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    INTERVIEW: 'छिछोरे' मेरे 30 सालों के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है- साजिद नाडियाडवाला

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    फिल्म इंडस्ट्री में 3 दशक से ज्यादा वक्त गुज़ार चुके निर्माता- निर्देशक साजिद नाडियाडवाला कहते हैं कि मुझे सिनेमा से बेइंतहा प्यार है और यह मेरे लिए एक पैशन है। मैं फिल्में दिमाग से नहीं बल्कि दिल से बनाता हूं। मुझे लगता है कि इस इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए आपके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

    साजिद नाडियाडवाला के बैनर तले नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी फिल्म 'छिछोरे' इस शुक्रवार (6 सितंबर) सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। ऐसे में फिल्मीबीट ने फिल्म के प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला से मुलाकात की, जहां उन्होंने बेधड़क कहा कि छिछोरे मेरी 30 साल के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है। ये एक ऐसी फ़िल्म है, जो मैं अपने बच्चों को देना चाहूंगा।

    इंटरव्यू में निर्माता ने अपने 30 सालों के करियर, किक 2 की रिलीज, सलमान खान - अक्षय कुमार के साथ अपनी दोस्ती पर भी खुलकर बातें कीं।

    यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

    ट्रेलर के आधार पर कह सकते हैं कि छिछोरे दो जेनरेशन की कहानी कहती है। फिल्म की शुरुआत कैसे हुई?

    ट्रेलर के आधार पर कह सकते हैं कि छिछोरे दो जेनरेशन की कहानी कहती है। फिल्म की शुरुआत कैसे हुई?

    इंडस्ट्री में क्या हो रहा है, इस पर हमेशा मेरी नज़र रहती है। नितेश तिवारी जब दंगल शुरू करने वाले थे, उसके पहले ही मैंने उन्हें स्क्रिप्ट को लेकर कॉल किया था लेकिन उन्होंने कहा कि पहले मैं दंगल ख़त्म कर लूं, फिर देखते हैं। दंगल के दौरान भी उन्होंने मुझे दो- चार स्क्रिप्ट सुनाई लेकिन उसमें मुझे वो पॉवर नहीं लग रही थी। फिर उन्होंने मुझसे कहा मेरे पास अभी स्क्रिप्ट तो नहीं लेकिन एक आईडिया है। उन्होंने चार पांच लाइन में मुझे एक आईडिया सुनाई और मुझे वो इतनी बेहतरीन लगी, मैंने उसी वक्त फाइनल कर लिया कि मुझे ऐसी ही कहानी परदे पर दिखानी है। दंगल खत्म होते ही नितेश ने छिछोरे की स्क्रिप्ट पर काम शुरू कर दिया। मुझे लगता है कि ये एक ऐसी फ़िल्म है, जो मैं अपने बच्चों को देना चाहूंगा। फ़िल्म का जो ट्रेलर रिलीज किया गया है, मैं कहना चाहता हूँ कि फ़िल्म उससे कहीं ज्यादा बेहतर है। ढाई घंटे कि फ़िल्म को दो मिनट में समेटना यूँ भी मुश्किल है। छिछोरे बहुत ही संवेदनाओ से भरी फ़िल्म है। मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ कि ये मेरे तीस सालों के करियर की सबसे बेहतरीन फ़िल्म है।

    ट्रेलर की रिलीज़ के साथ इसकी तुलना राजकुमार हिरानी की 3 इडियट्स से हो रही है, क्योंकि दोनों ही कॉलेज, हॉस्टल लाइफ की दोस्ती की कहानी है?

    ट्रेलर की रिलीज़ के साथ इसकी तुलना राजकुमार हिरानी की 3 इडियट्स से हो रही है, क्योंकि दोनों ही कॉलेज, हॉस्टल लाइफ की दोस्ती की कहानी है?

    कॉलेज लाइफ की अपनी एक खुशबू होती है। उसे कोई नहीं बदल सकता है। वो हम कितना भी चाह लें, उसकी झलक आएगी ही। मेरी नज़र में राजकुमार हीरानी और नितेश तिवारी दोनों ही उम्दा निर्देशक हैं। लेकिन दोनों की कहानी कहने की approach अलग है। छिछोरे भी भले ही कॉलेज और दोस्ती की कहानी है, लेकिन एक बच्चे का अपने परिवार के साथ संबंध, परिवार का उसके लिए अप्रोच.. ये सब बातें काफी अलग है। दोनों फिल्में बिल्कुल अलग है। वैसे भी अगर किसी बेहतरीन फ़िल्म से आप इसकी तुलना कर भी रहे हैं तो अच्छी बात है।

    आपने सलमान खान से लेकर अक्षय कुमार, वरुण धवन, टाइगर श्रॉफ सबके साथ हिट फिल्में दी हैं। अब अहान शेट्टी को भी लॉन्च कर रहे हैं। किसी एक्टर की क्षमता कैसे भांप लेते हैं?

