Interview:"2 साल तक ऑडिशन देती रही, पिता को लगा थककर एक्टिंग छोड़ दूंगी, लेकिन मैंने हार नहीं मानी" अमृता पुरी
एक्ट्रेस अमृता पुरी इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर अपनी जगह बना में कामयाब हुईं। 'काई पो छे' और 'आयशा' जैसी फिल्मों से उन्हें फेम हासिल हुआ। अब अमृता पुरी अपनी आने वाली वेब सीरीज 'जीत की जिद' के लिए चर्चा में हैं। ये कहानी सच्ची कहानी से प्रेरित है जिसमें कारगिल युद्ध के असली हीरो की स्टोरी को बयां किया गया है। इस सीरीज में सच्चे फौजी की दास्तां के साथ साथ जवान के पीछे उसके परिवार के दर्द और आशाओं को भी दिखाया गया है।
'जीत की जिद' में अमृता पुरी के साथ अमित साध और सुशांत सिंह जैसे अभिनेता भी हैं। ये सीरीज कारगिल युद्ध के हीरो मेजर दीपेंद्र सिंह सेंगर पर आधारित है। जिसमें दीपेंद्र का किरदार अमित साध निभा रहे हैं। वहीं अमृता पुरी मेजर दीप की पत्नी जया का किरदार निभा रही हैं। दर्शकों को ये सीरीज 22 जनवरी को जी5 पर देखने को मिलेगी। इसी सिलसिले में एक्ट्रेस अमृता पुरी ने फिल्मीबीट हिंदी से खास बातचीत की। पढ़िए इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के मुख्य अंश।

आपकी अपकमिंग सीरीज 'जीत की जिद' में क्या खास देखने को मिलेगा?
ये सीरीज दीपेंद्र सिंह सेंगर और उनकी पत्नी जया की असली कहानी से प्रेरित है। एक मिशन पर मेजर दीप बहुत बुरी तरह से घायल हो जाते हैं, जिसके बाद डॉक्टर्स ने भी ये कह दिया था कि शायद वह जीवित न रह सके। लेकिन मेजर के जज्बे ने सभी को चौंका दिया था।
इसके साथ ही दर्शकों को एक लवस्टोरी भी देखने को मिलेगी जोकि दीपेंद्र और जया की है। ये सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं बल्कि एक दूसरे के 'साथ' की कहानी है। जैसा कि सभी जानते हैं कि हमारे जवान देश की रक्षा के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। ठीक इसी प्रकार एक जवान के पीछे उसका परिवार भी होता है जो इसी दर्द के साथ लगातार जीता है। एक फौजी के परिवार की हिम्मत की दाद दी जानी चाहिए। क्योंकि फौजी का सपोर्ट सिस्टम उनका परिवार ही होता है। जिनके बिना शायद वह लड़ न सके।
इस कहानी के असली हीरो दीपेंद्र हैं। जो आज असल जिंदगी में एकदम सही सलामत हैं। वह चलते फिरते भी हैं और मैराथॉन में हिस्सा भी लेते हैं। जबकि एक समय था जब उनके डॉक्टर ने मना कर दिया था कि वह बच नहीं पाएंगे। इसी सच्ची कहानी और जज्बे को 'जीत की जिद' दिखाया गया है। जहां एक सच्चे फौजी के साथ साथ उसके परिवार की भूमिका को भी दिखाया गया है।

सीरीज में आप किस करिदार को निभा रही हैं?
मैं जया का रोल अदा कर रही हूं। ये किरदार इस सीरीज का सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण किरदार है। असल जिंदगी में दीपेंद्र सिंह सेंगर की पत्नी ने ये सब साहा है और इन सब दर्द से गुजरी हैं। वह मेजर दीप से एक बार ही मिली थी और फिर दीप कारगिल युद्ध के लिए चले गए। इसके बाद उनकी शादी होनी थी लेकिन जब वह युद्ध से लौटे तो वह व्हील चेयर पर थे। लेकिन जया ने साहस के साथ कदम उठाया। वह सोचती हैं कि अगर शादी के बाद दीप के साथ ये सब घटित होता तो क्या वह उन्हें छोड़ देतीं। इसीलिए वह जिंदगी से हार नहीं मानती। वह मेजर दीप का उस कठिन समय में पूरा साथ देती हैं।

