ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3 Exclusive: किसिंग सीन पर मां-पिता को समझाया 40 लोग सेट पर होते हैं-सोनिया राठी

आई एम वाॅरियर, जीत लूंगी जो मेरा है। ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3 में रूमी की इस सोच से सहमत हैं सोनिया राठी। फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के साथ ही सोनिया राठी ने खुद के करियर के बायोडाटा पर ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3 जैसी लोकप्रिय सीरीज का नाम लिखवा लिया है। सोनिया का कहना है कि मेरे ख्याल से जो किस्मत मे होगा वो होकर रहेगा, उसे कोई छीन नहीं सकता।

मैं इसी सोच के साथ इंडस्ट्री में जा रही हूं। मैं योद्धा हूं। जो चाहिए मुझे उम्मीद है कि वो मिल जाएगा। डिग्री हासिल करने के बाद भी मैंने खुद के लिए कोई प्लान बी नहीं रखा। अगर आपके पास दूसरा प्लान हो तो पहला रास्ता कमजोर हो जाता है। सोनिया राठी ने जब इस सोच के साथ फिल्मीबीट हिंदी से खास बातचीत की शुरुआत की तो इसका अंदाजा जरूर हो गया कि पूरा साक्षात्कार भी दिलचस्प होने वाला है।

Sonia rathee

कोरोना महामारी के दौरान इंडस्ट्री ने मजबूरी में अपना काम करने का तरीका बदला। इसी का फायदा मिला है सोनिया राठी को। ज्यादा कुछ ना कहते हुए चलिए बढ़ते हैं सोनिया राठी से हुई इस बातचीत की तरफ। जहां उन्होंने 'कटी पतंग' को 12 बार देखने से लेकर सिद्धार्थ शुक्ला के साथ किसिंग सीन पर भी बात की है।

रोलर कोस्टर राइड जैसी है ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3 की कहानी

रोलर कोस्टर राइड जैसी है ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3 की कहानी

ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3 प्यार-दर्द और नफरत की रोलर कोस्टर राइड वाली कहानी हैं।रूमी और अगस्त्य के किरदार में हर फ्रेम में कई तरह के लेयर हैं। रूमी को निभाना मेरे लिए मुश्किल रहा।रूमी अपने हर रिश्ते के साथ अलग है। माता-पिता ,भाई बहन और अगस्त्य के साथ रिश्ते हैं वो भिन्न है। भीतर से वो एक बच्ची की तरह है। उसके अंदर बहुत गुस्सा। नाउम्मीदी है उसमें वो प्यार भी है। इस किरदार को समझने के बाद कैमरे के सामने निभाने में मुझे वक़्त लगा। उम्मीद है कि मैंने उसे पूरा किया।

लोकप्रिय सीरीज से जुड़ने का कोई दबाव नहीं था मुझ पर

लोकप्रिय सीरीज से जुड़ने का कोई दबाव नहीं था मुझ पर

मैंने ब्रोकन बट ब्यूटीफुल के दोनों भाग देख रखे हैं। मैं विक्रांत मैसी और हरलीन सेठी की बहुत बड़ी फैन हूं। मेरे ख्याल से उन्होंने लाजवाब परफॉरमेंस दिया था। मैं खुशनसीब हूं कि रूमी और अगस्त्य की कहानी पिछले सीरीज के वीर-समीरा से भिन्न है। तो ऐसा नहीं था कि मुझे हूबहू विक्रांत और हरलीन की तरह परफॉर्म करना नहीं।

अगर ऐसा होता तो, पता नहीं कैसे करती। खुशनसीब हूं कि मुझ पर लोकप्रिय सीरीज में होने का कोई दबाव नहीं था। मैंने खुद को भी शूटिंग के दौरान दबाव के ख्यालात से भी दूर रखा। लेकिन हां, पूरी सीरीज के साथ मुझ पर ये जिम्मेदारी रही कि मैं अपने किरदार और कहानी के साथ इंसाफ कर सकूं।

यूएस में बैठकर कोरोना के कारण मिला ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3

यूएस में बैठकर कोरोना के कारण मिला ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3

जब मुझे ब्रोकन बट ब्यूटीफुल 3 के बारे में जानकारी मिली तो मैं यूएस में थी। हालांकि कोरोना वायरस के कारण उस वक़्त भारत में फिल्म इंडस्ट्री के काम करने का तरीका बदला हुआ था। सामने जाकर ऑडिशन देने की बजाए ऑनलाइन ऑडिशन लिए गए। ये इतना आसान नहीं होता है। सामने ऑडिशन के दौरान कास्टिंग निर्देशक सुझाव भी देते हैं। ऑनलाइन में खुद ही समझकर करना होता है।

खैर, तीन बार ऑडिशन हुआ। दो सप्ताह के बाद मुझे प्रोडक्शन से कॅाल आया। मुझे किरदार मिल गया। मैं हमेशा सोचती थी कि यूएस मैं बैठकर मैं कैसे आडिशन दूंगी, लेकिन कोरोना के कारण ये हो पाया।