    आपने सलमान खान से लेकर अक्षय कुमार, वरुण धवन, टाइगर श्रॉफ सबके साथ हिट फिल्में दी हैं। अब अहान शेट्टी को भी लॉन्च कर रहे हैं। किसी एक्टर की क्षमता कैसे भांप लेते हैं?

    इसमें कुछ तो नसीब की बात भी होती है। जैसे सलमान के साथ मैंने जीत बनाई। फिर जुड़वा की, जिसमें पहली बार सलमान डबल रोल निभा रहे थे। इसके बाद हम फिल्में करते रहे। अक्षय के साथ भी मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है। हम एक ही स्कूल, कॉलेज में पढ़ते थे। एक ही बेंच पर बैठते थे। हमारी दोस्ती 43 साल पुरानी है। अक्षय के साथ मैंने वक्त हमारा है बनाई, जो कि हिट रही। उसके बाद हमने 10 फिल्में साथ में बनाई, सभी हिट रही। 100 प्रतिशत रिकॉर्ड है हमारा।

    साल 2000 तक मैं एक समय पर एक ही फिल्म बनाता था। (हँसते हुए) फिर शादी हो गई तो ऑफिस जाना भी रेगुलर हो गया। जब ऑफिस में ज्यादा समय देने लगा तो स्क्रिप्ट भी ज्यादा आने लगी। फिर हमने एक साथ दो फिल्में बनानी शुरू की। एक सलमान तो एक अक्षय के साथ। फिर मुझसे शादी करोगी आई, हाउसफुल सीरीज आई, किक बनाई। जब लोगों को पता चला कि मैं नये आईडिया भी सुन रहा हूँ तो और स्क्रिप्ट आने लगी। फिर मैंने कुछ अलग तरह की फिल्में भी बनाई, जैसे कि हाईवे। मुझे उसकी कहानी बहुत पसंद आई थी।

    सच कहूं तो मौक़े खुद चलकर मेरे पास आते गए। इसके बाद मैंने एक बहुत अच्छी स्क्रिप्ट सुनी जो साउथ के फिल्म की रीमेक थी, जिसके लिए मुझे किसी नये चेहरे की ज़रूरत थी। मुझे पता चला कि टाइगर भी तब तक दो, तीन जगह ऑडिशन दे चुका है, तो हमने भी उसे अप्रोच किया और वो उसे फ़िल्म के लिए बिल्कुल सही लगा। नसीब से वो फ़िल्म भी हिट रही, फिर बागी भी हिट रही, बागी 2 ब्लॉकबस्टर रही। इससे मुझे थोड़ी हिम्मत मिली कि मैं कुछ अलग विषय पर भी फिल्में बना सकता हूँ। इसके बाद हमने ऋतिक के साथ सुपर 30 बनाई। यही स्क्रिप्ट शायद 10-15 साल पहले आती तो कोई नहीं बनाने की सोचता। कौन सोच सकता है कि किसी फिल्म में ऋतिक का अंदाज़ और उनका लुक ही उनसे अलग कर दो। मैंने इस इंडस्ट्री में 34 साल बिताया है और मुझे लगता है कि ये फिल्म इंडस्ट्री का बेस्ट टाइम है।

    आज के जेनरेशन के कलाकारों या निर्माता, निर्देशकों में क्या अलग पाते हैं?

    आज के जेनरेशन के कलाकारों या निर्माता, निर्देशकों में क्या अलग पाते हैं?

    आज के कलाकार बहुत प्रोफेशनल होते हैं। पहले तो 5 साल में एक फिल्म बनती थी। कोई एक अलग कॉस्ट्यूम की खोज में निकलते थे तो एक दो महीने बाद आते थे। लेकिन आज 4-5 महीने के शेड्यूल की फिल्म होती है। आज 9 बजे की शिफ्ट होती है, एक्टर साढ़े नौ आता है तो सेट पर लोग बोलने लगते हैं कि अनप्रोफेशनल है। पुराने समय में 20 दिन का शेड्यूल है और बाहरवें दिन एक्टर आ जाता था तो हमलोग खुश हो जाते थे कि देखो ये कितना प्रोफेशनल है।

    किसी कहानी में ऐसी क्या एक बात आपको आकर्षित करती है, जो आपको फिल्म बनाने के लिए प्रेरित करती है?

