादातर निर्देशक अपनी फिल्‍मों के नाम हिन्‍दी के बजाये अंग्रेजी में रखने लगे हैं।

अंग्रेजी में नाम वाली अधिकांश फिल्‍में वही होती हैं, जिनका पद्रर्शन जापान से लेकर लंदन व अमेरिका तक हो। जाहिर है अप्रवासी भारतीय यानी एनआरआई के लिए हिन्‍दी फिल्‍मों में अंग्रेजी तड़का काफी कारगर साबित हो सकता है। यह सबसे बड़ा कारण है, फिल्‍मों में अंग्रेजी नामों के बढ़ते चलन का। इसमें सबसे बड़ा उदाहरण काइट्स।

दूसरा सबसे बड़ा कारण है 'डायरेक्‍ट हिट टू हार्ट'। फैशन, नो वन किल्ड जेसिका, वांटेड, माई नेम इज़ खान, 3 इडियट्स, बॉडीगार्ड ये कुछ ऐसी फिल्में हैं जिनके नाम से ही दर्शकों में एक आकर्षण जागता है। खास बात यह भी की इनके भी नाम इंग्लिश के ही शब्दों पर रखें गये हैं। अब मैं अपनी बात रखने जा रही हूं कि क्या हिंदी फिल्मों के नाम इंग्लिश में होने से दर्शकों के बीच आसानी से संदेश पहुंचता है।

वैसे फिल्मों में हर दौर पर प्रयोग होते रहें हैं इसे भी एक प्रयोग के तौर पर लिया जा सकता है। आज कल फिल्में यूथ को ध्यान में रख कर बनायी जाती हैं हैं ऐसे में फिल्म प्रड्यूसरों के मन में एक ही बात रहती है कि किस तरह वह संक्षेप में फिल्म के सार को समझा दे अगर जॉन अब्राहम की फिल्म 'नो स्मोकिंग' फिल्म का नाम ही फिल्म के सार को समझा देती है।

वहीं अगर हम फिल्म को वैश्विक तौर पर लें तो अंग्रेजी नाम के पिछे एक और कारण हो सकता है ग्लोबल अपील का। हिन्द सिनेमा की पहुंच भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक भी है। फिल्म का नाम इंग्लिश में रखे जाने से फिल्म आसानी से विदेश के दर्शकों तक भी पहुंचती है। ताकि विदेश में रह रहें भारतीय भी ऐसी देसी फिल्मों का मजा ले सकें। रितिक रौशन की फिल्म काईट्स की बात करें तो यह विदेश में दर्शक बटोरने में कामयाब रही। इस फिल्म के कामयाब होने का एक कारण यह भी था कि इसमें भाषा का भी प्रयोग किया गया था।

दर्शकों के वर्ग में एक वर्ग और है जो महज नाम और फिल्म के कलाकारों के नाम सुनकर भी फिल्म देखना पसंद करता है इसका उदाहरण अभी बॉक्स ऑफिस पर आई फिल्म बॉडीगार्ड है जिसमें दमदार सलमान को लिया गया था। हालांकि फिल्म समीक्षकों की नज़र में तो नहीं उतर पाई लेकिन सलमान ने फिल्म को हिट करा दिया। आज के इस ट्रेंड को देखते हुए इतना तो कहा जा सकता है कि हिन्‍दी फिल्मों को विदेशी नाम आगे भी दिये जाएगें क्योंकि हिन्दी सिनेमा ने अपने पंख फैला दिये हैं और यह अब विदेशों में भी धुम मचा रही है।

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