'किरदार में दम हो तभी करुंगी खानों के साथ काम'- विद्या बालन

By Sonika

बॉलीवुड में बहुत ही कम ऐसे एक्ट्रेसेस हैं जिन्होंने लगातार एक ही जैसे किरदार ना निभाकर खुद की एक अलग पहचान बनाई है। इन्हीं एक्ट्रेसेस में से एक हैं विद्या बालन। जिन्होंने पा, इश्किया, डर्टी पिक्चर, कहानी जैसी लीक से हटकर फिल्में देने के बाद अब इंडस्ट्री को पहली महिला जासूस देने का भी बीड़ा उठाया है। जी हां अपनी अगली फिल्म बॉबी जासूस में विद्या बालन एक महिला जासूस का किरदार निभाती नज़र आएंगी। चूंकि इंडस्ट्री में अभी तक महिला जासूसों को लेकर की भी फिल्म नहीं बनी है और ना ही महिला जासूसों पर कोई किताब ही लिखी गयी है इसिलए इस किरादर को निभाने के लिए विद्या ने काफी अलग अलग तरीकों से जानकारियां जुटाईं। हाल ही में वनइंडिया के साथ हुए इंटरव्यू के दौरान विद्या ने काफी दिलचस्प बातें हमारे साथ शेयर कीं-

महिला जासूस का किरदार निभाने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ी आपको। चूंकि महिला जासूसों पर अभी तक ना ही कोई नॉवेल बनी है और ना ही कोई फिल्म तो कितना मुश्किल था इस किरदार के लिए तैयारी करना?

कोई भी रिफरेंस नहीं था। जासूसों के लिए रिफरेंसेस थे लेकिन मैंने कोई भी रिफरेंस यूज नहीं किया। इतने सालों में अभी तक कई सारी फिल्में देखी हैं, किताबें पढ़ी हैं, तो बस उन्हें ही रिफरेंस के रुप में यूज किया। मै बस अपनी पुरानी यादों में गयी और वहां से जो कुछ भी मेरे दिमाग में था। बॉबी जासूस की जो लेखिका थीं संयुक्ता चावला शेख ने काफी रिसर्च की होगी क्योंकि उन्होंने कहानी में पूरी डीटेल डाल दी थीं। साथ ही निर्देशक के साथ मैंने काफी वक्त दिलाया उनके पास वो सारी जानकारियां थीं जिनकी मुझे जरुरत थी। मैंने इंटरनेट से कुछ डिटेक्टिव एजेंसियों के नंबर लेकर उन्हें फोन करके भी पता किया कि वो किसी केस को लेने से पहले किस तरह के सवाल पूछते हैं।

बॉबी जासूस के लिए 12 लुक्स किस आधार पर चुने गये?

हमने काफी वक्त बिताया फाइनल 12 लुक्स डिसाइड करने में। हर एक किरदार को दूसरे किरदार से अलग दिखाना था। सिर्फ दाढ़ी मूंछ लगाकर ही खुद को मर्द बनाकर नहीं बैठना था। बल्कि लुक ऐसा होना चाहिए था कि कोई पहचान ही ना सके। हर लुक अलग होना चाहिए था। इसलिए हमने पियून, मौलवी, ज्योतिष, भिखारी, चूड़ीवाला और कुछ फीमेल किरदारों के लुक चुने। किसी भी एक्टर के लिए ये एक बेहतरीन मौका था। एक ही फिल्म में मुझे कई सारे किरदार निभाने का मौका मिला।

महिला जासूसों पर अब तक कोई फिल्म नहीं बनी है। बॉबी जासूस को करते समय किसी तरह का रिस्क नहीं महसूस हुआ?

बॉबी जासूस में वो सारे एलिमेंट्स हैं जो कि आप अपने परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं इंज्वॉय कर सकते हैं। मैं अपने परिवार के साथ बैठकर ये फिल्म देख सकती हूं। बहूत ही साफ सुथरी और फैमिली एंटरटेनर फिल्म है बॉबी जासूस। वैसे भी मैं कभी भी रिस्क के बारे में नहीं सोचती कि किसी और ने नहीं किया तो कहीं मैं फेल ना हो जाऊं।

अली आपसे बहुत ही जूनियर कलाकार हैं। उन्हें लेकर की सवाल नहीं आया कि इनके साथ फिल्म करना सही होगा या नहीं, कैमिस्ट्री बनेगी या नहीं?

