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    EXCLUSIVE INTERVIEW: रिजेक्शन ने बहुत दिल तोड़ा है, 13 साल की मेहनत के बाद यहां पहुंचा हूं- पावेल गुलाटी

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    एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का वक्त गुजार चुके अभिनेता पावेल गुलाटी अपनी आगामी फिल्म 'दोबारा' को लेकर बेहद उत्साहित हैं, जिसका निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है। अनुराग को अपने करियर में महत्वपूर्ण मानते हुए पावेल कहते हैं, "उन्होंने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया है। उन्होंने एक बार मुझसे कहा था कि मैं बड़ी और बेहतर चीजों के लिए बना हूं। मैं खुश हूं कि उन्होंने मुझे दोबारा जैसी फिल्म में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया।"

    'थप्पड़' के बाद, पावेल इस फिल्म में एक बार फिर तापसी पन्नू के साथ नजर आएंगे। अपनी सह कलाकार के बारे में बात करते हुए पावेल करते हैं, "मुझे तापसी की सबसे अच्छी बात लगती है कि वो सीधे दिल से बोलती है और अपने काम के प्रति बहुत ईमानदार है। हम एक-दूसरे के साथ बहुत सहज हैं और कलाकार के रूप में हम दोनों ही प्रयोग करना पसंद करते हैं।"

    'दोबारा' की रिलीज से पहले पावेल गुलाटी ने फिल्मीबीट से विशेष बातचीत की है, जहां उन्होंने तापसी पन्नू के साथ अपनी दोस्ती, फिल्मों में अपने सफर, नेपोटिज्म और रिजेक्शन से लेकर अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर करने के अपने अनुभव को लेकर खुलकर बातें की हैं। अभिनेता कहते हैं, "आज मैं जिस मुकाम पर हूं, वहां पहुंचने में मुझे 12-13 साल लगे। इसीलिए मैं आगे सही प्रोजेक्ट्स का चुनाव करना चाहता हूं। एक अभिनेता के रूप में मैं प्रयोग भी करना चाहता हूं। मैं उन बेहतरीन लोगों के साथ काम करना चाहता हूं, जिन्हें मैंने इतने सालों तक दूर से देखा है।"

    यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

    Q. तापसी पन्नू के साथ ये आपकी दूसरी फिल्म है। बतौर सह कलाकार उनके साथ काम करना कैसा अनुभव रहा?

    Q. तापसी पन्नू के साथ ये आपकी दूसरी फिल्म है। बतौर सह कलाकार उनके साथ काम करना कैसा अनुभव रहा?

    (हंसते हुए) तापसी ने पहली फिल्म (थप्पड़) के दौरान भी पूरे समय मुझे परेशान किया था और दूसरी फिल्म के समय भी पूरे टाइम बुली किया है। लेकिन वो बुली भी इसीलिए करती हैं क्योंकि वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं और मेरी केयर करती हैं। पहली फिल्म के दौरान ही हमारी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी और ये बहुत कम होता है कि आप किसी के साथ काम करते हो और वो दोस्ती इतने लंबे वक्त के लिए टिक जाए। ज्यादातर ऐसा होता है कि आप फिल्म खत्म करते हो, उसके बाद दोस्ती मुश्किल से एक महीने, दो महीने तक चलती है। फिर आपके रास्ते अलग हो जाते हैं। तो हम खुश हैं कि वक्त के साथ हमारी दोस्ती और पक्की होती जा रही है। इसका यह भी कारण है कि हमारे बैकग्राउंड बहुत एक जैसे हैं। दोनों दिल्ली से हैं, इतने साल संघर्ष करके यहां तक पहुंचे हैं, तो हम एक दूसरे को अच्छी तरह समझ पाते हैं। मैं तो अपने काफी दुख दर्द उसके साथ बांटता हूं। तो हां, उनके साथ काम करना हमेशा ही शानदार अनुभव रहा है। साथ ही वो इतने लोगों के लिए रोल मॉडल हैं। बहुत कम अभिनेत्रियां रही हैं, जो किसी फिल्म को अपने कंधे पर उठा कर चल सकें। साथ ही वह जिस तरह अपने किरदारों के साथ एक्सपेरिमेंट करती हैं, वो सीखने लायक है। उन्होंने अपना रास्ता खुद बनाया है।

    Q. इंडस्ट्री में ऐसी दोस्ती मिलना काफी रेयर होता है। खुद को खुशनसीब मानते हैं?

    बिल्कुल, इस मामले में मैं लकी रहा हूं कि मुझे बहुत अच्छे दोस्त मिले हैं। कुछ इंडस्ट्री से हैं, कुछ बाहर से हैं। मैं खुश हूं कि यहां मुझे तापसी मिली। फिल्म थप्पड़ ने मुझे बहुत कुछ दिया है, सिर्फ सफलता या पहचान ही नहीं, बल्कि बहुत प्यारे रिश्ते भी दिये हैं।

