भारत में बनी कंट्रोवर्सी, लेकिन नेपाल के नेता समझे एलियन Pk की बात
नेपाल की दो सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टियों के नेताओं ने आपसी संबंधों को ठीक करने के मकसद से आमिर खान की फिल्म 'पीके' साथ-साथ देखी। और अच्छी बात यह है कि भारत में इतनी कंट्रोवर्सी पैदा करने वाली फिल्म पीके नेपाल के नेताओं को बेहतरीन लगी। नेपाल के नए संविधान का ड्राफ्ट तैयार किए जाने की आखिरी तारीख से पहले दोनों पाटियों का 'पीके' के बहाने करीब आना एक अच्छा संकेत है।

आपको बता दें, फिल्म देखने वाले नेताओं में सीपीएन यूएमएल के उपाध्यक्ष व उपप्रधानमंत्री बामदेव गौतम और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के अलावा माओवादी नेता पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' भी शामिल थे। यहां सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से हुआ। फिल्म देखने से पहले तीनों नेताओं ने बैठक भी की। बामदेव गौतम ने फिल्म के टिकट खरीदे। इससे पहले नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और माओवादी नेता बाबूराम भट्टाराई ने भी 'पीके' देखी थी।
'पीके' के बारे में अपने विचार सामने रखते हुए उन्होंने कहा, 'अंधविश्वास, शोषण और पाखंडवाद जैसी सामाजिक बुराइयों की नजर से 'पीके' एक सफल फिल्म है। ये हमें सामाजिक न्याय का संदेश देती है।' नेपाल के पुनर्निर्माण पर दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के मतभेदों को देखते हुए भारत में इस कदम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बहरहाल, नेपाल के नेताओं ने तो यह फिल्म देख ली और एलियन 'पीके' की बात समझ भी ली। लेकिन क्या भारतीय नेताओं या संगठनों को बात समझाना इतना मुश्किल है। फिल्म को लेकर कंट्रोवर्सी दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। कहीं आमिर पर तो कहीं राजकुमार हिरानी पर केस दायर किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई सिनेमाघरों में तोड़फोड़ कर काफी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। लिहाजा, उम्मीद है कि दुनिया भर के अलग अलग देशों को देखते हुए भारत के संगठन भी पीके की बात समझने में सफल हो जाएं।


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