INTERVIEW: इंडस्ट्री में आज भी सेक्सिज्म है और हमेशा रहेगा, ये बॉलीवुड की प्रथा है- मल्लिका शेरावत
अभिनेत्री मल्लिका शेरावत ने 2000 के दशक की शुरुआत में फिल्म इंडस्ट्री में काफी चर्चित एंट्री ली थी। वह हिंदी फिल्मों में गैर-पारंपरिक भूमिकाएं निभाने के लिए जानी जाती रहीं। मर्डर, ख्वाहिश, प्यार के साइड इफेक्ट्स, वेलकम जैसी फिल्मों से सुर्खियों में आने के बाद मल्लिका ने कुछ समय के लिए बॉलीवुड से दूरी भी बना ली थी। लेकिन अब वो रजत कपूर की नई फिल्म आरके/आरके के साथ हिंदी फिल्मों में वापसी कर रही हैं।
आरके/आरके 22 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। लंबे समय के बाद थियेट्रिकल रिलीज को लेकर खुशी जताते हुए मल्लिका कहती हैं, "आरके/आरके जैसी फिल्म को थियेट्रिकल रिलीज मिल रहा है, मैं तो इसी से खुश हूं। छोटे बजट की फिल्मों को कहां स्क्रीन मिल पाती है। उनके लिए रास्ता बनाना मुश्किल होता है। ये मैजिक की तरह है कि ये फिल्म सिनेमाघर में आ रही है। अभी सिर्फ बड़े हीरो की फिल्मों को ही सही स्क्रीन मिलते हैं।"

फिल्म आरके/आरके की रिलीज से पहले मल्लिका शेरावत ने फिल्मीबीट से बातचीत की, जहां उन्होंने अपनी आगामी फिल्मों से लेकर अपने करियर में आए संघर्षों और बॉलीवुड में भेदभाव पर अपने विचार सामने रखे। फिल्मों में अपने सफर के बारे में बात करते हुए मल्लिका कहती हैं, "मैं बहुत मजबूत व्यक्तित्व हूं और मैं अपने मूल्यों से कभी समझौता नहीं कर सकती।" एक्ट्रेस ने साझा किया कि वो फिल्मों में कई मौकों से चूक गईं क्योंकि वो 'ए-लिस्टर' एक्टर्स के साथ "समझौता" करने को तैयार नहीं थीं।
यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. लॉकडाउन का वक्त आपके लिए कैसा रहा?
मैंने खुद के साथ समय गुजारा, किताबें पढ़ीं। मुझे स्वामी विवेकानंद की किताबें बहुत पसंद हैं, तो मैंने उन्हें पढ़ा, उनकी कहानियां पढ़ीं। मैंने उनकी सिखाई कई बातों को जीवन में अपनाया है। उन्होंने कहा है कि अपने सपनों का पीछा करो, यदि आप पूरी एनर्जी के साथ उसे पूरा करना चाहोगे तो आपके सपने जरूर सच्चाई में बदलेंगे। मैंने अपनी जिंदगी में इसे फॉलो किया है। जब मैं पहली बार मुंबई आई थी तो मेरा सफर भी आसान नहीं था। वहीं, हाल ही में मैंने अपने जीवन में उनकी जो सीख अपनाई है, वो ये है कि जो कुछ भी हम करते हैं, अंतत: यह सब खुशी पाने के बारे में और नैतिक मूल्यों के साथ जीवन जीने के बारे में है। कोई दूसरा आपको खुश नहीं कर सकता, खुशी आपके खुद के अंदर ढूंढ़नी पड़ती है। आपकी खुशी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती है। ये पढ़ना और इन बातों को जीवन में अपनाना आसाना नहीं है। आम तौर पर फिल्में फ्लॉप हो गई, तो हम दुखी हो जाते हैं, पसंद का काम ना मिले तो तुरंत परेशान हो जाते हैं, फिल्म हिट हो जाए तो खुश हो जाते हैं।

