आज समझ में आयी मधुशाला : अमिताभ बच्चन
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अयोध्या फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मेरे पिता हरिवंश राय बच्चन ने 1935 में मधुशाला लिखी थी, जिसकी पंक्तियां है
'मुसलमान और हिन्दू हैं दो , एक मगर उनका प्याला ,
एक मगर उनका मदिरालय , एक मगर उनकी हाला .
दोनों रहेते एक न जब तक , मंदिर मस्जिद में जाते ,
बैर बढ़ाते मंदिर मस्जिद , मेल कराती मधुशाला !
का मतलब आज मुझे समझ आया है। आज से 75 साल पहले लिखी इस किताब की लाइनें आज के परिवेश में एक दम सटीक है।
जिस तरह से लोगों ने अयोध्या फैसले का स्वागत किया है उससे यही साबित होता है कि लोग आज विवादों और हिंसा से दूर रहना चाहते हैं। आज हम एक है, चाहे लोग मंदिर की बात करें या फिर मसजिद की, सबसे पहले लोग ये समझते हैं कि वो एक हिंदुस्तानी हैं, और सब एकही धागे में बंधे हुए हैं। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि भारत आज एक है।
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