सच बोलूं तो बॉबी जासूस से पहले मैंने उनकी कोई फिल्म नहीं देखी थी। मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वो कौन हैं। साहिल बाकी क्रू कास्टिंग से काफी खुश और संतुष्ट थे। अगर निर्देशक संतुष्ट है तो फिर मैं कभी भी कास्टिंग को लेकर नहीं सोचती। हमने काफी वर्कशॉप की जिनके दौरान अली, मैं और बाकी पूरी कास्ट के बीच एक अच्छा रिश्ता बन गया। हम सभी एक दूसरे को जानने लगे। हम एक दूसरे के साथ काम करने में काफी कंफरटेबल हो गये। एक्टिंग की बात करें तो अली एक बेहतरीन और गुड लुकिंग एक्टर है।

खुद से काफी यंग एक्टर के साथ रोमांस करने का एक्सपीरिंयस कैसा रहा, किसी तरह की झिझक महसूस हुई शूटिंग के दौरान?

(हंसते हुए) जब हम शूट के समय रोमांस करते हैं तो कुछ महसूस नहीं होता। और वैसे भी रोमांस करने की कोई उम्र थोड़े ना होती है। शूट करते समय सिर्फ ये ध्यान रहता है कि अपना शॉट ओके करना है बाकी फिर किसकी क्या उम्र है ये सब ध्यान नहीं रहता। मुझे कोई मुश्किल नहीं हुई।

क्या आपको जासूस किताबें पढ़ने का शौक था जो आपने बॉबी जासूस करने में उत्सुकता दिखाई?

जासूसी फिल्में बहुत ही रोमांचक होती हैं, मुझे बचपन से कोई जासूसी किताबें पढ़ने का शौक तो नहीं था लेकिन बॉबी जाससू की कहानी मुझे काफी पसंद आई क्योंकि ये सिर्फ एक रोमांचक जासूस कहानी नहीं है बल्कि इसमें काफी इमोशन भी हैं। बॉबी जासूस एक लड़की की भी कहानी है जो कि हैदराबाद के एक छोटे से गांव से है और जो अपने मोहल्ले की सबसे बड़ी जासूस बनना चाहती है। वो देश भर की सबसे बड़ी जासूस बनने का सपना नहीं रखती है। बाकी जासूसी फिल्मों की तरह बॉबी जासूस में भी थ्रिलर और रोमांचक पहलू हैं लेकिन इसमें जो लड़की है वो काफी मनोरंजक है। शॉर्ट में कहूं तो वो पटाखा है।

बॉबी जासूस में आपके अलग अलग किरदारों को देखकर आपके परिवार का क्या रिएक्शन था?

उन्हें यकीन नहीं था लेकिन उन्होंने जब पहली बार देखा तो वो काफी खुश हुए। हैदराबाद में मैं जब शूट कर रही थी तो सभी को ये पता था कि मैं बॉबी जासूस नाम की फिल्म कर रही हूं लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि क्या है बॉबी जासूस में। पहली बार जब बॉबी जासूस की तस्वीर अखबारों में छपी तो मेरे पिताजी ने सबसे पहले वो तस्वीर देखी और कहा कि कुछ है इस तस्वीर में। ये किसी जान पहचान वाली की तस्वीर है। तब उन्होंने जब ये पढ़ा की ये विद्या बालन की बॉबी जासूस की तस्वीर है तो वो काफी हैरान हुए और साथ ही खुश भी हुए। परिवार में सभी ने काफी तारीफ की।

बतौर ऐक्टर भी आपने दिया के साथ काम किया है और अब बतौर निर्माता दिया मिर्जा बॉबी जासूस से जुड़ी हैं। कैसा अनुभव रहा?

मैंने दिया के साथ बतौर एक्टर भी काम किया है। हालांकि जो भी फिल्में हमने साथ में की हैं उनमें हमारा साथ में कोई सीन नहीं था लेकिन सेट पर मुलाकात होती रहती थी। वो एक बहुत ही बेहतरीन इंसान हैं। हमारे बीच दोस्ती तो नहीं कह सकती लेकिन हमारे बीच काफी करीबी रिश्ता जरुर बन गया। बतौर निर्माता दिया काफी अच्छी हैं। मुझे यकीन ही नहीं होता कि दिया और साहिल की ये दूसरी फिल्म है बतौर निर्माता। निर्माता का काम होता है कि वो एक्टर मैनेजमेंट करे और दिया व साहिल दोनों ही इस मामले में काफी बेहतरीन हैं। हमने 50 दिनों में बॉबी जासूस की शूटिंग खत्म कर ली, हम करीब 45 दिनों तक अपने दोस्तों, परिवार से दूर थे लेकिन किसी के भी अंदर वो सोच नहीं थी कि यार कब खत्म हो रहा है। घर की याद आ रही है। हम सभी ने एक दूसरे के साथ काफी मजे किये।

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