Q. Rk/Rkay से आपका किस तरह जुड़ना हुआ?
रजत कपूर इतने शानदार निर्देशक हैं। 'आंखों देखी' मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है और सोचिए कि जिन्होंने उस फिल्म का निर्देशन किया है, वो मुझे Rk/Rkay की ऑफर कर रहे हैं, एक एक्टर के तौर पर मुझे और क्या चाहिए। मैंने फिल्म के लिए ऑडिशन भी दिया, जो रजत कपूर को पसंद आया और फिर मैं फिल्म में फाइनल हुई। सच कहूं तो, उनके साथ और उनकी पूरी मंडली के साथ काम करना बहुत अच्छा अनुभव रहा। रजत कपूर, विनय पाठक, रणवीर शौरी जैसे कलाकारों के साथ करके बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
Q. फिल्म में आप किस तरह का किरदार निभा रही हैं?
फिल्म में मैं गुलाबो का किरदार निभा रही हैं। यह 60 और 70 के दशक की अभिनेत्रियों पर आधारित है। इस किरदार को लेकर हमने काफी रिचर्स की थी। मैंने उस दौर की कुछ अभिनेत्रियों से बातें की, उनका काम देखा, उनके बारे में पढ़ा। वहीदा रहमान, मीना कुमारी जैसी अभिनेत्रियों के हाव भाव से थोड़ा कुछ सीखने की कोशिश की है मैंने। उनकी अदाएं, पहनावा और चाल ढ़ाल को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। इतना ठहराव था उन सबमें, मुझे वो बहुत प्रैक्टिस करना पड़ा। जाहिर है वो लीजेंड हैं, लेकिन मैंने कोशिश की है।

Q. फिल्म इंडस्ट्री में आपको लंबा वक्त हो चुका है। आपके शुरुआती दौर की तुलना में आज यहां क्या बदलाव पाती हैं?
सबसे बड़ा बदलाव जो मैं देख रही हूं, वो ये है कि पहले सेट पर या फिल्म की क्रू में सिर्फ एक या दो महिलाएं होती थीं। लेकिन अब मैं इतनी सारी लड़कियों में फिल्म प्रोडक्शन में काम करते देख रही हूं। मुझे ये देखकर बहुत खुशी होती है। इसके साथ ही जिस तरह से फिल्मों की कहानी कहने के तरीके में बदलाव आया है, जिस तरह से अब महिलाओं को दिखाया जा रहा है, वो एक पॉजिटिव बदलाव है। जिस तरह के किरदार लेखक लिख रहे हैं अब अभिनेत्रियों के लिए, वो बहुत एक्सपेरिमेंटल और रियल लग रहे हैं। उन किरदारों को देखने में मजा आ रहा है। आज से 10 साल पहले आप नहीं सोच सकते थे कि 'दिल्ली क्राइम' जैसी सीरीज बनेगी और शेफाली शाह उसकी लीड होंगी और लोग उस सीरीज को इतना पसंद करेंगे।
Q. आपने मर्डर, वेलकम, प्यार के साइड इफेक्ट्स जैसे अलग अलग शैली की फिल्में की हैं। लेकिन आपके ग्लैमरस किरदार हमेशा हावी रहे। बतौर एक्टर इस बात का अफसोस रहा?
दुख या अफसोस नहीं है, लेकिन हां उम्मीद रहती है कि लोग मेरे बाकी काम को भी याद करें। मैंने बोल्ड और ग्लैमरस किरदार निभाए हैं और मुझे लगता है कि लोगों को आज वही ज्यादा याद हैं। जबकि मैंने कई कॉमेडी फिल्में भी की हैं। मुझे लगता है कि लोग मेरी ग्लैमरस छवि इसीलिए ज्यादा याद रखते हैं क्योंकि जिस समय मैं ये फिल्में कर रही थी, उस वक्त ये कॉमन नहीं था। जबकि आज ये आम बात है।

Q. ग्लैमरस या बोल्ड किरदार निभाना कितना आसान या मुश्किल रहा है?
स्क्रीन पर बोल्ड किरदार करना बहुत ही मुश्किल होता है। खास कर उस वक्त पर, जब सेट पर ज्यादा लड़कियां भी नहीं होती थीं। कुछ वक्त पहले ही मैंने 'गहराइयां' देखी, तो मुझे लगा कि ये तो मर्डर में मैंने इतने सालों पहले किया था। खैर, उस वक्त मेरे सामने जो फिल्में आईं, मैंने वो कर लिया।
Q, करियर की शुरुआत आपने महेश भट्ट की फिल्म के साथ किया था। उनसे अब संपर्क में हैं?
हां, महेश भट्ट जी से मेरी बात होती रहती है। वो मेरी इस आने वाली फिल्म को लेकर भी बहुत खुश हैं। कुछ महीनों से मेरी उनसे मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन बात होती है हमारी कभी फोन पर, कभी व्हॉट्सएप पर। फिल्मों की बात करें तो अभी 'विशेष फिल्म्स' शायद ज्यादा कुछ बना नहीं रहे हैं।

