Exclusive Interview: बॉक्स ऑफिस पर कमाई नहीं होगी तो फिल्में कैसे बन पायेंगी- अर्जन बाजवा

20 साल से अधिक का सफर तय कर चुके अर्जन बाजवा ने फैशन, कबीर सिंह, रुस्तम और गुरु जैसी कई सुपरहिट फिल्मों के साथ निराशा भी देखी है। अर्जन बाजवा का मानना है कि उतार-चढ़ाव एक्टर की जिंदगी का हिस्सा है। ऐसे में कई ऐसी फिल्में रही हैं जिनके रिलीज के बाद उन्हें मायूसी हाथ लगी है। फिर भी वह इसे सीख मानकर निरंतर तेज रफ्तार से आगे बढ़ते रहे हैं।

Arjan bajwa

अर्जन बाजवा ने बतौर एक्टर अपनी अगली मंजिल चुनी है अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज बेस्टसेलर को। अमेजन प्राइम की इस सीरीज की पूरी कहानी अर्जन बाजवा के किरदार के ईद-गिर्द घूमती है। Filmibeat Hindi फिल्मीबीट हिंदी से हुई खास बातचीत में अर्जन बाजवा ने अपनी हाजिरजवाबी से यह साबित कर दिया कि अनुभव किसे कहते हैं। यहां पढ़िए बॉक्स ऑफिस, बॅालीवुड और सोशल मीडिया से जुड़े सवालों पर अर्जन का बेबाक जवाब।

बेस्टसेलर सीरीज का हिस्सा बनने की वजह यह रही है कि कहानी आप के किरदार के चारों तरफ है?

बेस्टसेलर सीरीज का हिस्सा बनने की वजह यह रही है कि कहानी आप के किरदार के चारों तरफ है?

इस तरह की कहानी को जब मुख्य तौर पर कहने का मौका मुझे मिलता है तो उससे अधिक दिलचस्प क्या हो सकता है। बेस्टसेलर साइकोलॉजिकलथ्रिलर है। एक अच्छी टीम और कहानी एक साथ इस सीरीज का हिस्सा है।मैं एक लेखक की भूमिका निभा रहा हूं। एक अजनबी उसकी जिंदगी में आता है भूत भविष्य और वर्तमान के काफी उतार चढ़ाव मेरे किरदार में देखने को मिलेगा। कई सारी चीजें खुलनी शुरू हो जाती हैं।

सलमान, शाहरुख की फिल्मों में काम करने की बजाए आपने कंटेंट आधारित फिल्में जैसे गुरु, फैशन को प्राथमिकता दी?

सलमान, शाहरुख की फिल्मों में काम करने की बजाए आपने कंटेंट आधारित फिल्में जैसे गुरु, फैशन को प्राथमिकता दी?

सलमान और शाहरुख की फिल्मों में भी कंटेंट होता है। मैं तो चाहता हूं कि मेरा करियर भी उनकी तरह बने। वैसे कहानी में अच्छा कंटेंट होना ही चाहिए। मैं यह कहूंगा कि उनकी जो फिल्में हैं जिस तरह का कंटेंट उनकी फिल्मों में होता है मुझे भी ऐसी फिल्में करना है। मैं कोशिश कर रहा हूं उस तरह का काम करने की। बाकी खुशनसीब हूं कि मुझे कई बेहतरीन फिल्में मिली हैं। कंटेंट होना जरूरी है वरना काम करने का क्या मतलब। बाकी दर्शक तय करते हैं कि आप अच्छे लग रहे हैं या नहीं।

आप कौन सी फिल्म और किरदार को 20 साल के करियर में खुद के लिए मील का पत्थर मानते हैं?

आप कौन सी फिल्म और किरदार को 20 साल के करियर में खुद के लिए मील का पत्थर मानते हैं?

फैशन एक ऐसी फिल्म थी जहां पर काफी चीजें अच्छी हुईं। क्योंकि मैं इतनी बड़ी स्टार प्रियंका चोपड़ा के अपोजिट था। बहुत अच्छा किरदार था और फिल्म बड़ी हिट हुई। उस फिल्म के कारण मुझे लाइमलाइट मिली और कहानी चल पड़ी। मेरे लिए अच्छे किरदार आते रहे हैं। हाल ही में मैंनेस्टेट ऑफ सीज 26/11 मेंकर्नल सुनील श्योराण का किरदार निभाया। वह रियल लाइफ हीरो हैं। यह किरदार मेरे दिल के करीब हमेशा रहेगा।

फैशन के बाद आप रातों रात स्टार बन गए, क्या आपको ऐसा महसूस हुआ?

फैशन के बाद आप रातों रात स्टार बन गए, क्या आपको ऐसा महसूस हुआ?

हर अच्छी फिल्म से आप आगे ही बढ़ते हैं। फैशन से हिंदी कमर्शियल मैन स्ट्रीम सिनेमा में मुझे एंट्री मिली। स्टार बनना या स्टार ना बनना यह आपकी हर फिल्म से यह तय होता है। अगर आपकी किसी फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो आपका स्टारडम नीचे भी आ जाता है। और जब अच्छी चलती है तो आप अचानक से ऊपर भी चले जाते हैं। मैं यह मानता हूं कि काम करते रहना जरूरी है। स्टार दर्शक बनाते हैं। उनके दिल में आप उतर जाए तो आप स्टार बन जाते हैं।

क्या बॅालीवुड फेवर और बॉक्स ऑफिस पर चलता है?

क्या बॅालीवुड फेवर और बॉक्स ऑफिस पर चलता है?

जी हां, इसमें कोई दोराय नहीं है। देखा जा तो यह एक बिजनेस है। इसमे सिर्फ यह तो नहीं है कि आपने जो भी फिल्म बनाई उसे अपने घर में देखेंगे। क्योंकि लोगों के सामने उसको दर्शाना बेहद जरूरी है। और जब अच्छी चीज चलती है तो आपका करियर ग्राफ भी ऊपर जाता है। कमर्शियल के साथ हर तरीके से। मैं इस चीज को महत्व देता हूं कि कमर्शियल चीजें चलनी चाहिए।अगरबॉक्स ऑफिस पर कमाई नहीं होगी तो फिल्में कैसे बन पायेंगी। फिल्मों में पैसा लगता है। पैसे फिल्में कमाती हैं तभी चीजें आगे बढ़ती हैं।

सोशल मीडिया पर हर कोई स्टार है, क्या स्टारडम का मायना खो चुका है?

सोशल मीडिया पर हर कोई स्टार है, क्या स्टारडम का मायना खो चुका है?

विशेष होना खो चुका है।स्टारडम नहीखोया है। जो चीजें ट्रेंड करती हैं जरूरी नहीं है कि वो खराब हैं। अच्छी चीजें भी ट्रेंड करती हैं। मगर मैं सोशल मीडियाट्रेंडिंग को काबिलियत नहीं मानता। काबिलियत वो होती है जब आप किसी मुकाम पर पहुंचतेहैं। लोग आपको पसंद करते हैं। आपकी फिल्म चलती है आपके किरदार को पसंद किया जाता है। आपके बारे में लिखा जाता है। इंटरव्यू लिएजाते हैं। ऐसा करने के लिए बहतुमेहनत जद्दोजहद करनी पड़ती थी। ऐसा नहीं है कि आपने एक वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। पहले कहीं पर छपने दिखने के लिए मेहनत करनी पड़ती थी। वो आपकी काबिलियत को बताता था। वो बताता था कि स्टारडम हासिल किया है या नहीं।

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