    किसी कहानी में ऐसी क्या एक बात आपको आकर्षित करती है, जो आपको फिल्म बनाने के लिए प्रेरित करती है?

    मैं दो तरह की फिल्म बनाता हूं। एक जहां मैं सीखाता हूं और एक जहां मैं सीखता हूं। नए निर्देशक हो गए जैसे अहमद खान, तो इन्हें मैं कुछ बातें सीखाता हूं। लेकिन नितेश तिवारी, इम्तियाज अली जैसे निर्देशक हो गए, जिनसे मैं सीखता हूं। 34 साल तक इस इंडस्ट्री में कोई नहीं टिक सकता यदि वह लगातार सीखता ना रहे। आज भी मुझे फिल्मों को लेकर डर रहता है, खुश होता हूं, निराश होता हूं। लेकिन मैं मानता हूं कि आज के निर्देशक अपने काम को लेकर बहुत एकाग्र रहते हैं। एक एक फिल्म 4 महीने, 5 महीने में रिलीज हो रही है।

    बतौर फिल्म निर्माता आपने इंडस्ट्री में तीन दशक से ज्यादा समय गुजारा है। नए निर्माताओं को क्या टिप देना चाहेंगे?

    बतौर फिल्म निर्माता आपने इंडस्ट्री में तीन दशक से ज्यादा समय गुजारा है। नए निर्माताओं को क्या टिप देना चाहेंगे?

    कोई टिप काम नहीं कर सकता। इन प्रोफेशन में आप तभी आएं, जब सिनेमा को लेकर आप में एक पैशन हो। आप फिल्मों से बेइंतहा प्यार करते हों। इस इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए इस काम से प्यार करना होगा। बाकी तीन, चार और बड़े प्रोडक्शन हाउस भी आप देखेंगे तो सभी में इस काम को लेकर बहुत पैशन दिखता है। तो सबसे अहम बात यही है।

    किसी फिल्म की विफलता को किस तरह देखते हैं?

    किसी फिल्म की विफलता को किस तरह देखते हैं?

    अच्छी बात यह है कि हमारा ट्रैक रिकॉर्ड लगभग 90 प्रतिशत का रहा है। जो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट नहीं भी रही, वो भी लोगों के दिलों तक पहुंची है। उदाहरण के तौर पर रणबीर- दीपिका की 'तमाशा'। मैं ओवरसीज में कहीं भी जाता हूं तो लोग तमाशा की तारीफ करते हैं। वो किक और हाउसफुल की बात भले ही ना करें, लेकिन तमाशा को उन्होंने पसंद किया है। युवाओं ने भी फिल्म को पसंद किया था। लेकिन ट्रेड का हिसाब किताब कई चीजों पर आधारित होता है। इसीलिए मैं मानता हूं कि भगवान की कृपा हमेशा बनी रही है कि हमें विफलता का चेहरा ज्यादा देखना नहीं पड़ा है।

    आज जहां कई बड़े प्रोडक्शन हाउस नुकसान में जा रहे हैं, कुछ बंद हो रहे हैं। आप यहां सफलतापूर्वक टिके रहने के लिए किन बातों को फॉलो करते हैं?

    आज जहां कई बड़े प्रोडक्शन हाउस नुकसान में जा रहे हैं, कुछ बंद हो रहे हैं। आप यहां सफलतापूर्वक टिके रहने के लिए किन बातों को फॉलो करते हैं?