Q. Rk/Rkay के अलावा किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं?
अभी मैंने एक ओटीटी शो की शूटिंग पूरी की है। गुरमीत सिंह, जिन्होंने मिर्जापुर बनाई है, उन्हीं के निर्देशन में बनी एक सीरीज 'बाउंसर नगर' मैंने अभी पूरी की है। इसकी कहानी हरियाणा की एक लड़की की है, यह एक कॉमेडी ड्रामा है। Rk/Rkay के बाद मेरी यही शो रिलीज हो रही है।
Q. आज के समय में किस तरह के किरदार आपको आकर्षित कर रहे हैं?
एक कलाकार के लिए सबसे खास बात है उन्हें कितने अलग अलग तरह के किरदार निभाने का मौका मिल रहा है। Re-invention जरूरी है। मैं अब वही ग्लैमरस रोल और बोल्ड गाने करना बिल्कुल एन्जॉय नहीं करती हूं। बहुत हो गया। उन फिल्मों ने मुझे बहुत शोहरत दी, बहुत पैसा दिया, लेकिन अब वो गुजरा कल है। अब समय कुछ गंभीर किरदार करने का है, कुछ अच्छे निर्देशकों के साथ। और अच्छी बात ये है कि अब इंडस्ट्री में मौके भी बहुत हैं। मुझे उम्मीद है कि Rk/Rkay के बाद मेकर्स मुझे गंभीर किरदारों के लिए भी अप्रोच करेंगे।
Q. लंबे समय के बाद आप बड़ी स्क्रीन पर नजर आने वाली हैं। थियेट्रिकल रिलीज को लेकर नर्वस हैं?
Rk/Rkay जैसी फिल्म को थियेट्रिकल रिलीज मिल रहा है, मैं तो इसी से खुश हूं। छोटे बजट की फिल्मों को कहां स्क्रीन मिल पाती है। ये मैजिक की तरह है कि ये फिल्म सिनेमाघर में आ रही है। अभी सिर्फ बड़े हीरो की फिल्मों को ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन मिलते हैं। बाकी छोटे बजट की फिल्मों के लिए थियेटर्स में रास्ता बनाना बहुत मुश्किल है।

Q. आज भी फिल्म इंडस्ट्री में सेक्सिज्म से जूझना पड़ता है?
इंडस्ट्री में सेक्सिज्म है और हमेशा रहेगा। आप इससे भाग नहीं सकते और ना ही इसे बदल सकते हैं। बाहर लोगों के सामने अच्छे दिखने के लिए आप जरूर बयान दे देंगे कि स्थिति बदल चुकी है, लेकिन ऐसा है नहीं। ये प्रथा है बॉलीवुड की। इतने सालों से ये जो सिस्टम चलता आ रहा है, ये कुछ महिलाओं या अभिनेत्रियों के कहने से नहीं बदलेगा। लेकिन मेरी अब सोच है कि इसे बदलने के लिए लड़ना भी क्यों है? हम सिस्टम में अपनी जगह बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं। यहां बस मानसिक तौर पर मजबूत बने रहने की जरूरत है, वर्ना ये सिस्टम आपको खा जाएगा।
Q. शुरुआती दौर में आपको भी भेदभाव से जूझना पड़ा था?
मीडिया के एक सेक्शन ने हमेशा मेरा बहुत समर्थन किया है। लेकिन एक समय था जब एक खास वर्ग ने मुझे बहुत बुली (bully) किया। उन्होंने सिर्फ अपनी कहानियों को बेचने के लिए मेरा चरित्र हनन किया। मेरे बारे में झूठ लिखा है। बुलिंग और उत्पीड़न ने वास्तव में मुझ पर भारी असर डाला था। मुझे महसूस हुआ कि मैं अब इससे और नहीं लड़ सकती। मुझे लगा कि अब शायद बदलाव का समय आ गया है, इसलिए मैंने भारत छोड़ दिया। दूसरी संस्कृति और पर्यावरण के बीच मुझे काफी बेहतर महसूस हुआ। अमेरिका में मुझे अपने आत्म विश्वास को दोबारा पाने में बहुत मदद मिली।

