अपने दादा के अवतार हैं अमिताभ बच्चन!

भोपाल के ओरियंटल कॉलेज में मधुशाला पर आयोजित एक काव्य संध्या में अमिताभ बच्चन अपने जीवन की यादों में खो गए। मधुशाला की पंक्तियां सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक दिन उनके पिता के सपने में उनके दादा प्रताप नारायण आये और बोले, "मैं अपने जीवन में तुम्हारी कमी महसूस कर रहा हूं, इसलिए मैं वापस आ रहा हूं। उठो, अब उठ भी जाओ।" हरविंश राय की जैसे ही आंख खुली तो देखा उनकी पत्नी बेड पर नहीं हैं, वो गर्भ की पीड़ा के कारण जमीन पर गिर गई हैं। वे उन्हें तुरंत अस्पताल ले गये। उस दिन 11 अक्तूबर, 1942 थी। और मैं उसी दिन पैदा हुआ। अमिताभ ने कहा कि इसीलिए वो पुनर्जन्म पर विश्वास करते हैं।
अमिताभ ने कहा कि लोग कहते हैं कि कायस्थ शराब पीने के लिए ही जाने जाते हैं। जबकि मेरे पिता ने कभी शराब नहीं पी। जरा सोचिए बिना शराब के मधुशाला कैसे लिखी। असल में यही उनकी बेहतरीन सोच का उदाहरण है। वे कहा करते थे, "मैं कायस्थ हूं फिर भी शराब नहीं पीता, लेकिन मेरे पूर्वज शराब पीते थे और उन्हीं का खून मेरे शरीर में दौड़ रहा है, लिहाजा मेरे खून में भी 60 प्रतिशत अल्कोहल (मदिरा) है। इसलिए मधुशाला लिखने का मुझे पूरा अधिकार है।" अमिताभ ने कहा कि मधुशाला सिर्फ एक कविता नहीं है, वो एक पूरा जीवन है।
गौरतलब है कि अमिताभ इन दिनों प्रकाश झा की फिल्म आरक्षण की शूटिंग के लिए भोपाल में हैं। हालांकि भोपाल में उनका ससुराल भी है। उसी के चलते वे एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता आये थे।


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