    Q. 'दोबारा' की किस बात ने आकर्षित किया?

    Q. 'दोबारा' की किस बात ने आकर्षित किया?

    इस फिल्म को करने के पीछे मेरे लिए एक ही आकर्षण था, वो थे अनुराग कश्यप। वो मुझे कोई भी फिल्म दे देते तो मैं कर लेता। उन्होंने 'मेड इन हेवन' का एक एपिसोड देखने के बाद मुझे मैसेज किया था। फिर जब मैं उनसे मिला तो उन्होंने सीधे यही कहा कि, "मैं एक पिक्चर कर रहा हूं, उसमें तापसी है, तुम्हारा ऐसा पार्ट होगा, मैं स्क्रिप्ट भेजा दूंगा तुम्हें, तुम पढ़ लो, फिर बताओ मुझे।" सच बताऊं तो उस वक्त एसी में बैठकर भी मेरे पसीने छूट रहे थे। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि 13 साल से जो आप सुनना चाह रहे हो, वो अचानक से पूरा होता दिख रहा है। मुझे तो ऐसा लग रहा था कि छोटा सा पार्ट होगा कुछ। लेकिन फिर मुझे पता चला कि मैं लीड रोल में हूं, तो मुझे लगता है कि उस दिन मेरी जिंदगी बदल गई। और ये सब थप्पड़ की रिलीज से पहले ही हुआ था।

    Q. 'दोबारा' स्पैनिश फिल्म 'मिराज' की हिंदी रीमेक है। ओरिजनल फिल्म को पहली बार देखने के बाद आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?

    दरअसल, जब हमें स्क्रिप्ट मिली और हमने रीडिंग सब कर ली थी, उसके बाद 'मिराज' रिलीज हुई थी। स्क्रीनप्ले के राइट्स पहले ही खरीद ली गई थी। हम सबने तो बहुत बाद में ओरिजनल फिल्म देखी। तब तक हमारा स्क्रीनप्ले, प्री- प्रोडक्शन सब कुछ हो चुका था। फिर जब मैंने मिराज देखी तो भी मैंने बस ऐसे ही देख ली, मैं उससे कुछ अपनाना नहीं चाहता था क्योंकि मुझे पता था कि अनुराग सर अपनी ही तरह की फिल्म बना रहे हैं। जैसे आप कोई कहानी पढ़ते हो तो उसकी अपनी अलग कल्पना करते हो, कोई और अपनी अलग कल्पना करता है। तो यहां हम अनुराग सर की कल्पना के साथ चल रहे थे।

    Q. अनुराग कश्यप के साथ इससे पहले आपने 'युद्ध' में भी काम किया था?

    Q. अनुराग कश्यप के साथ इससे पहले आपने 'युद्ध' में भी काम किया था?

    युद्ध में वो क्रिएटिव डायरेक्टर थे, तो उस वक्त मुलाकात नहीं हुई थी। मैंने फिर उनके साथ घोस्ट स्टोरीज में एक छोटा सा पार्ट किया था।

    Q. एक दफा आपने कहा था कि अनुराग कश्यप आपके करियर के लिए बेहद खास रहे हैं। इस बारे में यदि आप कुछ शेयर करना चाहें?

    उन्होंने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। वो हमेशा मुझसे कहते रहते हैं कि तुम और बहुत अच्छा कर सकते हो। तुम्हें और मौके मिलने चाहिए। कुछ लोग होते हैं ना जो पीठ पीछे बुराई करते हैं.. तो अनुराग सर वैसे हैं कि वो पीठ पीछे अच्छाई करते हैं। मैं काफी लोगों से सुनता था कि अनुराग सर तेरे बारे में बहुत अच्छी अच्छी बातें बोल कर गए हैं। और उस वक्त वो मुझे जानते भी नहीं थे। हमारी कभी हाई हेलो से ज्यादा बात भी नहीं हुई थी। मैं उनका आभारी हूं कि उन्होंने बतौर कलाकार मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया है। इसीलिए मैं कहता हूं कि वो मेरे करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

    Q. 'युद्ध' की बात करें तो उसमें आपने अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर किया था। और अब आप उनके साथ 'गुडबाय' भी कर रहे हैं। बिग बी के साथ अपने अनुभव को बताएं?

    Q. 'युद्ध' की बात करें तो उसमें आपने अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर किया था। और अब आप उनके साथ 'गुडबाय' भी कर रहे हैं। बिग बी के साथ अपने अनुभव को बताएं?