Q. सलमान खान से आपकी अच्छी दोस्ती रही है। वो अपने दोस्तों को सपोर्ट करने के लिए काफी चर्चा में रहते हैं। फिल्मों में काम करने को लेकर आपकी कभी उनसे बात नहीं हुई?
नहीं, मैंने कभी उनसे इस बारे में बात नहीं की है। वह मुझे अच्छी तरह से जानते हैं और अगर उनकी नजर में कोई रोल होगा, जो मेरे लायक हो, तो सलमान निश्चित रूप से मुझसे संपर्क करेंगे। मेरे अनुभव में, मुझे लगता है कि जब आप ए-लिस्टर एक्टर्स के साथ काम करते हैं, तो कुछ अलग तरह की डायनामिक्स होती हैं, जिनसे मैं सहज नहीं हूं। यहां मैं सलमान की बात नहीं कर रही हूं क्योंकि मैंने उनके साथ कभी काम नहीं किया है। मैं दुबई में एक बहुत बड़े हीरो के साथ शूट कर रही थी और वो रात को 3 बजे मेरा दरवाजा खटखटाते थे। मैं वास्तव में बहुत डर गई थी। इस तरह की डायनामिक्स में मैं कंफर्टेबल नहीं हूं। मैं बहुत मजबूत व्यक्तित्व हूं और मैं अपने मूल्यों से कभी समझौता नहीं कर सकती। और इसलिए, मुझे लगता है, उन्होंने मुझे अपनी फिल्मों में कभी कास्ट नहीं किया। हालांकि, मैं बहुत खुश हूं, मैंने रजत कपूर की फिल्म में जगह पाई है।

Q. इस दौरान आपके रिलेशनशिप को लेकर भी कई तरह की खबरें रहीं। क्या कहना चाहेंगी?
(हंसते हुए) नहीं, मैं किसी के साथ रिलेशनशिप में नहीं हूं, बिल्कुल सिंगल हूं।
Q. किस तरह के पार्टनर की ख्वाहिश रखती हैं?
कोई ऐसा जिसे अभिनय की दुनिया से कोई परेशानी ना हो, जो मेरी पॉपुलैरिटी से भी सहज हो। बता दूं, सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि बाहर विदेशों में भी मर्दों को स्वतंत्र महिलाओं से काफी परेशानी है। मुझे कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए जो आपको जैसे आप हैं वैसे ही रहने दे, बदलने की कोशिश या बांधने की कोशिश ना करे। ये सबसे महत्वपूर्ण है।

Q. फिल्मों में आने से पहले की जिंदगी से कुछ मिस करती हैं?
मैं अपनी मासूमियत मिस करती हूं। मैं इतनी भोली थी, जब मैं अपने परिवार से बगावत करके मुंबई आई थी तो मुझे लगा कि मैं दुनिया जीत गई। मैंने सिर्फ अपनी अटैची पैक की और आ गई मुंबई.. कि अब मैं दुनिया में नाम कमाउंगी। जबकि ऐसा होता नहीं है। उस वक्त कोई मेरे साथ नहीं था। (हंसते हुए) पैसा आ जाए, शोहरत आ जाए, मर्सिडीज कार आ जाए तो सब खुशी खुशी आ जाते हैं साथ में, स्ट्रगल के वक्त कोई नहीं आता।
Q. आज के समय में किस तरह के संघर्ष का सामना करना पड़ता है?
एक एक्टर की जिंदगी में स्ट्रगल हमेशा चलता रहता है। अच्छी रोल पाने का संघर्ष, अपनी अलग जगह बनाने का संघर्ष.. ये हमेशा रहेगा और ये जानी भी नहीं चाहिए। ये आपको आगे बढ़ने का जुनून देता है।
Q. आपने फिल्म इंडस्ट्री में लंबा वक्त गुजारा है। आज बाहरी दुनिया से फिल्मों में आ रही लड़कियों को क्या मैसेज देना चाहेंगी?
मैं सिर्फ कहूंगी अपने सपनों का पीछा करो। परिवार का दवाब आपको अपने ख्वाबों से दूर नहीं कर सकता है। मैं ये इसीलिए कह रही हूं कि भारत में महिलाओं पर परिवार की ओर बहुत प्रेशर रहता है। परिवार के लिए बहुत तरह के त्याग करने पड़ते हैं। परिवार की इज्जत, परिवार के नाम पर बहुत इमोशनली ब्लैकमेल किया जाता है। इसीलिए मैं सबको कहती हूं कि आर्थिक तौर पर स्वतंत्र होना बहुत ही जरूरी है।


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