आइटम सांग करने को तैयार: रितुपर्णा

By Super

कलकत्ता की एक बेहतरीन अदाकारा होने के बावजूद हिन्दी फिल्मों में उनकी भूमिका एक संघर्षशील नायिका की बनी हुई है। अपनी पहली हिन्दी फिल्म 'मैं मेरी पत्नी और वो" के बाद एक अदद हिट फिल्म के लिए अपने आपसे जूंझ रही रितु को अपनी आनेवाली फिल्मों से काफी उम्मीदें हैं।

प्रश्न - अब आप हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में खुद को सहज मानती हैं या अभी भी खुद को बाहर की मानती हैं ?

उत्तर - देखिए पहले मुझे ऐसा लगता था कि मैं बॉलीवुड में सहज नहीं हो पाई हूं मगर अब मैं काफी सहज हो गई हूं। पहले मुंबई फिल्म और कलकत्ता में बदलाव समझ में नहीं आते थे मगर अब दोनों के बीच के फर्क को मैं समझने लगी हूं। अगर मुझे मुंबई फिल्मों का हिस्सा बनना है तो पहले मुझे उसे समझना पडेगा। सो उसके लिए मैंने अपना माइंड सेट कर लिया है। मगर इसका मतलब आप कतई यह मत समझिए कि मैं कलकत्ता को भूल गई हूं। वह भी मेरा घर है। कलकत्ता में रितुपर्णा सेनगुप्ता एक ब्रांड नेम है मगर मुंबई में भी मैं अपनी पहचान बनाना चाहती हूं, जिससे मुझे संतुष्टी मिले और लोगों को भी यह लगे कि रितु कुछ बेहतर कर रही है।

प्रश्न - यानी आप मुंबई में भी एक ब्रांड नेम के रूप में उभरना चाहती हैं ?
उत्तर - जी हां। वहां कमर्शियल के साथ साथ मुझे आर्ट फिल्मों के लिए भी जाना जाता है। वही मुकाम मै मुंबई में भी पाना चाहती हूं। मुझे लगता है इन दोनों के कॉम्बिनेशन से ही मैं मुंबई फिल्मों में ब्रांड नेम बन सकती हूं। सो कोशिश जारी है।

प्रश्न - लेकिन क्या वजह है कि 'मैं मेरी पत्नी और वो" के चार साल बाद भी आप अपनी जगह नहीं बना पाई हालांकि उसके बाद आपने कई फिल्में की ?
उत्तर - मैंने फिल्में हमेशा सही चुनी मगर वह चल नहीं पाई इसमें मेरी तो कोई गलती नहीं है ना। अब देखिए आर मोहन, जिन्होंने 'चांदनी बार" जैसी बेहतरीन फिल्म बनाई थी, उनकी गर्भपात जैसे सामयिक विषय पर आधारित फिल्म 'गौरी द अनबॉर्न" साइन की मगर अफसोस वह फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आई। प्रोडक्शन वैल्यू अच्छे होने के साथ साथ उसमें अतुल कुलकर्णी जैसे बेहतरीन एक्टर थे मगर फिल्म पिट गई। उसके अलावा रजतेश नायर की मल्टीस्टारर्र फिल्म 'सिर्फ" साइन की जिसमें मनीषा कोइराला, के के मेनन, नौहिद सायरसी, परवीन डबास और सोनाली कुलकर्णी जैसे बेहतरीन कलाकार थे। आप उस फिल्म को गलत नहीं कह सकते। मुझे लगता है मैंने फिल्म सही चुनी मगर अब मुझे थोडा और सावधानी से और सोच समझकर फिल्म चुननी पडेगी।

प्रश्न - क्या कभी यह ख्याल नहीं आता कि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नायिका होने के बावजूद हिन्दी फिल्मों में मैं अपना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रही हूं ?
उत्तर - देखिए यह ख्याल तो नहीं आता मगर हां दुख ज़रूर होता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिर मैं भी एक इंसान हूं इस तरह के ख्याल आना ज़ाहिर सी बात है मगर यह ख्याल काफी कम समय के लिए होते हैं। मुझे तो इस बात की अधिक खुशी है कि मैं यहां की नहीं होने के बावजूद इतनी नायिकाओं की भीड में मुझे पहचाना जा रहा है और इतनी फिल्में मिल रही हैं। मुझे लगता है जो संघर्ष मैं अपनी फिल्मों के ज़रिए दिखाती हूं उसे कहीं ना कहीं जी रही हूं। सो यह भी ज़रूरी है। सफलता संघर्ष से मिलती है और जिन्हें बिना संघर्ष के सफलता मिल जाती है वह काफी कम समय के लिए होती है।

प्रश्न - आपकी अधिकतर फिल्में महिलाओं की परेशानियों को डिल करती है। क्या यह महज़ इत्तिफाक है या सप्रयास है ?
उत्तर - यह तो मुझे भी नहीं पता। शायद मेरे निर्देशकों को लगता हो कि मैं महिलाओं की परेशानियों को अच्छे से पर्दे पर उतार सकती हूं। सिर्फ यही नहीं कलकत्ता में अभी जो फिल्म 'तृष्णा" मैं कर रही हूं उसमें भी मेरे कई रूप लोगों को देखने को मिलेंगे। यह फिल्म, हिन्दी फिल्म 'जिस्म" की तरह है। इस फिल्म में मेरे किरदार का नाम 'पियासा" है। इस फिल्म के निर्देशक के अनुसार यह किरदार सिर्फ मैं ही निभा सकती हूं। मैं भी इस बात को मानती हूं कि मुझमें ग्लैमर और आर्ट दोनों का कॉम्बिनेशन है और इस फिल्म में दर्शकों को मेरे दोनों जलवे देखने मिलेंगे।

