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Exclusive Interview सलमान सर ने कहा- रोना नहीं है, मजबूती से खड़ा रहना है- अनुप्रिया गोयनका

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किसी भी कलाकार के बायोडाटा पर स्टार्स से लकदक फिल्मों का नाम होने के बाद भी चर्चा में आना आसान नहीं है। बिग स्टार्स से सजी फिल्मों में खुद को स्थापित करने की काबिलियत चुनिंदा कलाकारों में होती है। इस फेहरिस्त में खुद को साबित किया है अनुप्रिया गोयनका ने।

'टाइगर जिंदा है' की नर्स 'पूर्णा', पद्मावत' में राजा रावल रतन सिंह की पहली रानी 'नागमती' की भूमिका में खुद को बखूबी दर्शाने के बाद, अनुप्रिया सेक्रेड गेम्स 2 में मेघा बनकर लौट आयी हैं। अनुप्रिया खुश होने के साथ हैरान भी हैं कि फिल्मों के चयन में वह अब तक गलत साबित नहीं हुई हैं।

स्टार्स से लदी हुई कहानी में किरदार ने बतौर एक्ट्रेस उन्हें बढ़त और फेम दिया है। फिल्मीबीट से हुई खास बातचीत में अनुप्रिया गोयनका ने 'सेक्रेड गेम्स 2' के साथ अपने अब तक के सफर पर रोशनी डाली है। चलिए जानते हैं अनुप्रिया की जुबानी उनके दिलचस्प सफर की कहानी...

सेक्रेड गेम्स किरदारों की कहानी है

सेक्रेड गेम्स किरदारों की कहानी है

सेक्रेड गेम्स किरदारों की कहानी है। पार्ट 2 में मेरा किरदार कहानी को दिलचस्प जरूर बनाएगा। मैं इस बारे में ज्यादा नहीं बता सकती। पहले सीजन में मेरे काफी सीन की शूटिंग हुई थी। शायद,मेकर्स सरताज की निजी जिंदगी में तब नहीं जाना चाहते थे। हमें पता था सेक्रेड गेम्स कमाल दिखाएगा। अनुराग कश्यप और विक्रमादित्या मोटवानी इससे जुड़े हैं। वरूण ग्रोवर ने सीरीज को उम्दा लिखा है ।पूरी टीम तंदरुस्त है। राइटिंग सीरीज की जान है। हर किरदार को बखूबी लिखा गया है।

क्या पता कल मौका नहीं मिला तो..

क्या पता कल मौका नहीं मिला तो..

मेरे लिए किरदार हमेशा अहम रहा है। टाइगर जिंदा है और पद्मावत के समय भी मेरा ध्यान इसी पर रहा है। मेरे लिए आज भी दुविधा रहती है। किरदारों का चयन करना आसान नहीं है। कई बार ऐसी फिल्मों को मना भी करना पड़ता है जिसमें सबकुछ काफी बड़ा हो। शुक्र है मेरा फैसला हमेशा मेरे लिए काम आया है। कई बार ऐसा भी सोचती हूं कि आज इतने प्रतिभावान निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। क्या पता कल नहीं मिला तो।

एडिट पर कलाकारों का भविष्य तय होता है

एडिट पर कलाकारों का भविष्य तय होता है

रिस्क पर कलाकारों को काम करना पड़ता है। इंडस्ट्री में दूसरा मौका मिलना कठिन है। मैंने काफी रिस्क लिया है। फिल्म की शूटिंग करने के बाद एडिट पर कलाकारों का भविष्य तय होता है। पद्मावत के दौरान मेरे काफी सीन शूट किए गए थे। उन्हें दिखाने के लिए जगह नहीं बची थी।खुद रानी पद्मावती का सफर इतना लंबा रहा है कि उनपर फोकस करना जरूरी था। खैर, मेरा अनुभव शानदार रहा। फिल्म में मेरे काम को सराहा गया। इसके बाद कई मौके मुझे मिले हैं।

फिल्म की कहानी स्टार्स से चलती है...

