INTERVIEW: 'इरफान सर मुझसे बहुत प्यार करते थे, उन्होंने मुझे कहा था कि तुम एक्टर बनो'- अनुद सिंह ढाका

बतौर मेनलीड एक्टर अपनी पहली फिल्म 'जनहित में जारी' को लेकर अभिनेता अनुद सिंह ढाका बहुत उत्साहित हैं। फिल्म को लेकर उत्साह जताते हुए उन्होंने कहा, "सच कहूं तो मैं दिमाग में इस सच्चाई को लाना नहीं चाह रहा हूं कि फिल्म रिलीज के इतने नजदीक पहुंच है ताकि मुझे घबराहट महसूस ना हो। बहुत सारे इमोशंस हैं, जो अभी मेरे दिल दिमाग में चल रहे हैं। फिल्म रिलीज होगी, वो कैसा करेगी, लोगों को मेरा काम कैसा लगेगा.. ये सब फिलहाल मुझे कुछ नहीं पता। मैं चिंताओं से दूर रहना चाहता हूं क्योंकि चीजें अनिश्चित हैं। ये अभी का वक्त मेरे लिए काल्पनिक है।"

जय बसंतू सिंह के निर्देशन में बनी 'जनहित में जारी' 10 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फिल्म में नुसरत भरूचा, अनुद सिंह ढ़ाका, विजय राज, बृजेंद्र काला, परितोष त्रिपाठी जैसे कलाकार हैं। यह फिल्म गर्भपात, गर्भनिरोधक, सुरक्षित सेक्स, पितृसत्ता जैसे गंभीर मुद्दों को छूती है।

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अनुद इससे पहले छिछोरे, सुपर 30, ताज महल 1989, लव जे एक्शन जैसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे हैं। जबकि इरफान स्टारर फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया है। 'जनहित में जारी' की रिलीज से पहले अनुद सिंह ढाका ने मीडिया से खास बातचीत की, जहां उन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म और सेक्स एजुकेशन की जरूरत को लेकर खुलकर बातें की। साथ ही उन्होंने फिल्म 'करीब करीब सिंगल' के दौरान इरफान खान के साथ शेयर हुए अपने अनुभवों को भी सामने रखा।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. फिल्मों में आना कैसे हुआ? कब सोचा आपने की एक्टर बनना है?

Q. फिल्मों में आना कैसे हुआ? कब सोचा आपने की एक्टर बनना है?

मैं भोपाल के एक मध्यमवर्गीत परिवार से हूं। मेरी पढ़ाई वहीं हुई। मेरी लाइफ ऐसी रही है कि मुझे घर पर टीवी देखने तक की अनुमति नहीं थी। घर में कल्चर था कि अच्छे से पढ़ाई करिए, पढ़ाई कर के करियर बनाइए, शादी करिए, सेटल हो जाइए। कोई डिबेट नहीं था इस पर। एक्टिंग में आना गलत माना जाता था, इसलिए वे इस पेशे में आने के मेरे फैसले से खुश नहीं थे। लेकिन कहीं ना कहीं, मैं हमेशा से एक्टिंग करना चाहता था। लेकिन डर भी था क्योंकि बिल्कुल ही एक्सपोज़र नहीं था, कोई गाइड करने वाले नहीं थे। फिर कॉलेज के लिए मैं बाहर निकला.. तो वहां से धीरे धीरे कॉलेज में प्रोग्राम करने लगा, नाटक का हिस्सा बनने लगा। मैं बहुत छोटी छोटी सफलता पाते हुए यहां तक पहुंचा हूं। पहले पता ही नहीं होता था कि ऑडिशन कहां होते हैं, फिर जब पता चला तो उन कमरों में एंट्री नहीं थी.. फिर जब एंट्री मिली तो शॉर्टलिस्ट नहीं होते थे, फिर शॉर्टलिस्ट होना चालू हुए, कभी शॉर्टलिस्ट होकर रिजेक्ट हुए, कभी किसी का छोड़ा हुआ रोल दिया कि वो नहीं कर रहा तुम कर लो। तो इसी तरह मैं कभी आधी, कभी एक साढ़ी चढ़ते चढ़ते यहां तक पहुंचा हूं।

Q. बतौर हीरो ये आपकी पहली बड़ी फिल्म है। अपने डेब्यू को लेकर कितने उत्साहित हैं?

Q. बतौर हीरो ये आपकी पहली बड़ी फिल्म है। अपने डेब्यू को लेकर कितने उत्साहित हैं?

मुझे लगता है कि ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर बनी फिल्म है और मैं इससे बेहतर डेब्यू का नहीं सोच सकता था। 'जनहित में जारी' जैसी फिल्में बनना बहुत जरूरी है और लोगों को इसे जरूर देखना चाहिए। साथ ही अच्छी बात ये है कि ये एक कॉमेडी फिल्म है। समाज में लोगों को आप लट्ठ मारके जागरूक नहीं कर सकते, लेकिन हंसते हंसाते वो बात उन तक पहुंचाना शायद थोड़ा आसान हो जाता है। आपने ज्ञान नहीं दिया, आपने सिर्फ बता दिया कि देखो भई ऐसा है। सोच के देखिए तो कितनी गलत बात है कि कंडोम एक टैबू है और असुरक्षित सेक्स नहीं। हर साल कितनी महिलाओं अबॉर्शन की वजह से अपनी जान खोती हैं। मुझे लगता है कि ये फिल्म कोई देखे ना देखे.. औरतों को जरूर देखनी चाहिए।

