INTERVIEW: रनवे 34, स्टारडम, पैन इंडिया फिल्में और विज्ञापन विवाद पर अजय देवगन- 'यह एक व्यक्तिगत च्वॉइस है'
फिल्म 'रनवे 34' के साथ अजय देवगन ने एक बार फिर निर्देशक की कुर्सी संभाला हैं। उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म थी साल 2016 में आई शिवाय। रनवे 34 में अभिनेता एक पायलट की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। अपने किरदार के बारे में बात करते हुए अजय देवगन कहते हैं- "मैं एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहा हूं जो बुद्धिमान है और एक बेहतरीन पॉयलेट है। लेकिन वो कभी रूल फॉलो नहीं करता है। उसके व्यक्तित्व को हम ग्रे कह सकते हैं। जब वो किसी मुश्किल में फंसता है तो उस कठिन परिस्थिति में क्या करता है.. यही है कहानी। इसमें थोड़ा सा सस्पेंस भी है।"
रनवे 34 में अजय देवगन के साथ अमिताभ बच्चन और रकुल प्रीत सिंह मुख्य किरदारों में हैं। फिल्म ईद के मौके पर 29 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को लेकर अजय बेहद उत्साहित हैं और उनका कहना है कि उन्होंने तकनीकी रूप से भी इस फिल्म में कई नए प्रयोग किये हैं।

फिल्म की रिलीज से पहले अजय देवगन ने मीडिया से खास बातचीत की, जहां उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव, स्टारडम, पैन इंडिया फिल्मों पर खुलकर बातें कीं। साथ ही सुपरस्टार ने विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर हो रहे विवाद पर भी टिप्पणी दी।
यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. अभिनय के अलावा, इस फिल्म से आप बतौर निर्माता और निर्देशक भी जुड़े हैं। कहानी की किस बात ने आकर्षित किया?
ये स्क्रिप्ट मुझे काफी दिलचस्प और मजबूत लगी थी। ऐसी स्क्रिप्ट पर काम करते करते आप उसमें इतना शामिल हो जाते हैं कि आप उसे अपने दिमाग में देखने लगते हैं। शुरुआत से ही मैंने पक्का कर लिया था कि इसे मैं डायरेक्ट करूंगा। दूसरा कारण यह था कि मुझे ऐसी फिल्में करना पसंद है जो चुनौतीपूर्ण हों, इस फिल्म की कहानी बहुत दमदार थी। शिवाय में भी पहाड़ों पर जिस तरह का एक्शन और कैमरावर्क था, वह कुछ ऐसा था जिसे पहले कभी नहीं आजमाया गया था। यहां भी जो ड्रामा कॉकपिट में बनाने की जरूरत थी, उसे करना बहुत आसान काम नहीं था, आप इसे नियमित तरीके से नहीं कर सकते, इसलिए मुझे इस ड्रामा को बनाने के लिए तकनीकी रूप से भी बहुत सी नई चीजें बनानी पड़ीं।

Q. अभिनेता और निर्देशक.. दोनों रोल एक साथ निभाना कितना आसान या मुश्किल होता है?
ऐसे वक्त में मेरे अंदर के अभिनेता को सेट पर बैकसीट लेना पड़ता है क्योंकि उस वक्त मैं निर्देशक हूं, जो अभिनेता को निर्देशित कर रहा है। लेकिन जब आप कैमरे के सामने आते हैं तो एक अभिनेता के तौर पर बाकी सब भूलकर किरदार में डूबना पड़ता है। यह बहुत मेहनत का काम है। लेकिन यदि आपकी प्लानिंग अच्छी है और अपने विचार में आप क्लीयर हैं तो सब सही है।

Q. अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? आप पहली बार उन्हें डायरेक्ट कर रहे हैं।
यह तो सबसे लिए एक सपने जैसा होता है। जिस तरह का प्रदर्शन, जिस तरह का समर्पण वह देते हैं.. वो प्रेरणा लेने योग्य है। वह खुद को पूरी तरह से निर्देशक को समर्पित कर देते हैं। आप जैसा उनको ढ़ालेंगे, वो ढ़ल जाते हैं। वह एक लीजेंड है। साथ ही मैं उन्हें बचपन से जानता हूं तो मेरे साथ उनका तालमेल काफी शानदार है। हम लगातार संपर्क में रहते हैं इसीलिए ऐसा महसूस नहीं होता है कि इतने सालों के बाद साथ काम कर रहे हैं।

फिल्म इंडस्ट्री में तीन दशक गुजारने के बाद, आज स्टारडम या हीरोइज्म को किस तरह देखते हैं?
हीरोइज्म मेरे लिए आत्मविश्वास है। आप किस तरह से खुद को कैरी करते हैं, वह महत्वपूर्ण है। जहां तक स्टारडम की बात है.. तो मैं सिर्फ मेहनत में विश्वास रखता हूं। मुझे लगता है कि आपको मेहनत करनी चाहिए, अपने काम से प्यार करना चाहिए और काम के प्रति सच्चे रहना चाहिए। बाकी किस्मत पर छोड़ दीजिए क्योंकि स्टारडम आपके हाथ में नहीं होती है। जो आपके हाथ में है, वो है सिर्फ मेहनत।

Q. आजकल पैन इंडिया फिल्मों को लेकर जैसा क्रेज है, बतौर निर्माता- निर्देशक इस दिशा में आपकी कोई प्लानिंग है?
पैन इंडिया फिल्में बनाई नहीं जाती हैं, वो बन जाती है। आरआरआर को ही आप देख लें तो वो पैन इंडिया इसीलिए बनी क्योंकि वो राजामौली की फिल्म थी। बाहुबली के बाद वो कुछ ऐसा लेकर आ सकते थे। लेकिन बाहुबली को पैन इंडिया फिल्म जैसा प्लान नहीं किया गया था। वो पहले सफल हुई फिर पैन इंडिया बनी। ठीक वैसे ही जैसे केजीएफ का पहला पार्ट पैन इंडिया नहीं था, लेकिन जब वो फिल्म सफल हुई तो दूसरे पार्ट को बतौर पैन इंडिया फिल्म प्रमोट किया गया। और मुझे लगता है कि फिल्में साउथ या नार्थ की नहीं होती हैं.. दर्शकों के साथ सिर्फ कहानी कनेक्ट करती है। यदि लोगों को कहानी पसंद आ रही है तो फिल्म कमाई करती है, चाहे वो कहीं की भी हो।

Q. कुछ विज्ञापनों को लेकर फैंस नाराजगी जता रहे हैं। आपको भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस पर क्या कहना चाहेंगे?
यह एक व्यक्तिगत च्वॉइस है। जब आप कोई विज्ञापन करते हैं, तो आप यह भी देखते हैं कि यह कितना हानिकारक होगा। कुछ हानिकारक होती हैं, कुछ को हम बना लेते हैं। मैं बिना नाम लिए कहूंगा क्योंकि मैं इसका प्रमोशन नहीं करना चाहता; कि मैं इलायची का विज्ञापन करता हूं। और मुझे लगता है कि यदि कुछ चीजें इतनी ही गलत हैं, तो फिर उन्हें तो बेचा ही नहीं जाना चाहिए ना।


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