    पहली बार जब मैंने उनके साथ युद्ध में काम किया था तो मैं बहुत नर्वस था। लेकिन इस बार थोड़ा आसान रहा। गुडबाय में मैं उनके बेटे का किरदार निभा रहा हूं। मतलब मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि उनके कद का और उनके जितना स्टारडम पा चुका इंसान सेट पर इतना बच्चे की तरह उत्साही होगा। इतनी एनर्जी हैं उनमें कि हम युवा शर्मिंदा हो जाएं। मैं इस बारे में बता भी नहीं सकता कि एक अभिनेता के रूप में वो कितने भूखे हैं। वो कभी बोर नहीं होते। मैंने कई बार उनसे कहा है कि सर आपकी घड़ी में 36 घंटे होते हैं क्या? आपको इतना वक्त कैसे मिलता है। वो ब्लॉग भी लिखते हैं, ट्विटर पर भी एक्टिव रहते हैं, केबीसी भी करते हैं, फिर ब्राण्ड शूट करनी है, म्यूजिक सुनना और हमें भी सुनाना है और फिर एक्टिंग भी करनी है.. और उसके लिए रिहर्सल भी करना है। मुझे तो लगता है कि वो सोते ही नहीं हैं। कभी कभी उनकी एनर्जी से ईर्ष्या होती है। 'ऐज इज जस्ट अ नंबर' वाले कहावत को बिग बी ने साबित किया है।

    Q. आपने नसीरूद्दीन शाह से भी ट्रेनिंग ली है?

    Q. आपने नसीरूद्दीन शाह से भी ट्रेनिंग ली है?

    नसीर सर फिल्म स्कूल में दो सालों तक मेरे टीचर रहे थे। उसके बाद मैंने उनके साथ दो- तीन साल थियेटर किया था। सच कहूं तो, मेरे मम्मी- पापा मुझे फिल्म स्कूल नहीं भेजते, यदि नसीर सर मेरे टीचर नहीं होते। उनके लिए बहुत बड़ी बात थी कि मैं नसीरूद्दीन शाह के अंदर कुछ सीखने वाला हूं। वो बहुत अनुशासनप्रिय और बहुत ही प्यारे टीचर थे। मुझे अभिनय के बारे में जो भी, जितना भी पता है, वो उन्हीं की वजह से पता है। मुझे याद है उन्होंने पहली क्लास में ही हम सबसे कहा था कि कोई आपको अभिनय सिखा नहीं सकता है, आप खुद अभिनय सीख सकते हैं। उस वक्त ही मेरे अंदर का छात्र जाग गया था कि आपको जिंदगी में हर चीज से सीखना पड़ेगा.. कोई आपको हाथ पकड़कर सिखाएगा नहीं। फिर तीन साल जब मैंने उनके साथ थियेटर किया, वो मेरे लिए बहुत ही शानदार अनुभव रहा था। और अच्छी बात है कि जब उन्होंने थप्पड़ देखा, तो उन्होंने मुझे मैसेज किया था कि उन्हें मुझ पर गर्व है। वो मेरे लिए किसी भी तारीफ से बढ़कर था।

    Q. करियर के शुरुआत में आपने बतौर असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर भी काम किया था? उस वक्त का अनुभव आज कितना काम आता है?

    फिल्म स्कूल से निकलने के बाद पैसे तो थे नहीं और मैं घर पर बैठ नहीं सकता था। मुझे लगता था कि मैं घर पर बैठूंगा और सिर्फ ऑडिशन दूंगा तो मैं ऊब जाऊंगा। इसीलिए मुझे लगा कि कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए, जिससे कुछ सीखने को भी मिलेगा और कमाई भी हो जाएगी। फिर मैंने बतौर असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर काम करना शुरु किया, ताकि पता चले कि कास्टिंग होती कैसे है, प्रोड्यूसर- डायरेक्टर को क्या अच्छा लगता है, बात कैसे करनी चाहिए? लाइफ के उस फेज़ से मैंने बहुत कुछ सीखा है। मेरी पहली नौकरी धर्मा में थी और फिल्म 'माई नेम इज खान' के दौरान मैं असिस्टेंट था। उस वक्त मैं 20 साल का था और मुझे खुशी है कि सभी मेरे साथ बहुत अच्छे थे। उस फेज ने मुझे हिम्मत दी थी कि मैं इंडस्ट्री में बना रहूं और कोशिश जारी रखूं।