    सबसे पहली बात तो यही है कि यहां सिर्फ मैं हूं तो किसी फिल्म को हरी बत्ती देता हूं। जो निर्णय होता है, वह मेरा है। मैं दुनियाभर की फिल्में देखता हूं। दूसरे भाषाओं की फिल्में देखता हूं। एक हफ्ते में यदि चार फिल्में आती है तो मैं चारों फिल्में देखता हूं.. छोटी से छोटी, बड़ी से बड़ी। यह मेरा जुनून है। शुरुआत में मैंने भी इसे बतौर बिजनेस लिया था, कुछ साल मैंने पैसों के लिए फिल्में बनाई, कोई नहीं चली। फिर मैंने समझ लिया कि फिल्में दिल से बनती है।

    मुझे याद है जब हमने जुड़वा शुरु की थी तो एक खबर आई थी कि लोग यहां एक सलमान नहीं झेल पाते, इसमें दो सलमान हैं। लेकिन वो दिल से बनी फिल्म थी। मुझे लगता है कि दिमाग लगाकार फिल्म बनाओ तो आप ज्यादा पैसा गंवाते हो।

    सलमान खान से लेकर अक्षय कुमार तक से आपकी दोस्ती लंबे समय से रही है। आपने उनके साथ करियर की शुरुआत की थी। आज आप इस दोस्ती को किस तरह देखते हैं? छिछोरे देखकर किन्हीं खास लम्हों की याद आई?

    सलमान खान से लेकर अक्षय कुमार तक से आपकी दोस्ती लंबे समय से रही है। आपने उनके साथ करियर की शुरुआत की थी। आज आप इस दोस्ती को किस तरह देखते हैं? छिछोरे देखकर किन्हीं खास लम्हों की याद आई?

    दोनों अलग तरह के छिछोरे हैं। लेकिन अच्छी बात है कि सभी तरह के छिछोरेपन के बावजूद दोनों अपने काम को लेकर बेहद गंभीर हैं और हमेशा समय पर फिल्में खत्म करते हैं। दोनों बेहद प्रोफेशनल हैं। सिर्फ मेरे साथ ही नहीं, बल्कि कई निर्माताओं के साथ इन्होंने 10-10 फिल्में की हैं। बाकी दोस्ती की बात करें तो ऑफ सेट हम काफी अच्छा समय गुजारते हैं। पार्टी करना, दुनिया घुमना, बातें करना और भगवान का धन्यवाद है कि प्रोफेशनल करियर में भी हम एक दूसरे के साथ सफल ही रहे हैं। हमारी फिल्में हिट रही हैं।

    सच बताऊं तो डाइरेक्टर बनने को लेकर भी सलमान ने मुझे मजाक में कहा था कि तुम्हें फिल्म डाइरेक्ट करनी चाहिए। और उसने अपने ट्विटर अकाउंट पर पता नहीं कब पोस्ट भी कर दिया। मुझे पता भी नहीं था कि मैं किक' डाइरेक्ट करने वाला हूं। 10 मिनट के बाद मेरी वाइफ ने मुझे कॉल किया कि आप फिल्म डाइरेक्ट करने वाले हैं। तो मैंने कहा मुझे नहीं पता। फिर उसने मुझे कहा कि सलमान ने तो ट्विट किया है कि आप किक डाइरेक्ट कर रहे हैं। तो हमारी दोस्ती कुछ इस तरह की है। ऑफ स्क्रीन हम सब क्रेजी हैं। हमारी तो शादी भी एक ही दिन होने वाली थी 18 नवंबर को। लेकिन अंतिम क्षण में उसने बैक ऑफ कर लिया।

    सलमान खान की बात हो रही है, तो आजकल 'किक 2' को लेकर भी काफी चर्चा है। फिल्म ईद 2020 पर रिलीज हो रही है?

    सलमान खान की बात हो रही है, तो आजकल 'किक 2' को लेकर भी काफी चर्चा है। फिल्म ईद 2020 पर रिलीज हो रही है?

    हां, किक 2 पर मैं काम कर रहा हूं। जैसे ही इंशाल्लाह की डेट बदली गई तो मुझसे पूछा गया कि 'किक 2' किस स्टेज पर है। लेकिन फिलहाल मेरे पास 7-8 फिल्में हैं। किक 2 का ड्राफ्ट तैयार है, लेकिन उसे स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स में बदलने के लिए मुझे 4, 5 महीने चाहिए। इसीलिए फिल्म ईद 2020 पर तो नहीं आ रही है।

    गौरतलब है कि साजिद नाडियावाला बॉलीवुड के उन चंद प्रोड्यूर्स में हैं, जिनके बैनर तले तीन फ्रैंचाइजी फिल्में हैं- हाउसफुल, किक और बागी। एक तरह उन्हें सीक्वल फिल्मों के सुपरस्टार कह सकते हैं।

    English summary
    In an interview with Filmibeat, producer Sajid Nadiadwala says, I can proudly say that Chhichhore is the finest film in my entire 30 years journey.
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