कॅालेज में आयी तो रियलिटी का सामना हुआ, लगा एक्टिंग तो सपना है

कॅालेज में आयी तो रियलिटी का सामना हुआ, लगा एक्टिंग तो सपना है

फिल्मों को लेकर पागलपन कहां से आया, ये मुझे याद ही नहीं। मुझसे ज्यादा मेरा भाई अंकुर राठी फिल्मों को लेकर क्रेजी है। अंकुर ने कॅालेज में तय किया कि उसे एक्टर बनना है। मुझे हमेशा से एक्ट्रेस बनना था।। मुझे कभी कोई दूसरा पर्याय नहीं दिखा। मैंने फाइनेंस और मार्केटिंग में डिग्री हासिल की। जब मैं कॅालेज में आयी तो दबाव आ जाता है, एकरियलिटी चेक मिल गया।

मैंने सोचा कि एक्टिंग तो मेरे लिए सपना है। नौकरी भी करनी चाहिए। फिर, मेरे दिमाग से जो सपना था वो कभी गया नहीं। मेरा मानना है कि कुछ चीज अगर आप करने की कोशिश नहीं करेंगे तो एक पछतावा नहीं होना चाहिए। मैंने फिर ठान लिया और एक्टिंग की तरफ अपने कदम बढ़ाया।

कटी पतंग 12 बार देखी है, माधुरी दीक्षित से तो प्यार हो गया

कटी पतंग 12 बार देखी है, माधुरी दीक्षित से तो प्यार हो गया

बचपन की तरफ जाऊं तो पापा फिल्मों का शौक रखते हैं। कटी पतंग उनकी पसंदीदा फ़िल्म है। मैंने उनके साथ बैठकर कटीपतंग 12 बार देखी है। उनकी वजह से हम भी बचपन से बहुत सारी फिल्में देखते आ रहे हैं। एक जुड़ाव और रिश्ता हो गया हमारा फिल्मों से। मैंने माधुरी दीक्षित की कई फिल्में देखी हैं मुझे उनसे प्यार हो गया।

जब मैं उन्हें देखती थी तो सपना आ जाता था कि काश, मैं एक दिन वैसा कर पाऊं। मैं बचपन से फिल्मों से प्रेरित रही हूं। हम जब देखते थे तो सोचते हैं कि एक दिन हम भी एक स्क्रीन पर होंगे। आखिरकार वो सपना पूरा हो रहा है।

बोल्ड सीन हुआ तो परिवार से मांगनी होगी इजाजत

बोल्ड सीन हुआ तो परिवार से मांगनी होगी इजाजत

इस मामले में भी मैं खुशनसीब हूं कि कलाकारों के लिए मौके बढ़ गए है। फिल्म के साथ वेब सीरीज का मार्केट भी है। मैं अपनी सोच के आधार पर काम करते हुए आगे बढ़ना चाहती हूं। बोल्ड सीन्स को लेकर भी एक रेखा खींच दी हैं मैंने। स्क्रिप्ट की जरूरत के हिसाब से इस तरह के सीन के लिए तैयार रहूंगी। जब अंकुर ने तीन साल पहलेफोर मोर शॉर्ट्स में ऐसे सीन्स दिए थे तो मेरी मां देख नहीं पाई थीं।

मेरा परिवार भी इसे समझता है। जब मैंने और भाई अंकुर ने उनसे बताया की ये सच नहीं होता। 40 लोग सेट पर होते हैं और कोरियोग्राफी की तरह ये होता है।रही बात परिवार के इजाजत की तो वो बहुत ही सहायक हैं। ब्रोकन बट ब्यूटीफुल में तो सिर्फ किंसिंग का सीन है। इसमें कोई पागलपन नहीं है। अगर इससे कुछ ज्यादा होता तो मैं माता-पिता से इसके लिए इजाजत मांगती।

आउटसाइडर होने के नाते मौका मिल रहा है लेकिन लढ़ाई जारी है

आउटसाइडर होने के नाते मौका मिल रहा है लेकिन लढ़ाई जारी है

आउटसाइडरहोने के नाते मुझे लगता है कि जो ओटीटी प्लेटफॅार्म आए हैं। वोमौका ला रहे हैं पहले से अधिक। मेरा भाई छह साल पहले गए था, तब सिर्फ फिल्म और टीवी एड थे।वो बहुत मुश्किल था। क्योंकि इंडस्ट्री में अपना रास्ताखोजना कठिन है, खासकर फिल्मों में। मैं लकी हूं कि एक अच्छे समय पर आ रही हूं। संघर्ष होते ही हैं जैसे- किस कास्टिंग डायरेक्टर से बात करनी है, ऑडिशन की कितनी लंबी कतार है, और भी बहुत कुछ। इसके लिए लगातार हमें लढ़ते रहना है।

नेपोटिज्म के सवाल पर सोनिया ने कहा- वो हैं तो कोई वजह है

नेपोटिज्म के सवाल पर सोनिया ने कहा- वो हैं तो कोई वजह है

नेपोटिज्म में कितना यकीन है, इस आखिरी सवाल पर सोनिया राठी ने कहा किमेरे ख्याल से मैं कई दफा सोचती हूं कि अगर मेरे माता या पिता एक्टर होते औरवो मुझसे आकर बोलते कि बेटा एक्टर बनना है या मैं एक फिल्म बना रहा हूंतू एक्टिंग कर ले, तो मैं पागल होती, अगर मैं ना बोल देती। यही वजह है कि मैं किसी को दोष नहीं देती। उनके पास दर्शक हैं। अगर दर्शक नहीं होते तो वो भी नहीं होते। वो वहां है, तो किसी कारण से हैं, यह मेरा विश्वास है।

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