    Q. इंडस्ट्री में इनसाइडर- आउटसाइडर को लेकर काफी चर्चा रहती है। इस बारे में आपका क्या सोचना है?

    Q. इंडस्ट्री में इनसाइडर- आउटसाइडर को लेकर काफी चर्चा रहती है। इस बारे में आपका क्या सोचना है?

    नेपोटिज्म को लेकर दरअसल मेरी सोच बहुत अलग है। मतलब कहां नहीं है ये? लेकिन अंत में आपका टैलेंट ही आपको आगे बढ़ाता है। जाहिर है स्टारकिड्स को कुछ ज्यादा मौके मिल सकते हैं, लेकिन आपको खुद को प्रूव तो करना ही पड़ेगा। आज दुनिया के सबसे बड़े सुपरस्टार एक आउटसाइडर हैं, शाहरुख खान। मुझे लगता है कि शाहरुख खान की वजह से ही आज हम लोग सब यहां पर बैठे हैं। सब यही सोचकर इंडस्ट्री में आते हैं कि हम शाहरुख खान बन जाएंगे। मैं भी यही सोचकर आया था कि शाहरुख खान बनना है और शाहरुख खान की जिंदगी चाहिए। और स्टार शाहरुख खान नहीं, बल्कि वो जैसे इंसान हैं, जैसे बोलते हैं, जैसे किरदार चुनते हैं, खुद को जिस तरह मैनेज करते हैं.. वैसा इंसान बनना है। उनकी खुद की जर्नी इतनी कमाल की रही है, शायद इसीलिए वो हम सभी के जर्नी की प्रेरणा रहे हैं।

    Q. रिजेक्शन से आप किस तरह से डील करते हैं?

    बहुत रिजेक्शन मिले हैं और बहुत बार दिल भी टूटा है। किसी ब्रेकअप की तरह महसूस होता था। उतना ही रोना आता था। फिर दो- तीन साल के बाद आपको इन सब बातों की आदत हो जाती है। इस इंडस्ट्री में आपको मोटी चमड़ी करनी ही पड़ेगी। एक- दो रिजेक्शन से खासकर बहुत दिल टूटा था। उनमें से एक मनमर्जियां थीं। उसके लिए मैंने बहुत मेहनत की थी। विक्की कौशल वाले पार्ट के लिए मैंने ऑडिशन दिया था, जिसमें उन्होंने भी बहुत ही शानदार काम किया है। लेकिन सच यही है कि मेरा दिल टूटा था, जब वो रोल मुझे नहीं मिला। उसके लिए 6 महीने मैंने तैयारी की थी। अनुराग सर को भी पता है कि मैंने उस फिल्म के लिए ऑडिशन दी थी। तापसी तो अभी भी मुझे बहुत छेड़ती है इस बात को लेकर। थप्पड़ की शूटिंग के दौरान वो वैनिटी में बिठाकर मुझे मनमर्जियां दिखाती थी।

    Q. 'थप्पड़' आपके लिए बदलाव लेकर आया। अब जिस तरह की फिल्में आ रही हैं, उससे संतुष्ट हैं?

    Q. 'थप्पड़' आपके लिए बदलाव लेकर आया। अब जिस तरह की फिल्में आ रही हैं, उससे संतुष्ट हैं?

    हां, आज जिस तरह के ऑफर्स मुझे मिल रहे हैं, मैं बहुत खुश हूं। जिन मेकर्स से मुझे जुड़ने का मौका मिल रहा है, वो बहुत बड़ी बात है। आज मेरे पास विकास बहल, अश्विनी अय्यर तिवारी, अनुराग कश्यप जैसे निर्देशकों की फिल्म है, मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे ये मौके मिल रहे हैं। लेकिन 13 साल मैंने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया है, बहुत सीखा है, बहुत मेहनत की है.. इसीलिए खुशी भी ज्यादा होती है। गुडबाय में मैं पहली बार कॉमेडी कर रहा हूं। मुझे खुद नहीं पता था कि मैं कॉमेडी कर सकता हूं कि नहीं। लेकिन मुझे बहुत मजा आया।

    Q. निर्देशकों की कोई विश लिस्ट है, जिनके साथ आप काम करना चाहते हैं?

    जोया अख्तर के साथ मैंने काम किया है, लेकिन मैं उनके साथ एक फीचर फिल्म करना चाहता हूं। फिर राजकुमार हिरानी, शूजित सरकार, करण जौहर, अनुराग कश्यप हैं.. मैं सबके साथ काम करना चाहता हूं। (हंसते हुए) मेरी लिस्ट बहुत लंबी है।

    English summary
    In an exclusive interview with Filmibeat, Pavail Gulati talked about his film Dobaaraa, his friendship with Taapsee Pannu, working experience with Anurag Kashyap, Amitabh Bachchan, about nepotism and much more.
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