For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    यश चोपड़ा का 88वां जन्मदिन - शुरु हुआ यशराज फिल्म्स के 50 सालों का जश्न, देखिए नया लोगो

    |

    आदित्य चोपड़ा ने यशराज फिल्म्स के एक नए, विशेष लोगो का अनावरण किया है, जो देश के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउस के 50 साल जश्न की शुरुआत का उद्घोष करता है! नया लोगो YRF की भव्य और दिव्य यात्रा को दर्शाता है, जो कि देश का पहला और इकलौता एकीकृत स्टूडियो है। यह विरासती कंपनी YRF के इतिहास को समेटे हुए है, जिसने पिछले 50 सालों के बड़े से बड़े सुपरस्टार्स के साथ काम किया है और भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है।

    आदित्य चोपड़ा ने विशेष लोगो को आज लोगों के सामने पेश किया, जो उनके महान पिता स्वर्गीय यश चोपड़ा की 88वीं जयंती का दिन है। 50 सालों के जश्न की जोरदार और तेज शुरुआत करने के लिए आदित्य द्वारा कुछ समय पहले जारी दिल को छू लेने वाला एक पत्र लिखा।

    इस पत्र में उन्होंने कहा, “सन्‌ 1970 में मेरे पिताजी यश चोपड़ा ने अपने भाई का दिया वरदहस्त और ऐशोआराम त्याग कर अपनी खुद की कंपनी खड़ी की थी। उस वक्त तक वह एक वेतनभोगी कर्मचारी हुआ करते थे और अपना खुद का कहने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं था। उन्हें पता नहीं था कि कोई बिजनेस कैसे चलाया जाता है और कंपनी बनाने के लिए किन-किन चीजों से गुजरना पड़ता है, इसका उन्हें बुनियादी ज्ञान तक नहीं था। उनके पास मात्र अपने टैलेंट पर भरोसा और कड़ी मेहनत की पूंजी थी, साथ ही साथ अपने पैरों पर खड़े होने का सपना भी उनकी आंखों में तैर रहा था। एक रचनात्मक व्यक्ति द्वारा खुद और अपनी कला को छोड़कर किसी और चीज के भरोसे न रहने वाले दृढ़ विश्वास ने यशराज फिल्म्स को जन्म दिया।“

    कारोबारी मामलों एवं वाईआरएफ स्टूडियो के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अक्षय विधानी कहते हैं, “यह विशेष लोगो नॉस्टैल्जिया, वाईआरएफ के इतिहास और इसके सिनेमाई सफर के उल्लेखनीय पलों को खुद में समेटे हुए है। इसके अलावा यह लोगो भारत और भारतीयों के लिए पॉप कल्चर को आकार देने वाली अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के माध्यम से इंडियन फिल्म इंडस्ट्री तथा दर्शकों के लिए वाईआरएफ के योगदान की झलक भी दिखलाता है"

    अक्षय आगे कहते हैं, "यह विशेष लोगो गुजरे पांच दशकों के दौरान उन सभी सुपरस्टारों को हमारा शुक्राना भी है, जो कृपापूर्वक हमारे साथ रचनात्मक तौर पर जुड़े और भारत को ऐसी माइलस्टोन फिल्में देने में हमारी मदद की, जिन्होंने इतिहास रचा और भारतीय सिनेमा में नए मानदंड स्थापित किए। आज का दिन अद्भुत रूप से एक खास दिन है; न सिर्फ वाईआरएफ में हमारे लिए बल्कि कुल मिलाकर पूरी इंडस्ट्री के लिए भी यह बेहद खास है। हम अपनी विनम्र उपस्थिति के इन 50 सालों में अपने ब्रांड पर प्यार बरसाने तथा सहयोग व समर्थन देने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।“

    यश चोपड़ा की मोहब्बत

    यश चोपड़ा की मोहब्बत

    यश चोपड़ा एक ऐसे शख़्स थे जिन्होंने मोहब्बत को इस तरह पर्दे पर उतारा कि दिल झूम सा उठा। इस तरह रोमांस को सबके सामने प्रस्तुत किया कि जादू सा चल गया। वक्त का 'ऐ मेरी ज़ोहराजबीं' से लेकर जब तक है जान तक यश चोपड़ा ने हमेशा दर्शकों को ऐसी दुनिया से रूबरू कराया जो आज ढूंढने पर भी नहीं मिलती है।

    कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है....

    कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है....

