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CONGRATS: तीन सुपरस्टार्स को एक साथ मिला ये अवार्ड, देखिए तस्वीरें

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ऐश्वर्या राय बच्चन के लिए ये साल काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। एक तरफ उन्होंने सरबजीत जैसी फिल्म कर सबकी तालियां बटोरीं तो दूसरी तरफ ऐ दिल है मुश्किल कर सबके होश उड़ा दिए।

अब ऐश्वर्या राय को उनकी फिल्म सरबजीत में सरबजीत की बहन दलबीर कौर का किरदार निभाने के लिए दादा साहेब फाल्के अवार्ड मिला। ऐश्वर्या राय के साथ पिंक एक्ट्रेस कीर्ति कुल्हारी और हेमा मालिनी को भी ये अवार्ड मिला।

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गौरतलब है कि निजी जीवन में भी ऐश्वर्या राय ने इस साल काफी उतार चढ़ाव देखे। एक तरफ उन्होंने अभिषेक बच्चन के साथ शादी के दस साल पूरे किए तो वहीं उनके पिता के निधन से पूरा परिवार शोक में डूब गया।

वहीं दूसरी तरफ अफवाहों की बात करें तो ऐश्वर्या राय और रणबीर कपूर के इस हॉट फोटोशूट ने बच्चन परिवार को काफी नाराज़ कर दिया। उन्हें बेशर्म तक कह दिया गया! तो दूसरी तरफ अभिषेक बच्चन ने भी उन्हें सरेआम इंसल्ट कर दिया।

बहरहाल, अंत में साल खत्म होते ही ऐश्वर्या राय के लिए ये अवार्ड एक अच्छी खबर की तरह है। ऐश्वर्या राय ने अवार्ड लेने के बाद कैमरे के सामने पोज़ किया और वो बेहद खूबसूरत लग रही थीं।

वैसे अगर आपने सरबजीत नहीं देखी है तो उसकी दिल दहला देने वाली कहानी ज़रुर जान लीजिए -
 

पंजाब का नौजवान

पंजाब का नौजवान

तरनतारन के एक गांव का रहने वाला एक बिल्कुल साधारण परिवार जो बाकी पंजाबियों की तरह खेती और नौकरी में विश्वास करता हो उस परिवार का एक 26 साल का लड़का जिसकी शादी होती है और दो बेटियों के साथ उनकी अच्छी जिंदगी चल रही होती है।

और एक गलती

और एक गलती

तरनातारन के भीखीविंद गांव से पाकिस्तान बॉर्डर ज्यादा दूर नहीं है। 90 के समय बॉर्डर पर फेंसिंग और तार नहीं लगे होते थे।सरबजीत सिंह नशे में गलती से भारत का बॉर्डर लांघकर पाकिस्तान पहुंच गए।

और फिर..

और फिर..

सरबजीत सिंह के गांव भीखीविंद से पाकिस्तान का बॉर्ड महज 13 किमी दूर है और उस समय कई बार भारत और पाकिस्तान के नागरिक भूले भटके सीमा पार कर जाते थे और कई बार उन्हें उसी समय छोड़ भी दिया जाता थाऔर आज भी भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर पर ये आम बात है। लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ। सीमा पर तैनात एक कर्नल ने सरबजीत सिंह को रॉ एजेंट मानकर केस चलाया गया।

सबसे बड़ा सवाल

सबसे बड़ा सवाल

पाकिस्तान की न्यायपालिका भी भारत की तरह ही है लेकिन वहां आर्मी सियासी दखल दे सकती है। सरबजीत सिंह के मामले में कई फर्जीवाड़े भी किए गए जैसे उनके पासपोर्ट पर उनका नाम खुशी मोहम्मद था और तस्वीर उनकी ही थी और पाक उन्हें मंजीत सिंह कहता था जो असल में धमाकों का आरोपी था।

मंजीत सिंह कहानी

मंजीत सिंह कहानी

मंजीत सिंह असल में तो था जो धमाको का आरोपी था लेकिन सरबजीत सिंह को मंजीत सिंह बनाया गया। काफी समय तक पाक मीडिया भी उन्हें मंजीत सिंह कहती थी। न्यूज रिर्पोट्स की माने तो असल मंजीत सिंह उस समय भारत-पाकिस्तान नहीं बल्कि तीसरे देश में था।इधर 2005 में

2005 में वीडियो

2005 में वीडियो

2005 में एक वीडियो जारी किया गया जिसमें ये कहा गया कि सरबजीत सिंह ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है लेकिन बाद में पता चला कि दबाब डालकर उनसे जुर्म कबुल करवाया गया।

2008 में फिर फांसी

2008 में फिर फांसी

2008 में आखिरकार फिर फांसी की तारीख तय की गई।भारत के तमाम कूटनीतिक प्रयास के बाद फांसी को रोका गया।सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने भाई वापस लाने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया। वो भरोसा में नहीं एक्सन में विश्वास करती थी।आपको शायद पता नहीं हो लेकिन 1990 में जब नरसिम्हा राव ने उनसे फोन पर बात की तो वो तभी फोन रखी जब पीएम उनसे सीधे मिलने के लिए राजी हुए। 23 सालों में वो खुद पर्सनली 170 से भी ज्यादा भारत -पाक के नेताओं से मिलीं।

दलबीर कौर की मेहनत

दलबीर कौर की मेहनत

2008 में दलबीर कौर ने अपने दम पर इतने दमदार तरीके से सरकार तक बात पहुंचाई की 2008 में सरबजीत सिंह की फांसी रोकनी पड़ा।तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद मामले में हस्तक्षेप किया। दलबीर कौर के बारे में संसद में भी कहा गया कि वो पंजाबी शेरनी हैं तो उनके जज्बे की तारीफ पाकिस्तान तक में की गई। फिल्म में ऐश्वर्या राय दलबीर कौर का ही किरदार निभा रही हैं।

जेल की प्रताड़ना

जेल की प्रताड़ना

अपने वकील को लिखे एक चिट्ठी में सरबजीत ने अपना दर्द लिखा कि उन्हें जेल में बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता है।सभी उन्हें शक की निगाहों से देखते हैं और पाकिस्तान पुलिस भी उनके साथ जेल में बहुत ही अमानवीय सलूक करती है।

रिहाई की अफवाह

रिहाई की अफवाह

2012 में यह खबरें भी आई थी की सरबजीत सिंह को रिहा किया जाएगा लेकिन बाद में पता चला कि पाकिस्तान सरकार सरबजीत सिंह नहीं सुरजीत सिंह को रिहा कर रही है।

2013 में मृत्यु

2013 में मृत्यु

26 अप्रैल 2013 को सरबजीत सिंह पर जेल में कुछ कैदियों ने लोहे की रॉड,ईंट, सलाखों से हमला किया जिसके बाद उन्हें जेल ले जाया गया और उनकी मौत हो गई लेकिन एक सवाल रह गया..

मौत पर सवाल

मौत पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरबजीत सिंह की मौत हुई या यह एक साजिश थी क्योंकि जेल में कैदियों के पास ईंट, सलाखें और रॉड कहां से आए और तो और उन्हे कैदी इतनी देर तक पीटते रहे की उनकी मौत हो गई और तब जेल में पुलिस कहां थी।

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    English summary
    Aishwarya Rai bachchan and Hema Malini recieve Dada Saheb Phalke awards.

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