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    शिद्दत से याद आए महेंद्र कपूर

    By Staff
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    'तुम अगर साथ देने का वादा करो' (हमराज) और 'चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों' (गुमराह) जैसे सैकड़ों यादगार गीत गाने वाले प्रसिद्ध पार्श्वगायक महेंद्र कपूर को आज भी लोग बहुत शिद्दत से याद करते हैं।

    एक से बढ़कर एक मधुर गीत गाने वाले इस महान गायक का जन्म 9 जनवरी 1934 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ था। महेंद्र कपूर को पहली बार उस समय शोहरत मिली जब उन्होंने एक राष्ट्रीय गायन प्रतियोगिता में सफलता हासिल की।

    महेंद्र कपूर ने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार व मुकेश जैसे गायकों की मौजूदगी में अपने लिए एक अलग मुकाम बनाया। महेंद्र कपूर मोहम्मद रफी के बहुत बड़े प्रशंसक थे। वे हमेशा उनसे कुछ न कुछ सीखने जाया करते थे।

    पद्मश्री सहित अनेकों सम्मानों से नवाजे गए इस महान गायक ने अपने करियर की शुरुआत 1958 में वी.शांताराम की फिल्म 'नवरंग' से की। इन्होंने भारतीय सिनेमा में हिन्दी के अलावा गुजराती और मराठी सहित अन्य भाषाओं में 25,000 से भी अधिक गीत गाए। महेंद्र कपूर के लिए 60 का दशक काफी सुनहरा रहा। उस दौरान उनके गाए अनेक गीत सुपरहिट हुए।

    महेंद्र कपूर के प्रसिद्ध गीतों में प्रमुख है 'नीले गगन के तले' (हमराज),'चलो इक बार' (गुमराह), 'मेरे देश की धरती'(उपकार),'और नहीं बस और नहीं'(रोटी कपड़ा और मकान),'भारत का रहने वाला हूं' (पूरब और पश्चिम),'फकीरा चल चला चल'(फकीरा),'वो मेरा प्यार है'(ये रात फिर ना आएगी), 'तेरे प्यार का आसरा' (धूल का फूल ) और 'अब के बरस तुझे धरती की रानी' (क्रांति) प्रमुख है।

    भारतीय सिनेमा में देशभक्ति गीतों के लिए मशहूर महेंद्र कपूर ने मनोज कुमार और बी.आर चोपड़ा की कई बड़ी फिल्मों में गीत गाए। मनोज कुमार को भारत कुमार की पहचान दिलाने में महेंद्र कपूर की प्रमुख भूमिका रही।

    इस महान गायक ने 27 सितम्बर 2008 को अंतिम सांस ली। आज हमारे बीच महेंद्र कपूर भले ही नहीं हैं, लेकिन उनके गाए हुए नगमे आज भी गुनगुनाने के लिए मजबूर करते हैं।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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