प्रश्न - जब 'तृष्णा" जैसी फिल्म आपको मिली तब आपका क्या रिएक्शन था ?
उत्तर - दरअसल उस निर्देशक के साथ मैं पहले भी काम कर चुकी हूं। मगर वह फिल्म इतनी बोल्ड नहीं थी। इस फिल्म में बोल्डनेस और अंगप्रदर्शन के साथ काफी एक्टिंग की भी ज़रूरत है। इसमें मेरे थोडे से ग्रे शेड हैं।

प्रश्न - आम तौर पर हिन्दी फिल्मों में जमने के लिए नायिकाएं आइटम सॉंग का सहारा लेती हैं मगर अब तक आपने कोई आइटम सॉंग नहीं किया ?
उत्तर - क्योंकि अभी तक मुझे किसी ने ऑफर ही नहीं किया। अगर किसी फिल्म में आइटम सॉंग का ऑफर मिला तो मैं ज़रूर करूंगी। आइटम सॉंग करने में मैं कोई बुराई नहीं मानती।

प्रश्न - क्या आपने अपने लिए कुछ मर्यादाएं तय कर रखी हैं ?
उत्तर - जी हां बिल्कुल। मेरी अपनी रेखाए हैं जिसे मैंने अपने लिए खींची हैं। मैं वही किरदार या वही चीज़ें अपने लिए चुनती हूं जिससे मैं संतुष्ट रहूं। दुसरी नायिकाओं की तरह मैं हर दुसरी चीज़ में अपने निर्देशक के लिए मुश्किल नहीं पैदा कर सकती जैसे मैं बिकनी नहीं पहनूंगी या मैं किसींग सीन नहीं दूंगी। अगर मैं ऐसा करती हूं तो मेरे नायिका होने का फायदा ही क्या है। मैं ग्लैमर के साथ साथ सम्मान भी चाहती हूं। डिम्पल कपाडिया ने सबसे ज़्यादा अंगप्रदर्शन किया मगर आज भी लोग उन्हें सम्माननीय नज़रों से देखते है।

प्रश्न - आम तौर पर बेहतरीन नायिकाओं को दर्शक देवी की तरह मानते हैं। आपको नहीं लगता इस तरह के अंगप्रदर्शन से हो सकता है उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचे ?
उत्तर - देखिए मुझे नहीं लगता उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगा। मगर हां उसके लिए वह मुझे क्रिटिसाइज़ करते हैं तो मै इसके लिए तैयार हूं। क्रिटिसिज़्म को मैं अपने लिए अच्छा मानती हूं क्योंकि इससे कमियां पता चलती है।

प्रश्न - आपकी आनेवाली फिल्मों में अगली रिलीज़ कौन सी है ?
उत्तर - मेरी अगली रिलीज़ वार्नर ब्रदर्स की 'एस आर के" है। इसके निर्देशक अजय वर्मा है जो चंदन अरोरा की तरह पहले एडिटर थे। यह एक इमोशनल कॉमेडी फिल्म है। इसमें जो मैं किरदार निभा रही हूं वह मेरी अब तक की सबसे बेहतरीन भूमिका है। इस फिल्म में मैं विद्या नाम की एक लडकी की भूमिका निभा रही हूं जिसके साथ काफी कुछ ऐसा घटता है जिसके लिए वह तैयार नहीं रहती। इस फिल्म में उसकी ज़िन्दगी के कई पहलू को दर्शाया गया है। फिल्म की शुरूआत कॉमेडी से होती है मगर बीच में गंभीर होने के बाद फिल्म दुबारा कॉमेडी हो जाती है। इस फिल्म में मेरे साथ विनय पाठक जी हैं जो काफी अलग ढंग़ में नज़र आएंगे। इस फिल्म का संगीत दिया है इल्लैया राजा ने तथा गीत लिखे हैं गुलज़ार साहब ने।

प्रश्न - 'एस आर के" का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर - वही तो सस्पेंस है। उसके बारे में मैं कुछ नहीं बता सकती। इसके लिए आपको फिल्म देखनी पडेगी।

प्रश्न - इसके अलावा और कौन सी आनेवाली फिल्में हैं ?
उत्तर - इसके अलावा करन राजदान की 'मित्तल वर्सेस मित्तल", अंजन दत्ता की पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म 'बी बी डी", श्रीनिवास की 'लव खिचडी", 'मैं ओसामा", 'साब चाय पानी", 'परोक्ष" और 'दर्दे डिस्को" हैं। जैसा कि आप जानते हैं 'मित्तल वर्सेस मित्तल" मैरिटल रेप पर है। 'लव खिचडी" और 'दर्दे डिस्को" आउट एंड आउट कॉमेडी फिल्म है। 'मैं ओसामा" में मैं एयरहॉस्टेस बनी हूं। साथ ही 'परोक्ष" में मैं एक हाइ एम्बिशियस कॉर्पोरेट वुमन बनी हूं। इसमें मेरे साथ दिव्या दत्ता है। यह सरोगेट मदर पर बेस्ड फिल्म है। इसके अलावा मैं कुछ बंगाली फिल्में कर रही हूं। इसमें सुमन मुखर्जी की 'चतुरंगो" फिल्म मुख्य है। यह रविन्द्रनाथ टैगोर के नॉवेल पर बेस्ड है। इसमें मैं एक विधवा का किरदार निभा रही हूं जो विचारों से काफी आधुनिक है।

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