मोहल्ला अस्सी वर्ष 2018 में रिलीज होने वाली व्यंग्यात्मक हास्य फिल्म है, जिसका निर्देशन चन्द्रप्रकाश द्विवेदी कर रहे हैं। इस फिल्म में मुख्य भूमिका सनी देओल के अलावा रवि किशन, साक्षी तंवर और सौरभ शुक्ला जैसे कलाकार नजर आ रहें है। इस फिल्म में सनी देओल काशी में हो रहे है गलत कामों और अंग्रेजों के द्वारा अश्लीलता फैलाने के विरोध में दिख रहें है। इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला है और फिल्म 16 नवंबर को रिलीज कर दी जाएगी। कहानी धर्मनाथ पांडेय (सनी देओल) संस्कृत के अध्यापक हैं, शिवभक्त हैं और साथ ही घाट पर तीर्थयात्रियों के काम भी करते हैं। धर्मनाथ अपनी सिद्धांतों पर अडिग है। उन्होंने ना सिर्फ अपने घर को, बल्कि पूरे मोहल्ले को बाज़ारवाद की हवा से दूर रखा है। बनारस में कई विदेशी चेहरे नजर आते हैं जो अस्सी में रहने का ठिकाना ढूंढते हैं। लेकिन ब्राह्मणों के इस मोहल्ले में विदेशियों का रहना अस्वीकार्य है। धर्मनाथ पांडेय के अनुसार विदेशियों ने अस्सी घाट को बाजार बना दिया है। गाइड बने गिन्नी (रवि किशन) को धर्मनाथ कहते हैं गंगा हमारे लिए नदी नहीं है, मैया है.. और मैं गंगा को विदेशियों का स्विमिंग पूल नहीं बनने दूंगा। लेकिन एक समय आता है जब धर्मनाथ को भी सासांरिक माया में फंसकर सिद्धांथों से समझौता करना पड़ता है। हमारे मूल्यों को वैश्वीकरण ने किस तरह प्रभावित किया है यह फिल्म में निर्देशक ने सख्ती से समझाया है। ब्राह्मणों का मोहल्ला भोले बाबा का घर है। तो मोहल्ले में पप्पू के चाय की दुकान एक राजनीतिक गलियारा। वहां की प्रकृति समझाते हुए निर्देशक कहते हैं- 'हिंदुस्तान में संसद दो जगह चलती है एक दिल्ली में और दूसरी मोहल्ला अस्सी के चाय की दुकान पर।' राजनीति से जुड़े कुछ दमदार और निर्भीक संवाद यहां सुनाई पड़ेंगे।
मोहल्ला अस्सी की कहानी कई जगह दम तोड़ती दिखती है। जिन्हें भारतीय राजनीति, धर्म, संस्कृति में रुचि है,उन्हें एक बार यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।
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फिल्म की कहानी दिलचस्प है और अगर ये 3-4 साल पहले रिलीज हो जाती तो शायद इसका प्रभाव ज्यादा पड़ता, किन्तु अभी यह काफी धूमिल सी नजर आती है। सनी देओल एक ब्राह्मण के किरदार में अच्छा अभिनय करते नजर आते हैं, वहीँ रवि किशन की मौजूदगी आपके चेहरे पर मुस्कान जरूर लाती है, साक्षी तंवर ने बखूब अभिनय किया है।
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चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म विवादों की आंच और सेंसर के कैंची झेलकर 6 साल बाद सिनेमाघरों तक पहुंच पाई है, इसका असर भी फिल्म पर पड़ा है। कई जगह कहानी के सिरे छूटते हुए लगते हैं। धर्मनाथ पांडेय की पत्नी के रोल में सांक्षी तंवर और गिन्नी की भूमिका में रवि किशन ने दमदार अभिनय किया है। सौरभ शुक्ला, सीमा आजमी सहित बाकी सहयोगी कलाकारों का काम भी बढ़िया है।