Exclusive शर्माजी नमकीन: ऋषि कपूर जी के फैसले से मैं नाखुश था, फिर उन्होंने अपना जादू दिखाया
ऋषि कपूर जी ने तय कर लिया था कि उन्हें सीन अपने तरीके से करना है। मैं यह सुनकर नाखुश हुआ। फिर जब ऋषि जी ने सीन पूरा किया तब मुझे अहसास हुआ कि मैं किस लेजेंड के साथ काम कर रहा हूं। यह कहना है शर्माजी नमकीन के निर्देशक हितेश भाटिया का। ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म शर्मा जी नमकीन का निर्देशन हितेश भाटिया ने किया है। हितेश भाटिया ने अपनी डेब्यू फिल्म की कहानी यही सोच कर लिखी थी कि इसके हीरो होंगे ऋषि कपूर। वक्त को कुछ और मंजूर था। ऋषि कपूर के निधन के बाद अपनी डेब्यू फिल्म का सपना हितेश भाटिया के लिए ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म बन गया। यहां पढ़िए Filmibeat Hindi फिल्मीबीट हिंदी से हितेश भाटिया की खास बातचीत।

एक रिटायर आदमी की कहानी और मुख्य भूमिका में ऋषि कपूर की कास्टिंग का ख्याल कब और कैसे आया?
शर्मा जी नमकीन मेरी डेब्यू फिल्म है। मैंने अपने निजी जिंदगी से यह फिल्म उठाई है। शर्माजी नमकीन की कहानी मेरे पिता के जीवन से प्रेरित होकर मैंने लिखी है। मुझे मेरी डेब्यू फिल्म के लिए ऐसी कहानी चाहिए थी जो दिल से जुड़ी हो।। इसी बीच मेरे पिता काम से रिटायर हुए। उस वक्त अपने पिता की मदद करते हुए मुझे महसूस हुआ कि उनके पास काम ना होने की गंभीर समस्या है। अचानक से मुझे यह महसूस हुआ कि ऐसी ही कहानी मुझे डेब्यू फिल्म के लिए चाहिए। ऋषि कपूर और जूही चावला को ध्यान में रखते हुए ही इस फिल्म की पूरी कहानी लिखी गई है। हमारी किस्मत अच्छी है कि कहानी सुनने के बाद दोनों ने हां बोल दिया।
ऋषि कपूर के पास जब आप कहानी लेकर गए, तो क्या उन्होंने तुरंत इसके लिए हामी भर दी ?
ऋषि जी को पहले नरेशन में ही कहानी बहुत पसंद आ गई। उन्हें यह लगा कि शर्माजी नमकीन में एक भावुक संदेश है। मजबूत कहानी है। हालांकि फिल्म का दूसरा हाफ उन्हें अच्छा नहीं लगा। उनका कहना था कि कहानी का दूसरा भाग कच्चा है। उन्होंने कहा कि इस पर अभी काम करना चाहिए। वह इस फिल्म को लेकर उत्साहित थे। उन्होंने हमें फोन करके मिलने के लिए बुलाया था। फिर दूसरे हाफ को भी सुधार कर हम उनके पास लेकर गए। तब उन्होंने शर्मा जी नमकीन को लेकर हामी भरी।
यह कब तय हुआ कि ऋषि जी के बदले परेश रावल को कास्ट करना है ?
शर्मा जी नमकीन फिल्म के लिए जब ऋषि कपूर जी की तबीयत खराब हुई थी तो उनके बजाए किसी और एक्टर को लेने की बात नहीं हुई थी। ना कोई कारण था। ऋषि जी के देहांत के बाद ही यह निर्णय लिया गया कि किसी भी तरह उनकी आखिरी फिल्म को पूरा करना है। उनके फैंस के सामने लेकर जाना है। उसके लिए क्या रास्ता होगा इस पर चर्चा हुई और फिर तय हुआ कि दूसरे एक्टर को उनके किरदार के लिए कास्ट किया जाएगा। मेकर्स और हमारे बीच यह तय हुआ कि परेश रावल ही इसके लिए सही होंगे। परेश रावल इस किरदार के साथ इंसाफ कर पायेंगे। अगर हम पूरी फिल्म परेश जी के साथ शूटिंग करेंगे तो वह एक नई फिल्म होती। वो फिर ऋषि कपूर की फिल्म नहीं रहती।
परेश रावल के पास जब फिल्म का प्रस्ताव गया तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
पहले परेश जी ने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी। शर्माजी नमकीन है का नरेशन सुना। उन्हें कहानी बेहद पसंद आयी। उनका भी यही कहना था कि ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म बननी चाहिए। दुनिया के सामने आनी चाहिए। स्क्रिप्ट और ऋषि कपूर जी की आखिरी फिल्म इन दोनों वजह से परेश रावल ने हामी भरी।
ऋषि कपूर जी के साथ शूटिंग के दौरान का कोई यादगार किस्सा?
शर्माजी नमकीन में एक सीन है, जो कि शर्मा जी और उनके बेटे के बीच है। मैंने इस सीन को लेकर योजना बनाई थी। ऋषि जी को इसे अपने तरीके से करना था। इसे लेकर हमारे बीच काफी चर्चा हुई। मैं ऋषि जी के फैसले से नाखुश था। मैंने तय किया कि एक टेक हो जाए उसके बाद देखेंगे कि कैसा क्या करना है, लेकिन जब वो सीन हुआ, वो इतना जादुई था कि मुझे एहसास हुआ कि किसके साथ काम कर रहा हूं। जो ज्ञान ऋषि कपूर जी को था, हम उसके आस-पास भी कहीं नहीं पहुंचे थे। उस सीन के बाद मेरी आंख खुल गई। रणबीर कपूर और उनके परिवार को भी फिल्म काफी अच्छी लगी। उनके लिए बहुत भावुक पल था।


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