इस सीरिज या किरदार की किस बात ने आपको सबसे ज्यादा अट्रैक्ट किया?
इस सीरीज की स्ट्रॉन्ग कहानी ने मुझे सबसे ज्यादा अट्रैक्ट किया। दीप घायल हो जाता है, अभी तक दोनों की शादी नहीं हुई है, वहीं सब सोचते हैं कि जया दीप से शादी नहीं करेगी और दोनों का फ्यूचर यही खत्म हो जाएगा? लेकिन जया इस जिंदगी को नई राह देती है। वह जिंदगी से हार नहीं मानती। जया के साथ ने ही दीप को एक बार फिर स्पेशल फॉर्स में भर्ती होने की जिद दी थी। ये कहानी वाकई बहुत ही शानदार है।

एक बार फिर अमित साध के साथ इस सीरीज में काम कर कैसा लग रहा है?
'काई पो छे' के बाद हम दोनों साथ में बात करते रहे, हम दोनों दोस्त भी रहे हैं। 'काई पो छे' के दौरान ही हम दोनों ने सोचा था कि आगे चलकर भी हम साथ में जरूर कभी काम करेंगे। इन सात सालों के बीच हम हमेशा दोस्त रहे हैं।अमित साध सिर्फ अपने केरेक्टर के बारे में ही नहीं सोचते बल्कि वह टीम के बारे में सोचकर चलते हैं। वह चाहते हैं कि हर किरदार शाइन करें और अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस दें। वह एक कलाकार के रूप में सभी को सपोर्ट करते हैं।

आप अपने करियर में किसे सबसे ज्यादा अहम मानती हैं?
मेरी एक कास्टिंग डायरेक्टर रही हैं, जिनको मैं अपने करियर में सबसे अहम मानती हूं। उन्होंने मुझे 'आयशा' के लिए कास्ट किया था। उन्होंने मुझे ऑडिशन में जब बुलाया तो मैंने इस रोल के लिए मना कर दिया था कि ऐसे कौन डेब्यू करता है। ये तो मैन रोल नहीं है। तो मुझे उन्होंने डांटा और समझाया कि बेवकूफ मत बनो, तुम्हें ये रोल करना होगा। मैंने अमिता के डर से आयशा फिल्म के लिए हां कर दिया था। अगर वह नहीं होती

आप एक राइटर भी रही हैं, मैगजीन वगैरह के लिए लिख चुकी हैं, तो कैसे आपने राइटिंग से एक्टिंग में जंप किया?
मुझे भी इस सफर के बारे में पता नहीं चला। जब मैं कॉलेज में थी तो मैंने थिएटर ज्वाइन किया और उस दौरान मैंने प्ले किए। मुझे नाटक करके बहुत अच्छा लगा। लेकिन तब मैंने नहीं सोचा था कि मैं इसे करियर के तौर पर संवारूंगी। क्योंकि इस क्षेत्र में करियर बनाना बहुत कठिन होता है।यहां कभी काम होता है, कभी नहीं होता है। मेरी तो फैमिली में भी कोई मनोरंजन जगत से नहीं जुड़ा है। मेरे फादर भी नहीं चाहते थे कि मैं एक्टर बनूं। मेरे पापा भी कहते थे कि इसे करना है तो साइड में करो। फिर मैंने मास कम्यूनिकेशन किया और मैं जर्नलिस्ट बनने की तैयारी कर रही थी। इसके बाद मेरा विदेश जाकर आगे की पढ़ाई करने का प्लान था। इसी के चलते मैं एक मैग्जीन के लिए भी लिखने लगी। लेकिन मैं डेस्क की नौकरी करके खुश नहीं थी। फिर मैंने सोचा कि मुझे थिएटर के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहिए। तो मैंने फिर ऑडिशन देना शुरू किया। मैं दो साल तक ऑडिशन देती रही। मेरे पिता को लगा कि मैं थककर छोड़ दूंगी। लेकिन मैं जीती, मुझे 'आयशा' मिली।

सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी आपने काम किया है, उनके साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा?
वो फिल्म मेरे लिए बहुत ही स्पेशल थी। हम सभी उस दौरान इंडस्ट्री में नए थे। सभी अपनी जी जान लगाकर करियर संवारने में लगे हुए थे। सभी का ध्यान काम पर होता था।

अगर अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में कुछ बताना चाहें?
'फॉर मोर शॉर्ट्स 3' के लिए मैं फरवरी और मार्च में शूट करने जा रही हूं। इसके बाद मैं एक नई सीरीज में नजर आऊंगी। प्लेटफॉर्म अभी तय नहीं है लेकिन ये भट्ट के साथ होगी। ये मैं पिछले साल शूट कर चुकी हूं। अगले दो तीन महीने में इस सीरीज के साथ फिर हाजिर होंगी।


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