    यश चोपड़ा के इश्क का अंदाज़ बिल्कुल सादा था। न कोई बनावट न कोई बदमिज़ाज़ी। बस भोली और मासूम मोहब्बत। उसमें वीर का कॉन्फिडेंस था तो राज का अल्हड़पन,अमित की ज़िम्मेदारी भी।

    तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती...

    तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती...

    यश चोपड़ा खूबसूरती को तराशना जानते थे केवल चेहरे से नहूीं बल्कि हाव - भाव, पहनावे और अदाओं से। उनका यही अंदाज़ चांदनी की शरारतों में, सिमरन के भोलेपन में, शोभा की खामोशियों में, निशा की अदाओं में और पूजा की शोखियों में झलकता था...

    ये हम आ गए हैं कहां...

    ये हम आ गए हैं कहां...

    पीले खेत, सफेद पहाड़, खिले गुलिस्तान...यश चोपड़ा सपनों की उस दुनिया में ले जाते थे जहां सब कुछ खूबसूरत था। स्विट्ज़रलैंड उनकी फेवरिट लोकेशन थी। उन्होंने एल्प्स की पहाड़ियों को इतनी खूबसूरती से दिखाया है कि स्विट्ज़र लैंड में उनके नाम पर एक झील है तो DDLJ के बाद एक ट्रेन भी।

    तुझमें रब दिखता है...

    तुझमें रब दिखता है...

    रोमांस के साथ परिवार और परंपरा पर उन्होंने कभी कंप्रोमाइज़ नहीं किया। सिलसिला में भाई के लिए अमित का त्याग हो या बाउजी के लिए राज - सिमरन की इज्ज़त, ज़ारा का पड़ोसी बेब्बे के लिए अपनापन हो या दीवार में मां के लिए झगड़ते दो भाई। हर किरदार दूसरे किरदार से जुड़ा था।

    तू मेरे सामने, मैं तेरे सामने...

    तू मेरे सामने, मैं तेरे सामने...

    ऐसा नहीं था कि यश चोपड़ा ने रोमांस की इंटीमेसी को नज़रअंदाज़ किया लेकिन उन्होंने फूहड़ता और अश्लीलता कभी नहीं परोसी। जब तक है जान का सांस में तेरी सांस मिली, चांदनी का लगी आज सावन की, लम्हे का कभी मैं कहूं, वीर - ज़ारा का जानम देख लो इसके सटीक उदाहरण हैं।

    आज सवेरे सूरज ने बादल के तकिये से सर जो उठाया...

    आज सवेरे सूरज ने बादल के तकिये से सर जो उठाया...

    आज सवेरे सूरज ने बादल के तकिये से सर जो उठाया... यश चोपड़ा शायरी के दीवाने थे और उनकी ये दीवानगी उनकी फिल्मों की नज़्मों में दिखती थी। चाहे सिलसिला के अमित की शायरियां हों और सिमरन की डायरी के पन्ने। वहीं वीर का कैदी नंबर 786 किसी परिचय का मोहताज नहीं है

    अरे रे अरे बन जाए ना...

    अरे रे अरे बन जाए ना...

    यश राज के संगीत की कोई तुलना नहीं थी। रोमांस के बेहतरीन नगमें इंडस्ट्री को देने वाले यश चोपड़ा ही थे। लम्हे, सिलसिला, चांदनी, डर, कभी कभी, रब ने बना दी जोड़ी, दिल तो पागल है, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे...किसी के संगीत की कोई तुलना ही नहीं है। दिल तो पागल है का एल्बम तो सभी रिकॉर्ड पार कर गया। वहीं वीर - ज़ारा मदन मोहन के म्यूज़िक बैंक ने मानो उनका वक्त दोहरा दिया।

    मोहब्बत करूंगा मैं...जब तक है जान

    मोहब्बत करूंगा मैं...जब तक है जान

    यश चोपड़ा सारी ज़िंदगी मोहब्बत के हसीन किस्से गढ़ते रहे। जाते जाते भी उन्होंने दर्शकों को इश्क का तोहफा दिया जब तक है जान के रूप में। लेकिन कहते हैं न कि प्यार मरता नहीं वैसे ही यश चोपड़ा की मोहब्बतें हमेशा ताज़ा रहेंगी...कभी कभी वीर के लम्हे में, कहीं ज़ारा की परंपरा में..और हमेशा राज - सिमरन के सिलसिले में..

    English summary
    Aditya Chopra kickstarts Yashraj Films's 50 years by unveiling a new logo on Yash Chopra's 88th birthday.
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X