फिल्म की कहानी स्टार्स से चलती है...

सोचती हूं तो ताज्जुब होता है। मेरी सोच कभी बिग स्टार्स की फिल्में नहीं रही हैं। पता नहीं कैसे टाइगर जिंदा है, पद्मावत,सेक्रेड गेम्स जैसे बिग प्रोजेक्ट का हिस्सा मैं बनते चली गई। ये भी सोचना होता है कि इतने बड़े स्टार का फिल्म में सेटअप है ऐसे में मैं कहां दिखूंगी। तब किरदार हमें खड़ा करता है। फिल्म की कहानी स्टार्स से चलती है। मैं फिर सोचती हूं कि क्या मेरा किरदार कहानी को आगे लेकर जा रहा है या नहीं। अगर जवाब नहीं आता है तो मैं वो फिल्में नहीं करती हूं।

मुख्य कलाकार के साथ जुड़ाव अलग होता है

मुख्य कलाकार के साथ जुड़ाव अलग होता है

मेरे लिए संघर्ष अभी भी जारी है। मैंने लाइफ ऐसी देखी है कि मुझे कभी ये नही लगा कि मैं आते ही स्टार बन जाऊंगी। इतना मुश्किल होता है ये भी नहीं पता था। काम पाने के लिए इतनी मेहनत करनी होती है। इसका इल्म यहां आकर हुआ। मेरी आदर्श नंदिता दास ,स्मिता पाटिल रही हैं। यर्थाथवादी सिनेना मेरी प्राथमिकता है। फिल्ममेकिंग की हर प्रक्रिया मुश्किल रहती है। आज की तारीख में मुझे सब करना है। मुझे लीड रोल करना है। मुख्य कलाकार के साथ निर्देशक का कनेक्शन अलग होता है।

सलमान सर ने मुझसे कहा...

सलमान सर ने मुझसे कहा...

जब सेट पर स्टार्स होते हैं तो मैं उन्हें परेशान नहीं करती हूं। स्टार्स की तरफ से मुझे मौन सराहना मिलती है। आपको बता दूं कि टाइगर जिंदा है के समय मुझे बम का सीन करना था। समझ नहीं आ रहा था कि मुझे इमोशनल होना है या मजबूत दिखना है। तभी सलमान सर ने कहा कि तुम्हें रोना नहीं है..मजबूत खड़े रहना है। तुरंत उनकी इस मदद से मुझे उस सीन की भावना समझ में आ गई। ठीक इसी तरह दीपिका पादूकोण और शाहिद कपूर और संजय लीला भंसाली सर ने काफी मदद की है मेरे काम की प्रशंसा भी की। नए कलाकारों के लिए ये आगे बढ़ने में काफी सहायक होता है। हमारे पास कोई गाइड करने वाला नहीं होता। यही है जो हौसला बनाए रखता है।

वो कलाकार दब गए..दुख होता है

वो कलाकार दब गए..दुख होता है

बॅालीवुड अब बदल गया है। अब ऐसे कलाकारों की जरूरत है जो चार तरह के इमोशन स्क्रीन पर दिखा सके। जो कहानी में किरदार का स्कोप दिखाने में सफल हो। फिर किरदार की लंबाई मायने नहीं रखती। एक कलाकार में अब लोग 10 तरह के इमोशन देखना चाहते हैं। ग्राफ जरूरी हो गया है। दुख होता है कि आज से 10 साल पहले कलाकारों के साथ ये हानि रही है कि उन्हें ऐसा मौका नहीं मिला। कई प्रतिभाशाली कलाकार दब कर रह गए। आज टीवी है। वेब है। सिनेमा है। कमर्शियल सिनेमा भी मिनिंग फुल बन गया है। ये हमारे लिए सुनहरा समय है।

English summary
In an Exclusive Interview Sacred games 2 fame anupriya goenka talks about her super hit journey till now salman khan much more
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