Q. फिल्म में कई शानदार कलाकारों की टोली है। सबसे साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा?

Q. फिल्म में कई शानदार कलाकारों की टोली है। सबसे साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा?

देखा जाए तो वहां, उस फिल्म के सेट पर सभी अच्छे एक्टर्स थे। नुसरत, विजय राज, बृजेंद्र काला, टीनू आनंद.. मैंने इन सबसे बहुत सीखा है। ये कलाकार परवाह नहीं करते कि वो इतने सीनियर हैं और मैं न्यूकमर। इस वजह से मैं भी अपने किरदार में बेहतर तरीके से ढ़ल पाया। फिल्म के सेट पर जब माहौल पॉजिटिव सा होता है ना, तो काम करना बहुत आसान हो जाता है।

Q. सेक्स और कंडोम जैसे विषय पर बात करना आज भी कई परिवारों में अनुचित माना जाता है। इस पर क्या राय रखते हैं?

मैं तो सोचता हूं कि हमारे यहां सेक्स एजुकेशन सिर्फ assumption पर चल रही है। आज भी ऐसा होता है कि घर में मां- बाप सोचते हैं कि स्कूल में पढ़ाई होगी ही.. और स्कूल में reproduction चैप्टर ही स्किप कर दिया जाता है। अपनी हिपोक्रेसी छिपाने के लिए हम लोग शर्म, हया, पर्दा का सहारा ले लेते हैं। कोई किसी से इस बारे में बात ही नहीं करता। सुरक्षित सेक्स, कंसेंट कितनी जरूरी होती है, ये बताया ही नहीं जाता। फिर शादी हो जाती है। तो हमारे जानकारी का सोर्स क्या होता है? पोर्नोग्राफी! और यदि ये हमारा सोर्स है तो सोचिए कितनी गलत बात है। यदि हम इतने ही जिम्मेदार होते तो हमारी जनसंख्या 140 करोड़ नहीं होती।

Q. करीब करीब सिंगल में आपने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया था। इरफान से जुड़ी कुछ यादें शेयर करना चाहेंगे?

Q. करीब करीब सिंगल में आपने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया था। इरफान से जुड़ी कुछ यादें शेयर करना चाहेंगे?

मैं इरफान सर से बहुत मोहब्बत करता था और इरफान सर भी मुझसे बहुत मोहब्बत करते थे। मैं उन्हें आज भी याद करता हूं। आप ना चाहो तो भी आप उनसे बहुत कुछ सीख जाते हो। उनके अभिनय में इतनी सहजता होती थी.. कि आप भी महसूस करते थे कि यार ऐसी दुनिया हिला देने की जरूरत नहीं होती है। कई बार सिर्फ उस लम्हे में मौजूद होना काफी होता है। शूटिंग के दौरान एक दफा उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम ना इधर हो ना उधर हो, तुम सही जगह हो, तुम एक्टर बनो। एक बार जब उन्होंने ये बात कह दी, उसके बाद मैंने कभी बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम नहीं किया। कुछ समय तक मैंने डिज्नी के लिए कार्टून्स लिखे.. और साथ ही ऑडिशन देते रहा। फिर धीरे धीरे जो काम आता गया, मैं कर रहा हूं। मुझे बहुत दुख है कि वो आज मेरा काम देखने के लिए नहीं हैं।

Q. फिल्म इंडस्ट्री को लेकर आपकी क्या पूर्वधारणा थी? अब आपने यहां कुछ समय गुजार लिये हैं तो क्या लगता है आपके ख्यालों से कितनी मिलती- जुलती या कितनी अलग है ये दुनिया?

Q. फिल्म इंडस्ट्री को लेकर आपकी क्या पूर्वधारणा थी? अब आपने यहां कुछ समय गुजार लिये हैं तो क्या लगता है आपके ख्यालों से कितनी मिलती- जुलती या कितनी अलग है ये दुनिया?

रिएलिटी ये है कि बाहर से देखने में आपको जितना लगता है, उससे बहुत ज्यादा मेहनत मांगती है ये इंडस्ट्री। जब मुंबई आया था तो लगता है कि बस एक हफ्ते में हीरो बन जाऊंगा, मुझे सिर्फ सही लोगों से मिलना है। (हंसते हुए) दस साल हो गए.. अभी भी नहीं पता होता कि इस प्रोजेक्ट के बाद कहां जाऊंगा, क्या करूंगा। तो हां, ये आपकी सोच से कहीं ज्यादा मेहनत डिमांड करती है।

Q. रिजेक्शन को किस तरह प्रोसेस करते हैं?

Q. रिजेक्शन को किस तरह प्रोसेस करते हैं?

एक फिल्म के लिए ऑडिशन देने के बाद, मैंने जवाब के लिए 6-7 महीने तक इंतजार किया। लेकिन बाद में जब वह फिल्म रिलीज हो गई तब मुझे पता चला कि मुझे रिजेक्ट कर दिया गया है। मुझे थोड़ी हैरानी हुई। मुझे लगता है कि आम तौर पर एक व्यक्ति को अपने जीवन में 50 से 60 रिजेक्शन का सामना करना पड़ता होगा, लेकिन हम एक महीने में इसका सामना करते हैं। कभी ऑडिशन देने के बाद तो कभी कमरे में घुसते ही। लेकिन अंत में, एक समय के बाद आपको एहसास होता है कि रिजेक्ट होना महत्वपूर्ण नहीं है, अवसर का लाभ उठाना महत्वपूर्ण है।

Q. निर्देशकों की कोई विश लिस्ट है, जिनकी फिल्मों में काम करना चाहेंगे?

बहुत सारे हैं लिस्ट में.. लेकिन यदि नाम देना हो मैं विक्रमादित्य मोटवाने, नीरज घेवान, राज शांडिल्य, विनिल मैथ्यू की फिल्मों का हिस्सा जरूर बनना चाहूंगा।

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